घरेलू शेयर बाजार में तेजी का दौर गुरुवार को थम गया और कारोबार के आखिर में भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स सत्र के आखिर में 1236.11 अंक की भारी गिरावट के साथ ही 82,498.14 के लेवल पर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई का निफ्टी 365 अंक की बड़ी कमजोरी के साथ 25,454.35 के लेवल पर टिका। दोपहर तक इस गिरावट के चलते बीएसई-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹472 लाख करोड़ से घटकर लगभग ₹468 लाख करोड़ हो गया। निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए। आइए जानते हैं कि इस सेंसेक्स क्रैश के पीछे कौन-कौन से 5 मुख्य कारण हैं।
1. हाल के लाभ के बाद प्रॉफिट बुकिंग
पिछले कुछ दिनों में शेयर बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली थी। बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी 50 लगातार तीसरे दिन बढ़त में रहे। बजट, भारत-यूएस डील और आरबीआई की मौद्रिक नीति जैसे बड़े मैक्रो ट्रिगर्स के बाद अब बाजार में ताजा घरेलू खबरें नहीं हैं। इस कारण निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच रहे हैं।
2. अमेरिकी फेड की मिली-जुली नीतियां
जनवरी की अमेरिकी फेड की बैठक के मिनट्स से पता चला कि अधिकारी नीति को लेकर विभाजित हैं। कुछ अधिकारी मानते हैं कि मुद्रास्फीति कम होने पर दरें और घटाई जा सकती हैं, जबकि अन्य मूल्य दबाव बढ़ने पर कड़ा रुख अपनाने को तैयार हैं। फेड की दरों में कोई बदलाव न होने या बढ़ोतरी की आशंका से डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे भारत में विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है।
3. यूएस-ईरान तनाव पर नजर
CNN और Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान पर संभावित हमले की तैयारी कर रही है। निवेशक बाजार में पैसा निकाल रहे हैं क्योंकि सप्ताहांत में तनाव बढ़ने की संभावना है।
4. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
WTI और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की भावना पर असर डाला। बढ़ती तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा के लिए नकारात्मक हैं, क्योंकि भारत तेल का बड़ा आयातक है।
5. ताजा सकारात्मक ट्रिगर्स की कमी
विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 में घरेलू बाजार में बढ़त की संभावना है, लेकिन ताजा ट्रिगर्स की कमी और मिड- एवं स्मॉल-कैप्स के उच्च मूल्य स्तर के कारण बाजार रेंज-बाउंड रहा।



































