जब भी पैसों और लोन की बात होती है, सबसे पहले दिमाग में बैंक का नाम आता है। लेकिन बैंक के अलावा एक और अहम वित्तीय संस्था है, जो लाखों लोगों को कर्ज की सुविधा देती है- इन्हें नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) कहा जाता है। हालांकि बैंक और NBFC दोनों ही वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं, लेकिन इनके बीच का अंतर लाइसेंसिंग, नियामक ढांचे और जमा स्वीकार करने की क्षमता में होता है। भारत में दोनों के बीच का फर्क समझना आपके लिए सही वित्तीय विकल्प चुनने में मददगार साबित हो सकता है।
NBFC क्या है?
herofincorp के मुताबिक, NBFC वे कंपनियां हैं जो कंपनी अधिनियम 1956 या 2013 के तहत पंजीकृत होती हैं और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अधिनियम 1934 के अध्याय III-B के तहत विनियमित होती हैं। इनके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता, बल्कि इन्हें विशेष वित्तीय गतिविधियां संचालित करने के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) दिया जाता है। NBFC मुख्य रूप से- विभिन्न प्रकार के लोन देना, फिक्स्ड डिपॉजिट की सुविधा प्रदान करना, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पादों का वितरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।
बैंक क्या हैं?
बैंक वे वित्तीय संस्थान हैं जो बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत नियंत्रित होते हैं। ये बचत और चालू खाते के रूप में डिमांड डिपॉजिट स्वीकार करते हैं और ऋण प्रदान करते हैं। NBFC और बैंक के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि बैंक भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा होते हैं। वे चेक जारी कर सकते हैं और सीधे क्लियरिंग सुविधा प्रदान करते हैं, जबकि NBFC यह सेवा नहीं दे सकतीं।
पर्सनल लोन के लिए NBFC क्यों चुनें?
तेज प्रोसेसिंग और डिस्बर्समेंट: जहां बैंक 3–7 दिन ले सकते हैं, वहीं कई NBFC 24–48 घंटे के भीतर लोन राशि आपके खाते में ट्रांसफर कर देती हैं।
लचीले क्रेडिट मानदंड: बैंक आमतौर पर 750+ CIBIL स्कोर को प्राथमिकता देते हैं। NBFC मध्यम स्कोर या नए उधारकर्ताओं को भी मौका देती हैं।
पूरी तरह डिजिटल और कम दस्तावेज: अधिकांश NBFC पेपरलेस प्रक्रिया अपनाती हैं। KYC और बैंक स्टेटमेंट ऑनलाइन अपलोड कर लोन प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड लोन: ट्रैवल, वेडिंग या ₹10,000 जैसे छोटे ब्रिज लोन जैसी विशेष जरूरतों के लिए NBFC खास प्रोडक्ट डिजाइन करती हैं।
अच्छे प्रोफाइल पर प्रतिस्पर्धी दरें: स्थिर आय और बेहतर रिपेमेंट रिकॉर्ड वाले ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दर मिल सकती है।
पर्सनल लोन के लिए बैंक क्यों चुनें?
कम ब्याज दर: बैंक कम लागत पर फंड जुटाते हैं, इसलिए वे NBFC की तुलना में 2%–5% तक सस्ती ब्याज दर दे सकते हैं।
पारदर्शी शुल्क: RBI के कड़े दिशा-निर्देशों के कारण बैंकों में छिपे चार्ज की संभावना कम रहती है।
अधिक लोन राशि: ₹20 लाख से ₹40 लाख तक के बड़े पर्सनल लोन के लिए बैंक अधिक उपयुक्त होते हैं।
मौजूदा संबंध का लाभ: यदि आपका सैलरी अकाउंट या FD बैंक में है, तो प्री-अप्रूव्ड लोन और विशेष ब्याज दर मिल सकती है।
शाखा नेटवर्क और ग्राहक सहायता: बैंकों की भौतिक शाखाएं होती हैं, जहां आप सीधे जाकर अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं।
NBFC vs Bank: पर्सनल लोन के लिए कौन बेहतर?
यह पूरी तरह आपकी जरूरत और प्राथमिकता पर निर्भर करता है। स्पीड और सुविधा चाहिए? NBFC बेहतर विकल्प हो सकती हैं। कम ब्याज दर प्राथमिकता है तो 750+ CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों के लिए बैंक आमतौर पर अधिक किफायती रहते हैं। नियामक सुरक्षा की बात करें तो, दोनों RBI द्वारा विनियमित हैं, लेकिन बैंकों में बचत खातों पर DICGC बीमा का अतिरिक्त लाभ मिलता है। कुल मिलाकर अगर आपको तुरंत, कम दस्तावेज में और लचीले मानदंडों के साथ लोन चाहिए, तो NBFC बेहतर विकल्प हो सकती हैं। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता कम ब्याज दर, बड़ी लोन राशि और दीर्घकालिक विश्वसनीयता है, तो बैंक ज्यादा उपयुक्त रहेंगे।






































