सानाः ईरान के बाद अब यमन सरकार के खिलाफ भी हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इससे यमन में अराजकताओं का बोलबाला हो गया है। लोग दक्षिणी यमन स्वतंत्रता की वापसी का सपना लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मध्य पूर्व यमन के दक्षिणी हिस्से में विशेष रूप से अदन शहर में लाखों लोग 1990 से पहले के दक्षिण यमन राज्य की बहाली की मांग कर रहे हैं।
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार आंदोलनकारियों की यह मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सऊदी समर्थित सरकार से गहरी खाई पैदा कर रही है। साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के नेतृत्व में यह स्वतंत्रता आंदोलन जमीन पर क्रूर वास्तविकता से जूझ रहा है। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे वक्त में हो रहा है, जब देश में गैस की भारी कमी है, अर्थव्यवस्था ठप है और स्वास्थ्य प्रणाली बदहाल है। अदन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जहां वे दक्षिण यमन के पुराने झंडे लहराते हुए स्वतंत्रता के नारे लगा रहे हैं। 2017 में एसटीसी यूएई के समर्थन से बना था। वह अब दक्षिण को अलग राष्ट्र बनाने की मांग कर रहा है।
साल 1990 में उत्तर और दक्षिण यमन के एकीकरण के बाद से दक्षिणी लोग खुद को हाशिए पर महसूस करते हैं। उत्तर के हूती विद्रोहियों से युद्ध, सऊदी-यूएई गठबंधन की हस्तक्षेप और आर्थिक संकट ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। साल 2025-2026 में STC ने दक्षिणी क्षेत्रों पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन जनवरी 2026 में सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने काउंटरऑफेंसिव चलाकर अदन सहित कई इलाकों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया। STC के नेता एडरूस अल-जुबैदी यूएई भाग गए और काउंसिल ने खुद को भंग घोषित कर दिया। फिर भी, विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
कुछ प्रदर्शनों में हिंसा हुई है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई घायल हुए। स्थानीय लोग कहते हैं कि गैस की कमी से रसोई और परिवहन ठप है, अर्थव्यवस्था रुकी हुई है और अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं। युद्ध और अस्थिरता ने लाखों को विस्थापित कर दिया है। STC समर्थक मानते हैं कि स्वतंत्र दक्षिण यमन में बेहतर विकास और स्थिरता आएगी, लेकिन सऊदी-यूएई प्रतिद्वंद्विता और हूती खतरे के बीच यह सपना दूर लगता है। यह आंदोलन यमन के भविष्य को दो हिस्सों में बांट रहा है, जिसमें एक तरफ एकीकरण की कोशिश और दूसरी तरफ दक्षिणी पहचान और स्वतंत्रता की पुकार है।
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