नई दिल्ली: तारीख बदलती रही, साल बदलते गए, पर आखिरकार मुंबई सीरियल बम ब्लॉस्ट के दोषी को फांसी पर लटकाने का आदेश आ ही गया। इस घड़ी का इंतज़ार करोड़ों भारतीयों को पिछले 23 सालों से था। याकूब अपनी अंतिम सांस भी उसी दिन लेगा, जिस दिन उसने इस धरती पर जन्म लिया था। जी हां, याकूब मेनन अपने जन्मदिन के दिन ही फांसी पर चढ़ेगा।
इस फांसी के फंदे से बचने के लिए याकूब ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हम आपको बता रहे हैं वो 10 दांव जो इस अपराधी ने अपनी जान बचाने के लिए चले थे, पर उसका कोई दांव नहीं चला।
- सरेंडर करने की दलील।
- जांच एजेंसियों से सहयोग का दावा।
- राष्ट्रपति के पास दया याचिका।
- गवर्नर के पास दया याचिका।
- सीजोफ्रिनिया का मरीज़ बताकर सज़ा में रहम।
- सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन।
- सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन।
- सुप्रीम कोर्ट में डेथ वॉरंट को चुनौती।
- राज्यपाल के पास दोबारा क्षमा याचिका।
- राष्ट्रपति के पास दोबारा दया याचिका।