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वित्त वर्ष 2026 में 7.5% की रफ्तार से बढ़ेगी भारत की GDP, एसबीआई की रिपोर्ट में मजबूत भरोसा

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : Jan 08, 2026 06:07 pm IST, Updated : Jan 08, 2026 06:11 pm IST

SBI ने कहा कि कर राजस्व अपेक्षित से कम रहने की संभावना है, लेकिन गैर-कर राजस्व अधिक रहने से कुल प्राप्तियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। आंकड़ों में 2022-23 के आधार संशोधन के बाद बदलाव हो सकते हैं।

FY26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.5 प्रतिशत रहने की संभावना है।- India TV Paisa
Photo:ANI FY26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.5 प्रतिशत रहने की संभावना है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में लगभग 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ बढ़ सकती है, जो नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (एनएसओ) के 7.4 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ी अधिक है। एनएसओ ने बुधवार को जारी प्रथम अग्रिम अनुमान में 2025-26 के लिए GDP वृद्धि 7.4 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत के मुकाबले अधिक बताई है। वहीं, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का अनुमान 7.3 प्रतिशत है।

वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.5 प्रतिशत का अनुमान

सकल मूल्य संवर्द्धन (GVA) की वृद्धि 7.3 प्रतिशत और नाममात्र जीडीपी विस्तार 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। SBI के अनुसार, इतिहास में RBI और NSO के अनुमानों के बीच केवल 20-30 बेसिस पॉइंट का अंतर रहता है, इसलिए 7.4 प्रतिशत का अनुमान अपेक्षित है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि FY26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.5 प्रतिशत रहने की संभावना है, जिसमें ऊपर की ओर झुकाव है। द्वितीय अग्रिम अनुमान, जो अधिक डेटा और संशोधनों को शामिल करेगा, 27 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा। इन आंकड़ों में 2022-23 के आधार संशोधन के बाद बदलाव हो सकते हैं।

कर राजस्व अपेक्षित से कम रहने की संभावना

राजकोषीय घाटा के बारे में रिपोर्ट में बताया गया कि नवंबर 2025 के अंत तक यह 9.8 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 62.3 प्रतिशत था। SBI ने कहा कि कर राजस्व अपेक्षित से कम रहने की संभावना है, लेकिन गैर-कर राजस्व अधिक रहने से कुल प्राप्तियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। कुल खर्च भी अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है, जिसके चलते राजकोषीय घाटा 15.85 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि बजट में यह 15.69 लाख करोड़ रुपये था।

नई GDP आंकड़ों के अनुसार, GDP के अनुपात में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है। अमेरिकी टैरिफ लागू रहने के दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर मजबूत संकेत मिले हैं। आने वाले समय में भी उत्साहजनक आंकड़े मिलने की उम्मीद जताई गई है। 

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