Vijaya Ekadashi 2026 Vrat Katha, Aarti Puja Vidhi Live: फाल्गुन महीना चल रहा है और इस महीने में विजया एकादशी और आमलकी एकादशी पड़ती है। अभी फाल्गुन महीने का कृष्ण पक्ष है तो इस दौरान विजया एकादशी मनाई जाएगी। पंचांग अनुसार विजया एकादशी की तिथि 12 फरवरी 2026 की दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 13 फरवरी की दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जा रहा है। यहां आप जानेंगे विजया एकादशी व्रत की कथा, पूजा विधि, मंत्र, आरती समेत संपूर्ण जानकारी।
विजया एकादशी की पौराणिक कथा अनुसार जब भगवान श्री राम माता सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए लंका की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनकी सेना के सामने समुद्र को पार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। समुद्र को बिना किसी साधन के पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। तभी वनार सेना के किसी सदस्य ने सुझाव दिया कि पास के वन में ऋषि वकदाल्भ्य का आश्रम है उनकी सलाह लेना अवश्य लाभकारी होगी। भगवान श्रीराम तुरंत ऋषि बकदाल्भ्य के पास पहुंचे और उन्हें अपनी समस्या बताई। तब ऋषि ने भगवान राम को विजया एकादशी व्रत के बारे में बताया और कहा कि अगर वे इस व्रत को विधि-विधान से करेंगे तो उन्हें अपने कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। ऋषि ने कहा कि इस एकादशी व्रत को करने से बड़े से बड़ा कार्य भी सिद्ध हो जाता है।
इसके बाद भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी और पूरी वानर सेना ने पूरी श्रद्धा से विजया एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की। साथ ही रात्रि में जागरण भी किया। व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीराम को दिव्य सहायता प्राप्त हुई। अगले ही दिन समुद्र देव प्रकट हुए और उन्होंने समुद्र पार करने का मार्ग बताया। इसके बाद नल और नील ने सेतु निर्माण का कार्य आरंभ किया और देखते ही देखते रामसेतु तैयार हो गया। इस प्रकार भगवान श्रीराम ने अपनी सेना सहित समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त की और माता सीता को मुक्त करा लिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करता है, उसे जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है।
विजया एकादशी का पारण समय 14 फरवरी की सुबह 07 बजे से 09:14 बजे तक रहेगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
विजया एकादशी के बाद आमलकी एकादशी मनाई जाएगी जो 27 फरवरी 2026 को है। इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
विजया एकादशी व्रत का पारण करने से पहले जरूरतमंदों को भोजन कराएं और वस्त्रों का दान करें। इसके बाद ही अपना व्रत खोलें।
विजया एकादशी पर भगवान विष्णु और एकादशी माता की पूजा होती है। इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है।
विजया एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि पर खोला जाता है। इस साल विजया एकादशी का पारण समय 14 फरवरी 2026 की सुबह 07 बजे से 09:14 बजे तक रहेगा।
जी हां, विजया एकादशी व्रत में चाय और कॉफी पी सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखना है कि चाय या कॉफी बनाते समय उसमें अन्न का हाथ न लगे।
विजया एकादशी हिन्दू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान पूजा और व्रत करने से हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। साथ ही जीवन में आ रही समस्त बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय मिलती है।
विजया एकादशी पर तामसिक चीजों जैसे मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज आदि का सेवन न करें। इस दिन सिर्फ फलाहारी भोजन ही करना चाहिए।
अगर आप अपने घर की सुख-शांति और समृद्धि कायम रखना चाहते हैं, तो आज विजया एकादशी के दिन आपको सुबह स्नान आदि के बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए और हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। आज विजया एकादशी के दिन ऐसा करने से आपके घर में सुख-शांति और समृद्धि कायम कायम रहेगी।
अगर बिजनेस में आपकी ठीक से कमाई नहीं हो पा रही है, तो आज विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के समय 5 सफेद कौड़ियां लेकर भगवान के सामने रखनी चाहिए और भगवान की पूजा के साथ ही कौड़ियों की भी पूजा करनी चाहिए। इस प्रकार पूजा के बाद उन कौड़ियों को एक पीले रंग के कपड़े में बांधकर अपने कैश बॉक्स में रख लें। आज विजया एकादशी के दिन ऐसा करने से बिजनेस में आपकी ठीक से कमाई होगी।
अगर आप किसी बात को लेकर उलझन में हैं, तो आज विजया एकादशी के दिन आपको एकादशी का व्रत करना चाहिए और धूप, दीप, चंदन आदि से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए, लेकिन अगर आप व्रत ना कर पाएं, तो कोई बात नहीं, परंतु सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनकर आपको भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। आज विजया एकादशी के दिन ऐसा करने से आपकी सारी उलझनें जल्द ही दूर हो जाएंगी।
अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु को एक गोला, यानि सूखा नारियल अर्पित करें। बाद में उस सूखे नारियल को वहां से उठाकर अपने पास रख लें और जब भी आपको समय मिल
एकादशी पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए मुख्य रूप से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय महामंत्र का जाप सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा हरे कृष्ण महामंत्र का जप भी अत्यंत फलदायी होता है।
Vijaya Ekadashi 2026: भगवान विष्णु मन्त्र
विष्णु मूल मन्त्र
ॐ नमोः नारायणाय॥
विष्णु भगवते वासुदेवाय मन्त्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
विष्णु गायत्री मन्त्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
विष्णु शान्ताकारम् मन्त्र
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णु मन्त्र
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
महा शिवरात्रि पर शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, केसर, शमी के फूल, शहद और भांग जरूर चढ़ाना चाहिए। कहते हैं इससे भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं।
पंचामृत - सफला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं। पंचामृत श्री हरि को अत्यंत ही पसंद है।
पीली बर्फी - एकादशी के दिन विष्णु जी को पीले रंग की मिठाई अर्पित करें। पूजा के समय नारायण को पीली बर्फी का भोग लगाएं। ऐसा करने से भगवान विष्णु भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
पंजीरी - एकादशी के दिन विष्णु जी पंजीरी का भोग लगाएं। पंजीरी धनिया और सूखे मेवों से बनाई जाती है। इसके अलावा पंजीरी आटा, घी, चीनी और सूखे मेवे को मिलाकर बनाया जाता है। नारायण को पंजीरी चढ़ाने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।
केला - एकादशी के दिन भगवान विष्णु को केला अर्पित करें। केला विष्णु जी को अति प्रिय है। केले का भोग लगाने से घर में खुशियों का आगमन होता है।
तुलसी - तुलसी विष्णु जी को अति प्रिय है। तुलसी के बिना श्री हरि की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरूर चढ़ाएं। साथ ही भगवान विष्णु के भोग में तुलसी जरूर चढ़ाएं।
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥२॥
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥३॥
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥४॥
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥५॥
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥६॥
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥७॥
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥८॥
Ekadashi Bhajan Lyrics: एकादशी भजन
हे विष्णु भगवान तुम्हारा ध्यान करें कल्याण,
जगत के तुम हो पालनहार करूँ मैं तुमको बारंबार,
हे विष्णु भगवान तुम्हारा ध्यान करें कल्याण,
जगत के तुम हो पालनहार करूँ मैं तुमको बारंबार,
नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते.....
तुम वेदों में उपदेश बने रामायण में संदेश बने,
रामायण में संदेश बने, रामायण में संदेश बने,
तुम तीन लोक के स्वामी हो अंतर क्या अंतर्यामी हो,
अंतर क्या अंतर्यामी हो, अंतर क्या अंतर्यामी हो,
विनती है तुमसे कि सबका करना तुम उद्धार,
तुम्हारे दशम् में दशम् अवतार करूँ मैं तुमको बारंबार,
नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते......
जो झुके तुम्हारे चरणन में, सुख भर ले अपने जीवन में,
सुख भर ले अपने जीवन में, सुख भर ले अपने जीवन में,
तुम पुण्य दान में रहते हो, तुम कथा ज्ञान में रहते हो,
तुम कथा ज्ञान में रहते हो, तुम कथा ज्ञान में रहते हो,
तुम से ही हर एक अर्चना होती है साकार,
तुम्हारा इस जग पे आभार करूं मैं तुमको बारंबार,
नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते.....
अमृत मंथन में रुप धरा, देवों में नव उत्साह भरा,
देवों में नव उत्साह भरा, देवों में नव उत्साह भरा,
तुम सृष्टि कार तुम पुण्य देव, तुम नारायण तुम सत्यमेव,
तुम नारायण तुम सत्यमेव, तुम नारायण तुम सत्यमेव,
सुख पावे वह प्राणी जो नित करता है सत्कार,
भगती की भक्ति का आधार करूं मैं तुमको बारंबार,
नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते.....
अगर आप अपने कारोबार में बढ़ोतरी करना चाहते है तो एकादशी के दिन स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें। अगर आपके पास पहनने के लिए पीला वस्त्र नहीं है तो एक पीला रूमाल अपनी जेब में रख लें। उसके बाद गुड़ और चने की दाल का भगवान को भोग लगाएं। बाद में प्रसाद के रूप में गुड़ और चना सब में बांट दें और स्वयं भी थोड़ा-सा प्रसाद ग्रहण करें।
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।
हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥
पद्मालये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।
सर्वभूत हितार्थाय,
वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
अगर आप अपने लवमेट के साथ रिश्ते में मजबूती बनाये रखना चाहते हैं, तो एकादशी के दिन आपको सूझी का हलवा बनाकर, संभव हो तो उसमें थोड़ी-सी केसर की पत्तियां डालकर श्री विष्णु भगवान को भोग लगाना चाहिए।
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे,
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर,
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय,
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ,
अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥
विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु को एक गोला, यानि सूखा नारियल अर्पित करें। बाद में उस सूखे नारियल को वहां से उठाकर अपने पास रख लें और जब भी आपको समय मिले उस गोले को घिसकर, उसमें शक्कर मिलाकर उसकी बर्फी बना लें। अब बनी हुई बर्फी में से दो बर्फी निकालकर गाय को खिला दें और बाकी अपने परिवार के सब सदस्यों में बांट दें, लेकिन अगर आप बर्फी नहीं बना सकते तो ऐसे ही घिसे हुए गोले में शक्कर और थोड़ा-सा घी मिलाकर गाय को खिला दें और परिवार के सब सदस्यों को भी वही प्रसाद के रूप में दे दें।
1. ॐ नमोः नारायणाय॥
2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
5. मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
विजया एकादशी व्रत का पारण 14 फरवरी सुबह 07:00 से 09:14 बजे तक किया जा सकेगा। पारण करने से पहले जरूरतमंदों को भोजन अवश्य कराएं।
जी हां मासिक धर्म में भी एकादशी का व्रत रखा जा सकता है। बस आपको पूजा नहीं करनी है। कहते हैं अगर एक बार एकादशी व्रत शुरू कर दिया जाए तो उसे बीच में छोड़ना नहीं चाहिए।
अगर आप एकादशी व्रत शुरू करने की सोच रहे हैं तो विजया एकादशी की जगह आमलकी एकादशी से ये व्रत शुरू करें। ये एकादशी इसी महीने की 27 तारीख को पड़ेगी। दरअसल किसी भी व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष से करना शुभ माना जाता है।
विजया एकादशी पर चावल भूलकर भी नहीं खाना चाहिए। इस दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। इसके अलावा किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
एकादशी पर चावल न खाने की कथा महर्षि मेधा से जुड़ी है जिन पर मां शक्ति क्रोधित हो गई थीं। मां शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्याग दिया और उनका अंश पृथ्वी में जा समाया। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया उस दिन एकादशी ही थी। ऐसा माना जाता है कि महर्षि मेधा धरती से चावल और जौ के रूप में उत्पन्न हुए। यही कारण है कि इस दिन चावल नहीं खाया जाता है क्योंकि एकादशी पर चावल खाना मांस-रक्त के सेवन के समान होता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल में पाप पुरुष का वास होता है। ऐसे में इस दिन चावल खाने से व्यक्ति पाप का भागीदार बनता है और उसका पुण्य क्षीण होता है।
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी…॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी…॥
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी…॥
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी…॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी…॥
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी…॥
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी…॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी…॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी…॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी…॥
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
जी हां, एकादशी व्रत में कॉफी का सेवन कर सकते हैं। बस कॉफी बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना है जिससे व्रत में किसी प्रकार का दोष न लगे।
विजया एकादशी व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। कहते हैं इस व्रत को करने से कार्यों में सफलता मिलती है।
जी हां, एकादशी व्रत में आप फलाहारी भोजन यानी व्रत वाले भोजन का सेवन कर सकते हैं। लेकिन अन्न का सेवन भूलकर भी नहीं करना है।
विजया एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। कहते हैं इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।
विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को यानी कल मनाई जाएगी तो वहीं इस व्रत का पारण 14 फरवरी की सुबह में किया जाएगा।
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