पेट भरा है, फिर भी मन भूखा है। हाथ रुकना चाहता है, लेकिन दिमाग बार-बार कहता है कुछ खा लो। सामने कोई खाता दिख जाए, तो दिल मचलने लगता है। स्क्रीन पर पिज्जा दिखा, तो मन ललचाने लगता है। सावधान हो जाइए ये भूख नहीं है, ये असली भूख से कहीं ज्यादा खतरनाक है। इसे 'फूड नॉइज' कहते हैं। यानि दिमाग के अंदर चौबीसों घंटे खाने का शोर मचता रहता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है कि पेट भरा होने के बाद भी, दिमाग का बार-बार खाने के बारे में सोचता है। तो ये Willpower की कमी नहीं, बल्कि दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम, हार्मोन्स और गलत लाइफस्टाइल का खेल है। ये सब मिलकर दिमाग में खाने की लगातार 'क्रेविंग लूप' बना देते हैं और यही वजह है कि आज करोड़ों लोग बिना भूख के भी खाते रहते हैं।
इस 'फूड नॉइज' का सबसे बड़ा इलाज है 'सही खाना, सही समय और सही आदतें'। जब थाली में पालक, मेथी, ब्रोकली, सलाद, फाइबर और प्रोटीन होगा, तो पेट लंबे वक्त तक भरा रहेगा और दिमाग में खाने का शोर अपने-आप कम हो जाएगा। क्योंकि अगर ये 'फूड नॉइज' कंट्रोल ना हो तो डायजेशन सबसे पहले बिगड़ता है। बार-बार खाने से गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग होती है। ओवरइटिंग से फिर वजन बढ़ने लगता है। उसमें भी जंक फूड की आदत से प्री डायबिटीज और फैटी लिवर की परेशानी शुरु हो जाती है और ये सिलसिला लंबे वक्त तक चला तो डिप्रेशन और एंग्जायटी मुफ्त में मिलती है। कहने का मतलब पेट भरा होने के बाद भी खाना सिर्फ वजन नहीं बढ़ाता बल्कि पूरा हेल्थ सिस्टम बिगाड़ देता है।
ऐसे में फूड नॉइज को शांत करने के आसान उपाय ये हैं कि समय पर खाना खाएं। थाली में ज्यादा फाइबर और प्रोटीन हो, प्रोसेस्ड फूड कम से कम लें, सौंफ-इलायची-अदरक भी इसमें काफी हेल्पफुल हैं, माइंडफुल ईटिंग करें और सबसे जरूरी-अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद की कमी से निगेटिव इमोशंस हावी होंगे और फिर क्रेविंग बढ़ेगी। हर बार जो खाने की आवाज सुनाई दे, वो असली भूख नहीं होती। 'फूड नॉइज' को कंट्रोल कीजिए ताकि दिमाग शांत रहे, पाचन सही रहे, और शरीर स्वस्थ बने। स्वामी रामदेव से जानते हैं ज्यादा खाने से कैसे बचें?
करीब 77% लोगों का खराब पाचन की वजह से तनाव रहता है। जिससे पाचन खराब होता है और गट माइक्रोबायोम का नाश होता है। इससे धीरे-धीरे इम्यूनिटी कमजोर होती है और डायबिटीज, हार्ट डिजीज, स्किन डिसऑर्डर और ऑटोइम्यून डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
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