Mahashivratri Char Prahar Puja 2026: महाशिवरात्रि का अर्थ है शिव की महान रात। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह रात्रि का पर्व है। यही कारण है कि इस दिन रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। लेकिन इस बारे में कम ही लोग जानते हैं। ज्यादातर लोग तो शिवरात्रि के दिन सिर्फ प्रदोषकाल में ही पूजा करते हैं। मान्यता है कि चार प्रहर में की गई पूजा से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं और साथ ही सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। चलिए आपको बताते हैं चार प्रहर की पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व।
रात्रि को चार भागों में विभाजित किया जाता है जिन्हें प्रहर कहा जाता है और महाशिवरात्रि की रात में हर प्रहर में भगवान शिव की विधि विधान पूजा की जाती है। इसे ही चार प्रहर पूजा कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार शिवरात्रि की रात में अलग-अलग प्रहर में पूजा करने से जीवन के सारे कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि की रात में भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार करते हैं। ऐसे में रात्रि के चारों प्रहर की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण हो जाती हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह पूजा आत्मशुद्धि और मन की एकाग्रता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
संपादक की पसंद