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सोने और चांदी की कीमत इस साल कहां तक जानें की उम्मीद? खुदरा निवेशक अभी खरीदारी करें या ठहरें, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 20, 2026 07:00 am IST,  Updated : Feb 20, 2026 07:00 am IST

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, लगातार बढ़ती महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक अब सुरक्षित निवेश के विकल्प ढूंढ रहे हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी सिर्फ आभूषण नहीं रह गए हैं, बल्कि मजबूत निवेश साधन के रूप में सामने आए हैं।

इस साल कितना महंगा...- India TV Hindi
इस साल कितना महंगा होगा सोना-चांदी? Image Source : CANVA

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, लगातार बनी महंगाई और दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक फिर से सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि मजबूत इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के रूप में उभर रहे हैं। तो ऐसे में मौजूदा लेवल पर खरीदारी करना समझदारी है या थोड़ा इंतजार करना बेहतर रहेगा? आइए जानते हैं।

इतिहास बताता है कि 2008 की ग्लोबल मंदी हो या कोविड-19 का दौर, सोने ने निवेशकों को सुरक्षा दी है। जब शेयर बाजार गिरते हैं, तो सोना अक्सर स्थिरता देता है। यही वजह है कि इसे ‘सेफ हेवन’ एसेट कहा जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मजबूत मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीद के चलते 2026 के अंत तक सोना ₹1,75,000 से ₹2,00,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक सहित कई केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्वर्ण भंडार बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।

चांदी: सुरक्षा भी, ग्रोथ भी

चांदी को हाइब्रिड एसेट माना जाता है। यह आर्थिक संकट में सोने जैसा व्यवहार करती है, लेकिन इसकी असली ताकत औद्योगिक मांग में है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल उपकरणों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस साल चांदी ₹2.75 लाख से ₹3.5 लाख प्रति किलोग्राम तक जा सकती है। ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग इसकी कीमतों को आगे बढ़ा सकती है। हालांकि, इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है।

खरीदें या ठहरें? क्या हो रणनीति

स्टॉकिफाई के फाउंडर और सीईआ पीयूष झुनझुनवाला  का कहना है कि फैसला निवेशक के टारगेट और रिस्क फैक्टर पर निर्भर करता है। ज्यादा रिस्क न लेने वाले निवेशक अपने पोर्टफोलियो का 5% से 15% हिस्सा सोने में रख सकते हैं, ताकि बाजार की गिरावट के समय सुरक्षा मिल सके। वहीं, आक्रामक निवेशक चांदी में अवसर तलाश सकते हैं, लेकिन उन्हें अधिक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए। चरणबद्ध निवेश या SIP जैसी रणनीति जोखिम को कम कर सकती है।

बदलते दौर में क्यों बढ़ रही है मांग?

दुनिया भर में बढ़ता कर्ज, पैसों की घटती ताकत और महंगाई के कारण लोग ऐसी चीजों में पैसा लगाना चाहते हैं जिनकी असली कीमत बनी रहे। सोना और चांदी सीमित मात्रा में मिलते हैं, इसलिए इन्हें लंबे समय तक पैसा सुरक्षित रखने का अच्छा तरीका माना जाता है। आज इनमें निवेश करना भी आसान है। आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ETF, डिजिटल गोल्ड या फिर असली सोना-चांदी खरीदकर निवेश कर सकते हैं।

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