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टैरिफ पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, दुनिया को दिया यह गहरा संदेश

 Reported By: Yogendra Tiwari, Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 12, 2025 01:24 pm IST,  Updated : Sep 12, 2025 01:24 pm IST

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को स्वार्थ की सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक समस्याओं का समाधान "हम-हमारा" की भावना से संभव है। भारत को आत्मज्ञान हो चुका है और उसका उद्देश्य केवल समृद्धि नहीं, बल्कि दुनिया को राहत देना है।

Mohan Bhagwat tariff statement, RSS chief on US tariffs- India TV Hindi
RSS प्रमुख मोहन भागवत। Image Source : PTI FILE

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को वैश्विक झगड़ों का प्रतीक बताते हुए एक गहरा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ये टैरिफ 'मैं-मेरा' की स्वार्थी सोच से उपजे हैं, जो व्यक्तिगत से लेकर राष्ट्रों के स्तर तक विवाद पैदा करती है। भागवत ने दुनिया को संदेश देते हुए जोर देकर कहा कि अगर हम सबको अपना मानें, तो कोई दुश्मन नहीं बचेगा और वैश्विक समस्याओं का समाधान 'हम-हमारा' की भावना से ही संभव है।

'मैं-मेरा के चक्कर में यह सब बातें होती हैं'

भागवत का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीद के बहाने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बीच आया है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बनाने का प्रयास माना जा रहा है। भागवत ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए टैरिफ मुद्दे को आधार बनाकर मानवीय एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'हमारे मन में अपनापन है तो सुरक्षा का प्रश्न नहीं है क्योंकि कोई भी हमारा बैरी नहीं है। दुनिया में लोगों को डर लगता है यह बड़ा होगा तो मेरा क्या होगा, भारत बड़ा होगा तो हमारा स्थान कहां रहेगा, इसलिए लागू करो टैरिफ। 7 समुद्र पार आप लोग हैं, हम यहां हैं, कोई संबंध तो आता नहीं लेकिन डर लगता है, मैं-मेरा के चक्कर में यह सब बातें होती हैं।'

'भारत ने अपने आप को पहचाना है'

संघ प्रमुख ने आगे कहा, 'राष्ट्र के नाते भी भारत अपने आप को जानता है, भारत कहता है हम एक बड़ा देश हैं, हमको बड़ा बनना है, भरपूर बनाना है, लेकिन किस लिए भरपूर बना है? हमारा काम क्या है? समय-समय पर यह जो मनुष्य के विचार में जो कमी होती है जोड़ने वाले तत्व की, आत्मा की, उसको पूरा करने के लिए हमको एक देश के नाते जीना है, बड़ा बनना है, इसलिए भरपूर बनना है। भरपूर बनकर क्या करना है? जो भरपूर है, उसको कम करके अपने को बड़ा करने में लगे रहते हैं, लूट-खसोट चलती है, आक्रमण करते है ,अपनी शक्ति के मद में दुर्बलों को दबाते हैं, भारत ने अपने आप को पहचाना है, हम इसके लिए नहीं है।'

'भारत को सारे विश्व को राहत देनी है'

भागवत ने आगे कहा, 'भारत को सारे विश्व को राहत देनी है, इसलिए भारत में आज भी अभाव में भी लोग सुखी रहते हैं। अभाव होना नहीं चाहिए, अभी है, बदलेगा तो बदलेगा, तो भी संतोष लोगों के पास है। सुविधा नहीं है, दुख है कष्ट है, लेकिन दुख कष्ट में भी एक कदम माल ढोने वाला अपनी गाड़ी को ढोते-ढोते उसे अवकाश मिलता है। जहां घने वृक्ष हैं उसकी छाया में अपने ठेला रखकर सो जाता है आराम से, करोड़ों कमाने वाले भी अन्य देशों में नींद की गोली लिए बिना नहीं सोते, संतोष धन हमारे पास है, क्योंकि यह अपनापन हमारे पास है। भारत पहले से भरपूर है, भारत सब कुछ है।'

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