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₹20 की पानी बोतल के लिए ग्राहक को ₹55 चार्ज करना रेस्टोरेंट को पड़ा बहुत महंगा, अब देना पड़ा मोटा मुआवजा

यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को और मजबूत करता है और देशभर के रेस्टोरेंट और होटलों के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है कि पैकेज्ड उत्पादों पर तय एमआरपी से ज्यादा वसूली किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 08, 2026 05:41 pm IST, Updated : Jan 08, 2026 05:45 pm IST
पैकेज्ड वस्तुओं पर मनमानी कीमत वसूलने वालों को सबक मिला है।- India TV Paisa
Photo:FREEPIK पैकेज्ड वस्तुओं पर मनमानी कीमत वसूलने वालों को सबक मिला है।

एक रेस्टोरेंट को 20 रुपये की पानी की बोतल के लिए ग्राहक से 55 रुपये वसूलना काफी महंगा पड़ गया। एक ऐसे ही मामले में चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यानी SCDRC ने बीते 9 दिसंबर 2025 को एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि रेस्टोरेंट और होटल प्री-पैक्ड उत्पादों-जैसे मिनरल वाटर और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर-को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर नहीं बेच सकते। आयोग ने कहा कि एमआरपी में सभी प्रकार के टैक्स, पैकेजिंग खर्च और विक्रेता का मुनाफा पहले से शामिल होता है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती देने वाला है और उन रेस्टोरेंट पर सख्त संदेश देता है, जो पैकेज्ड वस्तुओं पर मनमानी कीमत वसूलते हैं।

पानी की बोतल पर ज्यादा कीमत वसूलने का मामला

यह मामला एक ग्राहक की शिकायत से जुड़ा है। 12 दिसंबर 2023 को वह शाम करीब 8:30 बजे चंडीगढ़ के एक रेस्टोरेंट में डिनर के लिए गई थीं। उनके कुल बिल की राशि 1,922 रुपये थी, जिसमें CGST और UTGST शामिल थे। बिल में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की एक बोतल के लिए 55 रुपये चार्ज किए गए, जबकि बोतल पर अंकित एमआरपी केवल 20 रुपये थी। इस अधिक वसूली से हैरान होकर उस ग्राहक ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई।

राज्य आयोग ने दिया न्याय

पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने उनकी शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। खास बात यह रही कि ग्राहक ने बिना किसी वकील की मदद के खुद अपना पक्ष रखा और अंततः 9 दिसंबर 2025 को उन्होंने केस जीत लिया। अब रेस्टोरेंट को 3000 रुपये मुआवजे के तौर पर रेस्टोरेंट को चुकाना पड़ा।

रेस्टोरेंट की दलील को आयोग ने बताया बेबुनियाद

रेस्टोरेंट की ओर से यह तर्क दिया गया कि बेहतर एम्बियंस, एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा और सर्विस के कारण पानी की बोतल की कीमत ज्यादा ली गई। हालांकि, आयोग ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि रेस्टोरेंट को अपने खाने-पीने की वस्तुओं की कीमत तय करने की आजादी है, लेकिन जिन पैकेज्ड उत्पादों पर एमआरपी अंकित है, उनकी बिक्री लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के तहत सख्ती से नियंत्रित होती है।

क्यों जीतीं वह ग्राहक

राज्य उपभोक्ता आयोग (केस नंबर: SC/AB/CP/2025/1534) के अनुसार, मुख्य सवाल यह था कि क्या रेस्टोरेंट पानी की बोतल के लिए एमआरपी से अधिक कीमत वसूल सकता है। आयोग का साफ जवाब था-नहीं। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता को दी गई पानी की बोतल एक सीलबंद, प्री-पैक्ड वस्तु थी, जिस पर 20 रुपये एमआरपी स्पष्ट रूप से अंकित था। ऐसे में एमआरपी से अधिक राशि वसूलना कानून का उल्लंघन है।

यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को और मजबूत करता है और देशभर के रेस्टोरेंट और होटलों के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है कि पैकेज्ड उत्पादों पर तय एमआरपी से ज्यादा वसूली किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है, चाहे इसके पीछे सर्विस या एम्बियंस का कोई भी तर्क क्यों न दिया जाए।

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