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'इंग्लैंड बंटने की स्थिति में आ रहा, हम नहीं बंटेंगे, कभी बंट गए थे, वो भी मिला लेंगे ', मोहन भागवत का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि इंग्लैंड बंटने की स्थिति में आ रहा है, हम नहीं बटेंगे, हम आगे बढ़ेंगे और कभी बंट गए थे, वो भी फिर से मिला लेंगे।

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Image Source : PTI RSS प्रमुख मोहन भागवत।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान जारी किया है। मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के इंदौर में परिक्रमा पुस्तक के विमोचन के दौरान कहा है कि "इंग्लैंड बाटने की स्थिति में आ रहा है, हम नहीं बाटेंगे, हम बढ़ेंगे आगे, कभी बंट गए थे, वो भी फिर से मिला लेंगे।" मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में झगड़े होते हैं, भगवान एक है कि अनेक है? हमारे दार्शनिक कहते हैं एक अनेक के झगड़े में क्या पड़ते हो? भगवान है, दूसरा कुछ है ही नहीं, तब सब झगड़े व्यर्थ हो जाते हैं।

स्वार्थ और अहंकार दुनिया में संघर्ष की जड़- भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- "हम सब लोग जानते हैं कि जीवन श्रद्धा और विश्वास पर चलता है। जिनको जड़वादी कहा जाता है, वो लोग भी इन बातों को मानते हैं आज कल, पहले नहीं मानते थे, आजकल मानते हैं। दुनिया श्रद्धा विश्वास पर चलती है, आज दुनिया में संघर्ष इसलिए है क्योंकि सभी के मन में अहम है, जिसमें केवल यह सोच है कि मैं ही आगे बढूं, दूसरा कोई आगे ना बढ़े। इसलिए आपस में भिड़े हुए हैं, स्वार्थ और अहंकार दुनिया में संघर्ष और टकराव की जड़ है। आरएसएस प्रमुख ने संबोधन में कहा कि गला काटने का काम, जेब काटने का काम पहले दरजी करते थे, अब पूरी दुनिया कर रही है।:

3000 वर्ष तक दुनिया में कोई कलह नहीं हुआ- भागवत

मोहन भागवत ने कहा- "मनुष्य जो देखता है उसी को मानता है। जो नहीं दिखता है वह होता ही नहीं है, यह मनुष्य स्वभाव है, विज्ञान भी यही कहता है। मोहन भागवत ने पुस्तक विमोचन में अपने संबोधन में कहा कि भारत जब सिरमौर देश था, 3000 वर्ष तक दुनिया में कोई कलह नहीं हुआ, पर्यावरण कभी बिगड़ा नहीं, तकनीकी प्रगति  बड़ी ऊंची थी, परंतु पर्यावरण नहीं बिगड़ा। मनुष्य का जीवन सुखी था, मनुष्य का जीवन  सुसंस्कारीत था और प्रमाण है।"

हमने विश्व का नेतृत्व किया, देश को नहीं जीता- भागवत

आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि "हमने विश्व का नेतृत्व किया, किसी देश को जीता नहीं, किसी का व्यापार हमने दबाया नहीं, किसी को बदला नहीं, कन्वर्ट नहीं किया, जहां गए वहां हमने सभ्यता दी, हमने ज्ञान दिया, जीवन को उन्नत किया। प्रत्येक राष्ट्र की अपनी पहचान थी, सब थी, लेकिन आपस में सुसंवाद चलता था, वह आज नहीं है। मनुष्य के हाथ में इतना ज्ञान आ गया है, कि बहुत सी बातें वह प्रत्यक्ष करता है, जो हम पहले प्रत्यक्ष नहीं कर सकते थे। ऐसा होने के बाद भी ज्ञान विज्ञान बढ़ा लेकिन संघार भी बढा, तथाकथित विकास हुआ, लेकिन पर्यावरण भी बिगड़ा। मनुष्य उन्नत बना भौतिक दृष्टि से, लेकिन परिवार टूटने लगे, आपस में पटती नहीं, माता-पिता को लोग रास्ते पर छोड़ देते हैं, संस्कार नहीं है।

इंग्लैंड बंटने की स्थिति में- भागवत

इंदौर में मंत्री प्रह्लाद पटेल की किताब के विमोचन में मोहन भागवत ने कहा कि "सब की भविष्यवाणी झूठी ठहरा कर हमारा देश आगे बढ़ रहा है। चर्चिल ने कहा था तुम टीकोगे नहीं, स्वतंत्र हो जाओगे तो, बंट जाओगे। ऐसा नहीं हुआ। इंग्लैंड बंटने की स्थिति में आ रहा है। हम नहीं बंटेंगे, हम बढ़ेंगे आगे, कभी बंट गए थे, वो भी मिला लेंगे फिर से, क्योंकि आज जीवन विद्या हमारे पास है, जीवन विद्या हमारे पूर्वजों ने दी है।

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