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समंदर किनारे क्यों साफ होती है हवा, जानिए कैसे समुद्र नेचुरल एयर प्यूरीफायर की तरह करता है काम

 Written By: Pankaj Kumar Edited By: Bharti Singh
 Published : Feb 06, 2026 10:41 am IST,  Updated : Feb 06, 2026 10:42 am IST

Costal Areas Are Natural Air Purifier: समंदर किनारे रहने वालों को वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का खतरा काफी कम होता है। इसका कारण है समुद्र की लहरें, जो हवा को नेचुरली क्लीन रखने में मदद करती हैं।

समुद्र के किनारे की हवा क्यों साफ होती हैं- India TV Hindi
समुद्र के किनारे की हवा क्यों साफ होती हैं Image Source : FREEPIK

समंदर की लहरों में जो खूबसूरती, जो सुकून है वो दिलो-दिमाग को तरोताजा कर देती है। सागर किनारे बहती हवाओं में फेफड़ों की हिफाजत छिपी है। यकीनन जहां समंदर है, वहां हवा साफ है। जहां साफ हवा है, वहां सांस लेना आसान है और जहां सांस लेना आसान है, वहीं जिंदगी बेहतर है। जी हां कोस्टल एरियाज में रहने वाले लोगों के फेफड़े, बड़े महानगरों में रहने वाले लोगों से ज्यादा हेल्दी होते हैं। उनकी सांसों में कम जहर होता है और उनके लंग्स पर पॉल्यूशन का प्रेशर भी बहुत कम पड़ता है। लेकिन सवाल ये है ऐसा क्यों होता है?

कैसे समंदर किनारे साफ होती है हवा

इसके पीछे ठोस साइंस है। समुद्र की सतह ठंडी रहती है, जो अपनी तरफ आने वाली गंदी और गर्म हवा को साफ और ठंडा कर वापस भेजती है। समुद्री पानी एक नेचुरल फिल्टर की तरह काम करता है PM 2.5 जैसे खतरनाक कणों को सोख लेता है इसीलिए कोस्टल एरिया का AQI, इनलैंड शहरों से हमेशा बेहतर रहता है। यही 'sea breeze' फेफड़ों को हेल्दी रखती हैं। जिससे कोस्टल इलाकों में रहने वालों को लंग्स की बीमारियां कम होती हैं। महानगरों में हाई PM2.5 और NO2 की वजह से लंग्स कपैसिटी घट जाती है। लेकिन समुद्र किनारे की हवा में मौजूद नमक, आयोडीन और नेगेटिव आयन्स फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां वहां कम देखने को मिलती हैं।

नेचुरल एयर प्यूरीफायर का काम करता है समुद्र

महासागर दुनिया का सबसे बड़ा 'कार्बन सिंक' भी हैं। इंसानों द्वारा छोड़ी गई कुल कार्बन डाइऑक्साइड का करीब 30% हिस्सा अकेला समुंदर सोख लेता है। यानि OCEAN हमारी धरती का नेचुरल एयर प्यूरीफायर भी है। लेकिन अब इसी समुंदर का वजूद खतरे में है और वजह है माइक्रो-प्लास्टिक! एक नई रिसर्च ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। माइक्रो-प्लास्टिक, समुंदर की कार्बन सोखने की ताकत को धीरे-धीरे खत्म कर रहा हैं। जो समंदर साफ हवा देता था, आज वही इंसानी गलतियों से घुट रहा है। अगर आप भी ये सोचते हैं कि प्लास्टिक की एक बोतल, एक थैली, एक स्ट्रॉ फेंकने से क्या नुकसान होगा? तो ये जान लीजिए हर कोई आपकी तरह ही सोच रहा है और ये एक और एक मिलकर कचरे का बड़ा पहाड़ बना रहा है। जो अगर नहीं रुका, तो धरती से लेकर समंदर तक सबको तबाह कर देगा। ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि प्लास्टिक कम करें और समुंदर बचाएं। जिससे कि आने वाली हमारी पीढ़ियां साफ हवा में खुलकर जी सकें।

 

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