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मोदी सरकार ने 114 नए राफेल जेट्स की डील को दी मंजूरी, 3.25 लाख करोड़ रुपये में फ्रांस से होगा समझौता

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Feb 12, 2026 01:50 pm IST,  Updated : Feb 12, 2026 11:57 pm IST

Rafale Deal France: नए राफेल जेट्स की खरीद को मोदी सरकार की तरफ से इजाजत मिल गई है। यह फैसला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में लिया गया। इस आर्टिकल में जानें राफेल का नाम सुनते ही भारत के दुश्मन क्यों कांपने लगते हैं।

फ्रांस से नए राफेल...- India TV Hindi
फ्रांस से नए राफेल खरीदने को मोदी सरकार की हरी झंडी मिल गई है। Image Source : PTI

New Rafale Deal: भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होने जा रहा है। और इसके लिए मोदी सरकार ने फ्रांस से नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। पूरी दुनिया ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फाइटर जेट राफेल का दम देखा था कि कैसे भारत ने पाकिस्तान पर एयर डॉमिनेंस बनाए रखा था। और पलक झपकते ही पाकिस्तान का नूर खान समेत तमाम एयरबेस पर अटैक किया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दी गई है।

114 नए राफेल खरीदेगा भारत

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने प्रमुख उच्च-मूल्य रक्षा खरीद के लिए Acceptance of Necessity दे दी है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सशस्त्र सेनाओं के अलग-अलग प्रस्तावों के लिए करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित कीमत की मंजूरी दी गई। फ्रांस से राफेल वाली डील के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील को मंजूरी मिली है। इसमें 2.5 लाख करोड़ रुपये, 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए और शेष राशि हथियारों, पुर्जों और सहायक पैकेजों के लिए है।

कैसे बढ़ेगी वायुसेना की मजबूती?

खरीदे जाने वाले ज्यादा MRFA राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा। कॉम्बैट मिसाइलें स्टैंड-ऑफ ग्राउंड अटैक क्षमता को गहरी मारक ताकत और अत्यधिक सटीकता के साथ मजबूत करने वाली हैं। वहीं, AS-HAPS का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग के लिए होगा।

थल सेना के लिए विभव, ARVs, T-72 टैंकों की खरीदारी

भारतीय थल सेना के लिए ‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस की खरीदारी और ARVs, T-72 टैंकों और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स यानी BMP-II के वाहन प्लेटफॉर्म के ओवरहाल को मंजूरी मिली। ‘विभव’ माइंस को दुश्मन की मैकेनाइज्ड फोर्सेज की प्रोग्रेस को धीमा करने के लिए Anti-Tank Obstacle System के तौर पर बिछाया जाएगा। वहीं ARVs, टी-72 टैंक और BMP-II के ओवरहाल से उपकरणों की सर्विस आयु बढ़ेगी।

इंडियन नेवी के लिए खरीदा जाएगा P8I विमान

भारतीय नौसेना के लिए 4 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन बेस्ड इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर और लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान P8I को मंजूरी मिल गई है। इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर की स्वदेशी खरीद से हमारी विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता घटेगी और नेवी की बिजली उत्पादन जरूरतों में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी। वहीं, P8I विमान की खरीदारी से नेवी की लंबी दूरी की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, समुद्री निगरानी और समुद्री स्ट्राइक क्षमता में बढ़ोतरी होगी।

कितना खतरनाक है राफेल जेट?

भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमानों को खरीदा था, जिसकी डिलीवरी दिसंबर, 2024 में पूरी हो गई थी। ये लड़ाकू विमान IAF के 2 स्क्वाड्रनों- अंबाला में 'गोल्डन एरोज' और हाशिमारा में 'फाल्कन्स' में हैं। राफेल में घातक हथियार प्रणाली होती है। यह Meteor मिसाइल से लैस है जो हवा से हवा में मार करने वाली विश्व की सबसे उन्नत मिसाइलों में से एक है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर से ज्यादा है।

राफेल की SCALP और हैमर से कांपते हैं दुश्मन

राफेल में SCALP मिसाइल भी है, जो हवा से जमीन पर मार करने वाली एक तरह की क्रूज मिसाइल है, जो 300-500 किलोमीटर दूर मौजूद शत्रु के बंकरों और ठिकानों को निशाना बना सकती है। हैमर मिसाइल से भी राफेल लैस है। यह एक कम दूरी की मिसाइल है जो मजबूत ढांचों को बर्बाद करने के लिए खास रूप से डिजाइन की गई है।

रफाल के रडार में क्या है खासियत?

राफेल फाइटर जेट में RBE2 AESA रडार है जो एक साथ 40  टारगेट्स को ट्रैक करने में सक्षम है। इसमें SPECTRA सिस्टम भी है, जो एक ताकतवर इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणाली है जो जेट को दुश्मन के रडार से बचाने और खतरों को जैम करने में सहायता करता है। इसमें हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले भी है। इसकी मदद से पायलट अपने हेलमेट से डेटा देख पाता है।

26 राफेल-मरीन जेट की पहले ही हो चुकी है डील

इससे पहले भारत ने अप्रैल, 2025 में 26 राफेल-मरीन जेट के लिए भी फ्रांस से सौदा किया था। ये डील 63 हजार करोड़ रुपये की थी। ये राफेल जेट विमानवाहक पोतों से उड़ने की क्षमता रखते हैं और इन्हें नेवी मिशन के लिए तैयार किया गया है। इस डील में ट्रेनिंग, हथियार, सिमुलेटर और दीर्घकालिक सहायता शामिल है। राफेल-एम को INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर तैनात किया जाएगा।

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