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दिल्ली हाईकोर्ट ने हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी को दी बड़ी राहत, एपस्टीन से जुड़े कंटेंट पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने हिमायनी पुरी को राहत देते हुए एपस्टीन से जुड़े कथित मानहानिकारक कंटेंट के प्रकाशन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने मेटा सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। प्रथमदृष्टया मामला मजबूत मानते हुए कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा दी और अगली सुनवाई तय की।

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Image Source : PTI FILE केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस मामले में कोर्ट ने मेटा और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों समेत सभी पक्षकारों को समन जारी कर दिया है। कोर्ट ने इनसे 4 हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ आदेश दिया कि हिमायनी पुरी के खिलाफ इस तरह का कोई भी कंटेंट अब किसी भी प्लेटफॉर्म पर पोस्ट नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि शिकायत में दिए गए विवरण से संबंधित कोई भी सामग्री अब प्रकाशित या प्रसारित नहीं की जाएगी।

'प्रथमदृष्टया इस मामले में हिमायनी का पक्ष मजबूत है'

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने कहा है कि प्रथमदृष्टया इस मामले में हिमायनी का पक्ष मजबूत है। अगर प्रतिवादियों को मुकदमे से जुड़ी सामग्री प्रकाशित करने से नहीं रोका गया तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी, इसलिए तुरंत निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) जारी की गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के IP अड्रेस से अपलोड किए गए वीडियो पर यह आदेश सीधे लागू होगा। वहीं, जो URL लिंक भारत के बाहर से अपलोड किए गए हैं, उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनियां भारत में ब्लॉक कर देंगी।

'पूरा मामला राजनीतिक द्वेष के तहत चलाया जा रहा'

हिमायनी पुरी ने कोर्ट से मांग की है कि इंटरनेट पर अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी सारी खबरें, पोस्ट और वीडियो हटा दिए जाएं। हिमायनी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कोर्ट में कहा कि हिमायनी पर निशाना इसलिए साधा जा रहा है क्योंकि वह एक कैबिनेट मंत्री की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष के तहत चलाया जा रहा है। वकील महेश जेठमलानी ने आगे कहा, 'यह सब किसी की कोरी कल्पना है। यह बिल्कुल गलत और बेबुनियाद आरोप है कि जिस फर्म में हिमायनी पार्टनर थी, उसे एपस्टीन से पैसे मिले थे।' मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।

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