नागपुर: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को नागपुर में अध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ़ लिविंग द्वारा आयोजित महा रूद्र पूजा में कहा कि हम विश्व को नया रास्ता दिखाएंगे। विश्व हमको गुरु कहेगा, लेकिन हम विश्व को मित्र कहेंगे। महाशक्ति वगैरा नहीं बनेंगे, जैसे आजकल महाशक्तियां हैं। हम क्या करेंगे दुनिया को प्रमाणिकता से संपूर्ण जगत की निरपेक्ष सेवा करेंगे।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि देव भक्ति और देशभक्ति थोड़ा अलग-अलग दिखता है। इसलिए दो शब्द प्रयोग में लाते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है हमारे देश में भारत में यह दो अलग नहीं है। एक ही बात है, जो वास्तविक भक्ति करेगा वह देश की भी भक्ति करेगा। जो प्रमाणिकता से देशभक्ति करेगा उसे भगवान देव भक्ति भी करवा लेंगे, यह तर्क नहीं है अनुभव है ऐसा होता है। सीधे-साधे सरल कठिन अनेक प्रकार के रास्ते हैं, मनुष्य के, लेकिन जाना सबको एक ही जगह है।
भागवत ने कही ये बातें
भागवत ने कहा कि जीवन अपनेपन के आधार पर चलता है। इस अपनेपन के संबंधों को आज दुनिया तरस रही है। 2000 वर्षों से जो दुनिया जिस प्रभाव में चली वह अधूरी बात पर आधारित है। उसको जोड़ने वाला मालूम नहीं जो सबके अंदर है। इसलिए हम अलग-अलग है। हमारा अलग-अलग स्वार्थ है। जो बलवान है। वह अपना स्वर्थ पूरा कर लेगा। जो दुर्लब है। वह मारेगी। यह दुनिया का नियम है। ऐसा मानकर वह चलते हैं।
हम देख रहे हैं। इतना विज्ञान बढा, मनुष्य का ज्ञान बढा, सब होने के बावजूद भी झगड़ा तो आज भी चल रहे हैं। मनुष्य में असंतोष आज भी बढ़कर आ रहे हैं। आपस में कट्टरपन बहुत बढा है। सुख सुविधा काफी हो गई, लेकिन संतोष नहीं है, विकास बहुत हो रहा। पर्यावरण खराब हो रहा है, यह सारा देखकर दुनिया अब लड़खड़ा रही है, रास्ता नहीं मिल रहा, रास्ता कहां है शिव जी के पास। विश्व का कल्याण चाहने वाले। ऋषियों ने कठिन तप करके दीक्षा ग्रहण किया। जिससे हमारे राष्ट्र की बल के ओज की उत्पत्ति हुई, हम बने ही इसलिए है।
राम मनोहर लोहिया का दिया उदाहरण
डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा है। भगवान राम उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले हैं। भगवान कृष्ण पूरब से पश्चिम को जोड़ने वाले हैं। भगवान शिव भारत के कण-कण में उत्प्रोत है। सब लोग शिवजी की पूजा करते हैं। शिवजी देवों के देव है महादेव है। सर्वप्रथम शिव रहते कहां है। श्मशान में या कैलाश पर्वत पर महलों में नहीं रहते उनको अपने लिए कुछ नहीं चाहिए, अपनी सारी शक्तियों का उपयोग भी वो सर्व कल्याण के लिए करते हैं और सबको अपना मानते हैं।अपने पास जो है वह शिव जी को देते रहते हैं, कुछ नहीं चाहिए दुनिया से ,सिर्फ एक चीज चाहिए। यदि आपको नष्ट करने वाला हलाहल है। वह शिवजी पियेंगे, उनका कंठ नीला हो जाएगा। वह अमृत आपके लिए छोड़ देंगे।
त्याग और सेवा के आदर्श शिवजी है लेकिन वह कर्तव्यों का त्याग नहीं करते। भारतवर्ष के पूर्वजों का संदेश यही है। ऐसे बानो, पूरे विश्व का कल्याण हमको करना है। विश्व कोई दूसरा नहीं है। हम ही है सर्वत्र, हम उपकार नहीं करेंगे हम विश्व को नया रास्ता दिखाएंगे। विश्व हमको गुरु कहेगा लेकिन हम विश्व को मित्र कहेंगे। महाशक्ति वगैरा नहीं बनेंगे। जैसी आज कल महाशक्तियां है। हम क्या करेंगे दुनिया में प्रमाणिकता से संपूर्ण जगत की। निरपेक्ष सेवा करेंगे।
भागवन ने ओबामा का भी किया जिक्र
मोहन भागवत ने कहा कि उन्होंने एक वीडियो ओबामा का देखा है। सही है कि गलत है उन्हें नहीं पता। आजकल ए आई का जमाना है। सुखी सुंदर दुनिया बने। इसके लिए भारत पहल करे ऐसी विश्व के चिंतकों की अपेक्षा है। वह प्रदर्शित होनी चाहिए। आज ही एक वीडियो मैंने देखा, कौन बात कर रहा है मिस्टर ओबामा बात कर रहे हैं। ओबामा बोल रहे हैं, वीडियो सही है कि गलत है मुझे नहीं पता, लेकिन उसका विचार क्या है। विचार तो है।
भारत बढ़ रहा है। भारत नंबर एक का देश बनने जा रहा है और इसलिए सब लोग चिंतित है। अमेरिका चिंतित है। रसिया चिंतित है। चीन चिंतित है, वह चिंता भय के कारण नहीं है। वह चिंता इसलिए है, उनको लगता है कि भारत सिरमौर होगा। उसके साथ हमको पटरी कैसे बनानी है, हमको यह सीखना है। इसकी चिंता व़ो है। भारत की जो जनता है। उसकी अपनी एक ताकत है। भारत की जनता गुणवान है। करतूतवान है। वह अपने देश को बड़ा बनाने में तुल रही है, परंतु इससे भी ज्यादा वह सब के प्रति अपनत्व का भाव रखते हैं। इसलिए देश सोचते हैं कि भारत सिर मोर बनेगा, और भारत जैसे- दुनिया की व्यवस्था बनाएगा वैसे उनका चलना है ,तो भारत के साथ एडजस्टमेंट करने के लिए उनको चिंता है।