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एक वक्त में कर रहा था 2 नौकरियां, झारखंड परीक्षा घोटाले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी को लेकर एक और बड़ा खुलासा

 Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 04, 2026 11:20 pm IST,  Updated : Aug 04, 2026 11:36 pm IST

अभय तिवारी अलग-अलग नाम से एक ही वक्त में दो नौकरी कर रहा था। वो गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर था। यहां वो अभय तिवारी के नाम से नौकरी कर रहा था। उसकी दूसरी नौकरी TDPL कंपनी में थी।

अभय तिवारी- India TV Hindi
अभय तिवारी Image Source : REPORTER INPUT

झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुए घोटाले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस पूरे फर्जीवाड़े के केंद्र में खड़े मुख्य आरोपी अभय तिवारी के कारनामों ने जांच एजेंसियों और आम जनता को सकते में डाल दिया है। जांच में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि आरोपी अभय तिवारी एक ही समय में एक साथ दो अलग-अलग नौकरियां कर रहा था।

ऐसे चल रहा था 'डबल जॉब' का खेल

एक तरफ अभय तिवारी गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर अपनी असली पहचान यानी 'अभय तिवारी' के नाम से नौकरी कर रहा था। दूसरी तरफ, वही शख्स टीडीपीएल (TDPL) कंपनी में 'मनोज तिवारी' के नाम से मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी संभाल रहा था।

गौर करने वाली बात यह है कि एक ही व्यक्ति कागजों और प्रशासनिक व्यवस्था को चकमा देकर एक ही वक्त में दो अलग-अलग स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था और दोनों जगह से वेतन व लाभ ले रहा था।

खुद परीक्षा देता था और बन जाता था 'टॉपर'

अभय तिवारी सिर्फ दो नौकरियां करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह झारखंड के परीक्षा तंत्र का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका था। पिछले 13 वर्षों में झारखंड में जितनी भी सरकारी परीक्षाएं हुईं, अभय तिवारी हर परीक्षा में बैठा और लगभग सभी में उसने टॉप किया या पहली-दूसरी रैंक हासिल की।

उसने इंडियन नेवी (SSR) से लेकर भाभा एटॉमिक सेंटर (असिस्टेंट), नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड, सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल, जेएसएससी पुलिस सब-इस्पेक्टर, जेएसएससी पीजीटी, और जेपीएससी (ACF, FRO, FSO) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं एक ही प्रयास में क्रैक कर डालीं। सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने 13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।

वह इन परीक्षाओं में इसलिए बैठता था और टॉप करता था, ताकि वह कोचिंग सेंटरों और अभ्यर्थियों को अपना रिजल्ट दिखाकर यह साबित कर सके कि पूरा परीक्षा तंत्र और सिस्टम उसकी मुट्ठी में है। इसी धौंस के दम पर वह नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये का अवैध धंधा चला रहा था।

उसने JPSC का प्री एग्जाम क्लीयर कराने का रेट पांच लाख रुपये रखा गया था। मेन्स क्लीयर कराने का रेट 25 लाख रुपये था। अभय तिवारी 10 लाख रुपये एडवांस लेता था। एडवांस मिलने के बाद सलेक्शन की गारंटी दी जाती थी।

परिवार और रिश्तेदारों को भी कराया सेट

अभय तिवारी ने अपनी इस दक्षता का फायदा केवल खुद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने पूरे नेटवर्क का दायरा बढ़ाते हुए अपने भाई, भाभी और साली को भी कायदे से सरकारी नौकरियों में सेट करवा दिया। कोई भी पिछले दरवाजे से नहीं आया, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत से पूरे षड्यंत्र के तहत सबको एग्जाम पास करवा कर नियुक्ति पत्र दिलाए गए।

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