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नहीं थम रहीं मुश्किलों की आंधी! अब थलापति विजय पर गिरी एक और गाज, नहीं हटेगा 1.5 करोड़ का जुर्माना

थलापति विजय की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब मद्रास हाईकोर्ट ने उनकी प्ली खारिज कर दी है। क्या है पूरा मामला जानने के लिए नीचे स्क्रोल करें।

Reported By : T Raghavan Written By : Jaya Dwivedie Published : Feb 06, 2026 12:22 pm IST, Updated : Feb 06, 2026 12:22 pm IST
Thalapathy Vijay- India TV Hindi
Image Source : THALAPATHY VIJAY INSTAGRAM थलापति विजय।

मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेता से नेता बने विजय की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा लगाए गए 1.5 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी थी। यह जुर्माना वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये की अघोषित आय के सिलसिले में लगाया गया था। सिंगल जज जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने यह फैसला 23 जनवरी 2026 को सुरक्षित रखने के बाद सुनाया।

कोर्ट का तर्क

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शो कॉज नोटिस इनकम टैक्स एक्ट की धारा 263 के तहत तय समय सीमा के भीतर जारी किया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने के तरीके में कोई कमी नहीं पाई गई। इस कारण कोर्ट ने अन्य पहलुओं पर विचार नहीं किया। हालांकि अदालत ने विजय को यह छूट दी कि वह लिमिटेशन को छोड़कर अन्य आधारों पर अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने नोटिस और आदेश को चुनौती दे सकते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद सितंबर 2015 में विजय के घर पर हुए इनकम टैक्स सर्च से शुरू हुआ। इसके बाद दिसंबर 2017 में एक असेसमेंट ऑर्डर पारित किया गया। इसके बाद दिसंबर 2018 में धारा 271AAB(1) के तहत पेनल्टी की प्रक्रिया शुरू हुई। विजय ने इस असेसमेंट को इनकम टैक्स कमिश्नर (अपील) के सामने चुनौती दी। कमिश्नर ने आंशिक रूप से उनके मामले को स्वीकार किया। इसके बाद, डिपार्टमेंट ने मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में ले गया। ITAT ने आंशिक रूप से विजय के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें उनके फैन एसोसिएशन से जुड़े कुछ खर्च भी शामिल थे।

पेनल्टी और सुधार नोटिस

सर्च के दौरान सरेंडर किए गए 15 करोड़ रुपये के संबंध में पेनल्टी की प्रक्रिया जारी रही। जुलाई 2019 में डिपार्टमेंट ने धारा 263 के तहत एक नोटिस जारी कर असेसमेंट में सुधार की मांग की। उनका तर्क था कि पेनल्टी की प्रक्रिया ठीक से शुरू नहीं की गई थी। हालांकि मई 2022 में ITAT ने इस सुधार को रद्द कर दिया। ITAT के अनुसार, जब पेनल्टी की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी तो आगे सुधार की कोई आवश्यकता नहीं थी।

हाई कोर्ट में मुख्य मुद्दा

जब मामला हाई कोर्ट में आया तो ध्यान मुख्य रूप से एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्रित हुआ। यह सवाल था कि क्या अंतिम पेनल्टी आदेश धारा 275 के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर पारित किया गया था या नहीं। एक अंतरिम चरण में कोर्ट की एक अन्य बेंच ने पाया कि आदेश समय सीमा से बाहर लग रहा था और इस आधार पर पेनल्टी की वसूली पर रोक लगा दी गई थी।

आगे का रास्ता

हालांकि हाई कोर्ट ने नोटिस की वैधता को मान्यता देते हुए विजय की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अन्य पहलुओं पर विचार नहीं कर रही है। विजय को अभी भी अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने अन्य आधारों पर चुनौती देने का अधिकार है। इस फैसले के बाद यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और पेनल्टी की समय सीमा जैसे कानून के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। वहीं न्यायिक प्रक्रिया में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखने वाली बात होगी। इस तरह यह मामला सिर्फ एक पर्सनल इनकम टैक्स विवाद नहीं है, बल्कि उच्च न्यायालय और अपीलेट ट्रिब्यूनल के बीच अधिकार और प्रक्रियाओं की सीमाओं को भी दर्शाता है।

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