दिल्ली को एक बार फिर दंगों की आग में झोकने की कोशिश हुई। आधी रात को दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मस्जिद पर बुलडोजर चलने की अफवाह फैलाई गई, मुसलमानों से घर से निकल सड़क पर आने की अपील की गई। 23 मिनट के भीतर सैकड़ों पर भीड़ जुट गई। कुछ ही मिनट में पुलिस पर पत्थर चलने लगे। पांच पुलिस वाले जख्मी हुए। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज करके बड़ी मुश्किल से हालात को काबू में किया। इस मामले में पांच पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया गया है, बाकी की तलाश जारी है। पुलिस वीडियो फुटेज की मदद से दंगा करने वालों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस अफसरों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली नगर निगम की टीम मस्जिद के आसपास सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, सुरक्षा का बंदोबस्त था लेकिन कुछ लोगों ने मस्जिद पर बुलडोजर चलने की अफवाह फैला दी। सोशल मीडिया पर भडकाऊ वीडियो पोस्ट कर दिए। इसके बाद हालात बिगड़े।
सवाल ये है कि रात एक बजे सिर्फ 23 मिनट में क्या इतने लोग इक्कठे हो सकते हैं? अचानक पत्थर कैसे पहुंचे? रात बारह बजे समाजवादी पार्टी के MP मोहिबुल्लाह नदवी इस इलाके में क्या कर रहे थे? शाही इमाम बुखारी दो दिन पहले इस इलाके में क्यों गए थे? एक्शन से पहले MCD और पुलिस के अफसरों ने मस्जिद के जिम्मेदार लोगों से बात की थी। लोगों को बताया गया था कि मस्जिद के आसपास अतिक्रमण को हटाना है। अगर बताया गया था, सारी बात हो चुकी थी तो फिर भीड़ किसने इकट्ठी की। इतनी सर्दी में आधी रात के बाद अचानक दंगाइयों की भीड़ जुटना महज संयोग है या सोची समझी साजिश?
तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास सैकड़ों लोगों की भीड़ ने पुलिस और MCD की टीम पर हमला बोला। भीड़ में हर शख्स के हाथ में पत्थर थे, लाठियां थी, भीड़ ने बैरीकेड्स तोड़े। करीब आधे घंटे तक पूरे इलाके में पथराव हुआ। तुर्कमान गेट के पास फैज़-ए-इलाही मस्जिद का क्षेत्रफल 0.195 एकड़ है लेकिन मस्जिद के आसपास करीब 36 हजार वर्ग फीट सरकार जमीन पर कब्जा किया गया था। एक बैंक्वेट हॉल, एक डायग्नोस्टिक सेंटर बना, कई दुकानें बनी। इन्हें हटाने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। मस्जिद कमेटी भी कोर्ट गई थी लेकिन कोर्ट ने स्टे नहीं दिया। रात करीब 12 बजे MCD की टीम 17 बुलडोजर्स के साथ मौके पर पहुंची।
बुलडोजर एक्शन के बारे में इलाके के लोगों को साफ बताया गया था कि मस्जिद के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी, सिर्फ अतिक्रमण हटाया जाएगा। लेकिन जैसे ही बुलडोजर और डंपर मौके पर पहुंचे तो कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट की और ये अफवाह फैलाई कि बुलडोजर मस्जिद को तोड़ने के लिए पहुंचे हैं। मुसलमानों को तुरंत सड़क पर आकर इसका विरोध करने को कहा गया।
इस तरह का आरोप लगाने वालों ने फेसबुक लाइव के जरिए लोगों को भड़काया, व्हाट्सएप पर वीडियो सर्कुलेट किए जिनमें मुसलमानों से कहा गया कि वे तुर्कमान गेट पहुंचे और मस्जिद को टूटने से बचाएं। वीडियो फुटेज के आधार पर पांच आरोपियों, मुहम्मद आरिब, अदनान, कासिफ, समीर और कैफ को गिरफ्तार किया गया है। समीर और अदनान पर अफवाह फैलाने का आरोप है। इन दो लोगों ने भड़काऊ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए।
पत्थरबाजी से पहले रात बारह बजे समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी मौके पर पहुंचे थे। नदवी ने कहा कि लोगों ने उन्हें बुलाया था, इसलिए वो गए थे लेकिन कुछ देर के बाद लौट आए। उनके वापस लौटने के बाद क्या हुआ, कैसे हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं हैं। रात में एक्शन क्यों हुआ, ये सवाल MCD के अफसरों से पूछा गया। MCD का कहना है कि तुर्कमान गेट भीड़भाड़ वाला इलाका है। दिन में भीड़भाड़ होती है। अगर दिन में बुलडोजर चलता, बैरीकेड्स लगते तो लोगों को ज्यादा परेशानी होती। इसलिए मस्जिद कमेटी और आसपास के लोगों से बात करके रात में कार्रवाई करने का फैसला किया गया।
जो लोग ये कह रहे हैं कि आनन फानन में एक्शन की क्या जरूरत थी, उसका जबाव ये मिला कि ये प्रक्रिया तो चार महीने से चल रही थी। अक्टूबर में कोर्ट ने मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमणों की पैमाईश का आदेश दिया था। अक्टूबर में पैमाइश की गई। 12 नंबवर को हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। 22 दिसंबर को मस्जिद कमेटी को नोटिस दिया गया। 15 दिन में अतिक्रमण हटाने को कहा गया लेकिन कमेटी ने हाईकोर्ट में अपील की। वो अपील भी खारिज हो गई। उसके बाद मंगलवार रात को एक्शन लिया गया।
सवाल ये है कि जब पुलिस ने शांति कमेटी की बैठकें की थी, मस्जिद कमेटी और इलाके के लोगों को भरोसे में लिया था, उसके बाद भी सोशल मीडिया पर मस्जिद को तोड़ने की अफवाह किसने फैलाई? भीड़ किसके इशारे पर जुटाई गई? पत्थरबाज कौन थे? पत्थर कहां से आए? इन सवालों के जबाव पुलिस को खोजने होंगे। पथराव करने वालों और दंगा भड़काने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए।
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि इस मामले में दिल्ली वक्फ बोर्ड की मिलीभगत है। इसीलिए सरकार को बुलडोजर चलाने का मौका मिला। ओवैसी ने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि बीजेपी वक्फ एक्ट में बदलाव करके मुसलमानों की प्रॉपर्टी को छीनना चाहती है, दिल्ली में जो हुआ, वो उसका सबूत है।
जहां तक वक्फ की जमीन का सवाल है, तो रिकॉर्ड ये बताता है कि तुर्कमान गेट के पास 1940 में मस्जिद को 0।195 एकड़ यानि करीब 980 गज जमीन मस्जिद के लिए दी गई थी लेकिन उसके बाद मस्जिद के आसपास 36 हजार वर्गफुट जमीन पर कब्जा कर लिया गया। मस्जिद कमेटी इस जमीन के कोई दस्तावेज भी कोर्ट में पेश नहीं कर पाई। इसलिए ये कहना कि जल्दीबाजी में एक्शन हुआ, मुसलमानों को टारगेट करके बुलडोजर चल रहा है, ये माहौल को खराब करने वाली बातें हैं।
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में जो हुआ, वो अफवाह फैलाने के कारण हुआ। नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी लेकिन अफवाह फैलाई गई कि मस्जिद पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है। अतिक्रमण हटाने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था, लेकिन लोगों को ये कहकर भड़काया गया कि बीजेपी सरकार ने मस्जिद गिराने का आदेश दिया है।
जो मामला अतिक्रमण का था, सरकारी जमीन पर कब्जा करके जो दुकानें और बैंक्वेट हॉल बनाए गए थे, उन्हें हटाने का था, उसे मज़हबी रंग दिया गया। लोगों को उकसाने के लिए सोशल मीडिया ग्रुप्स पर वीडियो पोस्ट किए गए। मस्जिद के आसपास रहने वाले लोग मानते हैं कि उन्हें पहले से बता दिया गया था, फिर भी आधी रात को इतनी भीड़ पहुंच गई। वो कहते हैं ये बाहरी लोगों ने किया। रात के वीडियोज़ ये दिखाते हैं कि पुलिस ने बहुत संयम से काम लिया। फिर भी पुलिस पर हमला किया गया।
बाहर से लोगों को कौन लाया? लोगों को किस मकसद से भड़काया? इसका सच बाहर आना चाहिए। जिन चंद लोगों ने पूरी कौम को बदनाम किया, उनके चेहरे सामने आने चाहिए। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 07 जनवरी, 2026 का पूरा एपिसोड
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