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भारत FY2026 में तरक्की की राह पर मजबूती से बढ़ेगा, वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में जताई उम्मीद, जानें पूरी बात

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Oct 27, 2025 03:48 pm IST,  Updated : Oct 27, 2025 03:48 pm IST

वित्त मंत्रालय को भरोसा है कि 'जीएसटी 2.0' सहित विभिन्न संरचनात्मक सुधार और सरकारी पहलें बाहरी चुनौतियों के नकारात्मक असर को कम करने में सहायक होंगी।

वित्त मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर गाड़ी से उतरतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। (फाइल)- India TV Hindi
वित्त मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर गाड़ी से उतरतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। (फाइल) Image Source : PTI

वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) का विकास परिदृश्य (ग्रोथ आउटलुक) अत्यंत मजबूत बना हुआ है। यह मजबूत गति मुख्य रूप से सशक्त घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति और संरचनात्मक सुधारों के सकारात्मक प्रभावों पर आधारित है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाए हुए हैं। पीटीआई की खबर के मुताबिक, रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक नीतिगत अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने FY26 की दूसरी तिमाही में उल्लेखनीय गति पकड़ी है।

खबर के मुताबिक, यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह उस समय आई है जब अमेरिका ने अगस्त में भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे। उच्च-आवृत्ति संकेतकों ने सप्लाई-साइड में लगातार सकारात्मक रुझान दिखाए हैं, जबकि त्योहारी सीज़न की बेहतर भावनाओं और जीएसटी सुधारों के चलते मांग की स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।

विकास दर के अनुमानों में बढ़ोतरी

भारत की मजबूत नींव और प्रदर्शन को देखते हुए, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और RBI ने भी अपने विकास अनुमानों को बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने अनुमान को 6.4% से बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपने अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि मजबूत सेवा निर्यात ने माल व्यापार घाटे की सफलतापूर्वक भरपाई की है, जिससे भारत का समग्र व्यापार प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा, सितंबर 2025 के माल व्यापार डेटा में निर्यात गंतव्यों के विविधीकरण के प्रारंभिक संकेत मिले हैं।

निवेश और नीतिगत समर्थन

रिपोर्ट में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के सकल प्रवाह में वृद्धि का हवाला दिया गया है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि भारत वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। जीएसटी दरों का युक्तिकरण जैसे हालिया नीतिगत कदम, मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और उपभोग मांग को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति का दृष्टिकोण

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अपनी हालिया बैठक में नीतिगत रेपो दर को 5.5% पर अपरिवर्तित रखते हुए 'न्यूट्रल' रुख बनाए रखा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एमपीसी ने FY2026 के लिए औसत हेडलाइन मुद्रास्फीति के अनुमान को 3.7% (जून 2025 में) और 3.1% (अगस्त 2025 में संशोधित) से घटाकर 2.6% कर दिया है, जो मूल्य स्थिरता की ओर इशारा करता है। कोर इंफ्लेशन (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) के भी FY2027 की पहली तिमाही तक निम्न स्तर पर बने रहने का अनुमान है।

कृषि और वित्तीय स्थिरता

कृषि क्षेत्र: खरीफ बुवाई सफलतापूर्वक पूरी हो गई है, जिसमें अनाज और दालों की बुवाई में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि कुछ फसलों को मौसम की चरम स्थितियों से नुकसान हुआ है, लेकिन कुल खाद्यान्न उत्पादन का दृष्टिकोण सकारात्मक है, जो ग्रामीण आय और बाजार स्थिरता को बल देगा। बैंक क्रेडिट की वृद्धि में मामूली कमी के बावजूद, वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए कुल वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़ा है, क्योंकि गैर-बैंक स्रोतों से फंडिंग में वृद्धि हो रही है, जो बैंक क्रेडिट की कमी को प्रभावी ढंग से संतुलित कर रही है।

संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान

मंत्रालय ने कहा कि कम जीएसटी दरें उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर कर बोझ कम करके मांग को बढ़ावा देंगी, जिससे आगे चलकर निवेश, उपभोग और रोजगार सृजन को मजबूती मिलेगी। उद्योग और सेवा क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन तथा स्थिर श्रम बाजार घरेलू मांग को और बढ़ावा देंगे।

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