आयकर विभाग ने “NUDGE” पहल के तहत बड़े पैमाने पर कम्युनिकेशन भेजना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संदेश मुख्य रूप से उन करदाताओं को भेजे जा रहे हैं जिनकी सालाना आय ₹50 लाख से अधिक है या जो कंपनियों में प्रमुख प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत हैं। सूत्रों के मुताबिक, विभाग ऐसे मामलों की पहचान कर रहा है जहां आयकर रिटर्न (आईटीआर) में दी गई जानकारी विभाग के पास उपलब्ध अन्य वित्तीय डेटा से मेल नहीं खा रही है।
क्या है “NUDGE” पहल?
“NUDGE” का अर्थ है- Non-intrusive Use of Data to Guide & Enable। यह सरकार की डेटा-आधारित अनुपालन रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीधे नोटिस या जांच शुरू करने से पहले करदाताओं को अपनी गलती सुधारने का अवसर देना है। इसे एक तरह का “सॉफ्ट अलर्ट” समझा जा सकता है। यानी अगर किसी करदाता से आय रिपोर्टिंग, कटौती या छूट के दावे में गलती हुई है, तो वह समय रहते अपनी रिटर्न की समीक्षा कर उसे सुधार सकता है।
किन लोगों पर है फोकस?
इस पहल के तहत खास तौर पर निम्नलिखित श्रेणियों पर ध्यान दिया जा रहा है:
- कंपनियों के Key Management Personnel (KMP)
- ₹50 लाख से अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले व्यक्ति
- ऐसे करदाता जिनकी ITR जानकारी बैंक, वित्तीय संस्थानों या अन्य थर्ड-पार्टी स्रोतों से प्राप्त डेटा से मेल नहीं खा रही
- ऐसे मामले जहां आय कम दिखाने, संपत्ति छिपाने या गलत छूट लेने की आशंका हो
अभी सलाह, कार्रवाई नहीं
financialexpress की खबर के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि यह फिलहाल एक सलाहात्मक अभियान है, न कि दंडात्मक कार्रवाई। विभाग पहले करदाताओं को अपनी रिटर्न दोबारा जांचने और जरूरत पड़ने पर संशोधित रिटर्न दाखिल करने का अवसर दे रहा है। हालांकि, अगर इस चरण में त्रुटि नहीं सुधारी जाती और बाद में गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है, तो मामला स्क्रूटनी या पेनल्टी कार्यवाही तक पहुंच सकता है। इसलिए इस संदेश को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
कैसे काम कर रही है यह प्रणाली?
आयकर विभाग उन्नत डेटा एनालिटिक्स और जोखिम विश्लेषण टूल्स का उपयोग कर रहा है। ITR में दर्शाई गई आय, कटौतियों और छूट की तुलना थर्ड-पार्टी डेटा से की जाती है। जहां भी असंगति मिलती है, वहां “NUDGE” कम्युनिकेशन जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना और टैक्स रिपोर्टिंग को अधिक पारदर्शी बनाना है।
भरोसे पर आधारित मॉडल की ओर कदम
टैक्स अधिकारियों के अनुसार, यह पहल भरोसे पर आधारित अनुपालन मॉडल की दिशा में एक अहम कदम है। पहले जहां सीधे नोटिस जारी होते थे, अब विभाग पहले सुधार का अवसर दे रहा है। सीबीडीटी पिछले कुछ समय से डेटा विश्लेषण और सूचना-साझाकरण ढांचे को मजबूत कर रहा है। “NUDGE” को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
करदाताओं को क्या करना चाहिए?
अगर आपको ऐसा कोई संदेश मिलता है, तो अपने ITR की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें।
Form 26AS, AIS और TIS से डेटा का मिलान करें।
दावा की गई कटौतियों और छूट की पात्रता जांचें।
आवश्यकता होने पर संशोधित रिटर्न दाखिल करें।






































