छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक ऐसी गुफा है, जहां हजारों सालों से सूरज की एक किरण तक नहीं पहुंची है। हैरान करने वाली बात यह है कि गुफा 300 फीट की गहराई पर बड़े इलाके में फैली है। यह देश की सबसे गहरी और पुरानी गुफाओं में से एक है। इस गुफा के अंदर कई तरह के जीव रहते हैं, लेकिन सबसे अनोखी यहां की बिना आंखों वाली मछलियां हैं। इन मछलियों ने कई पीढ़ियों से सूरज की रोशनी ही नहीं देखी है। इस वजह से उनकी आंखें खत्म हो चुकी हैं।

इस गुफा को देखकर ऐसा लगता है कि कुदरत ने इंसानों से दूर अपनी एक अलग ही दुनिया बसाई है। यह जगह बस्तर की कांगेर घाटी में जमीन के काफी नीचे छिपी है। जंगल की इन परतों के नीचे झांक कर देखने पर नजारा किसी एलियन प्लेनेट जैसा लगने लगता है।

अंधी मछलियां सबसे बड़ी पहेली
यहां की सबसे बड़ी पहेली हैं, यहां की अंधी मछलियां। अनंत अंधेरे में रहते-रहते इन मछलियों की आंखें ही लुप्त हो गई हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है कि बिना आंखों के भी ये बड़ी आसानी से रास्ता ढूंढ लेती हैं। माना जाता है कि ये अपने आसपास की चीजों से टकराकर लौटने वाली ध्वनि तरंगों के जरिए रास्ता पहचानती हैं।

चुना पत्थर के प्राकृतिक झूमर
गुफा की छत से लटकते चूना पत्थर के ये प्राकृतिक झूमर किसी भी कलाकार की कल्पना से परे हैं। यहां सन्नाटा इतना गहरा है कि आपको अपनी धड़कन साफ सुनाई देगी। माना जाता है कि इन गुफाओं के कई रास्ते आज भी अनसुलझे और अनछुए हैं। इन गुफाओं के अंदर हमेशा ही अंधेरा रहता है। इसलिए यहां जाने वाले लोगों को अपने साथ टॉर्च ले जाना बेहद जरूरी होता है। गुफा तक पहुंचने का रास्ता डरावना भी है। ऐसे में यहां जाने वाले पर्यटकों को रोमांच का पूरा डोज मिलता है।
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