Abraham Lincoln Story: अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति थे जिन्होंने समाज को एक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी जीवन यात्रा में कई ऐसे किस्से हैं जो उनकी दृढ़ता और ज्ञान की भूख को दर्शाते हैं। लेकिन, एक ऐसी कहानी है जो विशेष रूप से रोचक है जब उन्होंने एक किताब पाने के लिए 3 दिनों तक एक किसान की तरह खेतों में कड़ी मेहनत की थी। यह घटना लिंकन के बचपन की है, जब वह इंडियाना के दूरदराज इलाकों में रहते थे, जहां किताबें दुर्लभ थीं और शिक्षा की पहुंच सीमित। इस कहानी से पता चलता है कि लिंकन किस हद तक पढ़ाई के प्रति समर्पित थे, और कैसे एक साधारण किताब ने उनके जीवन को प्रभावित किया। आइए इस किस्से के बारे में विस्तार से जानते हैं।
गरीब परिवार में हुआ था लिंकन का जन्म
अब्राहम लिंकन का जन्म 1809 में केंटकी में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता थॉमस लिंकन एक किसान थे, जो परिवार को पालने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। जब लिंकन महज 7 साल के थे, परिवार इंडियाना चला गया, जहां उन्होंने एक लॉग केबिन में रहना शुरू किया। उस समय शिक्षा की सुविधाएं बहुत कम थीं। लिंकन ने औपचारिक स्कूल में कुल मिलाकर एक साल से भी कम समय बिताया। उनकी मां नैन्सी और सौतेली मां सारा ने उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। लिंकन को किताबों से इतना लगाव था कि वो किसी भी स्रोत से ज्ञान पाने के लिए आतुर रहते थे। चाहे वह बाइबल हो या कोई अखबार। वो कहते थे कि किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं।
लिंकन ने पड़ोसी से मांगी किताब
यह घटना 1820 के आसपास की है, जब लिंकन लगभग 11-12 साल के थे। इंडियाना के उनके पड़ोसी जोसिया क्रॉफर्ड के पास एक दुर्लभ किताब थी "द लाइफ ऑफ जॉर्ज वॉशिंगटन" (जॉर्ज वॉशिंगटन की जीवनी), जो डेविड रामसे द्वारा लिखी गई थी। उस समय किताबें बहुत महंगी और दुर्लभ होती थीं, खासकर सीमांत इलाकों में। लिंकन को अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की कहानी जानने की बड़ी इच्छा थी। उन्होंने क्रॉफर्ड से किताब उधार मांगी। क्रॉफर्ड ने किताब दे दी, लेकिन लिंकन के पास इसे रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं थी। वो किताब को अपने लॉग केबिन की 2 लकड़ियों के बीच की दरार में रखते थे, ताकि सुबह उठते ही पढ़ सकें।
खराब हो गई किताब
एक रात तेज आंधी-तूफान आया। बारिश की बूंदें केबिन की छत से टपक कर किताब पर गिरीं। सुबह जब लिंकन उठे, तो किताब पूरी तरह गीली और खराब हो चुकी थी। पन्ने फूल गए थे, और किताब पढ़ने लायक नहीं रह गई थी। लिंकन बहुत दुखी हुए। वो जानते थे कि किताब की कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। ईमानदार लिंकन ने किताब को सुखाया और सीधे क्रॉफर्ड के पास जाकर सारी बात बताई। उन्होंने कहा, "मिस्टर क्रॉफर्ड, मैं किताब की क्षति के लिए माफी मांगता हूं। मेरे पास पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं आपके लिए काम करके इसकी भरपाई कर सकता हूं।"

लिंकन ने 3 दिन खेतों में की मजदूरी
क्रॉफर्ड ने किताब की कीमत 75 सेंट बताई। उस समय एक दिन की मजदूरी लगभग 25 सेंट होती थी। इसलिए उन्होंने लिंकन से कहा कि वो किताब अपने पास रख लें, लेकिन इसके बदले 3 दिनों तक उनके खेतों में काम करें। लिंकन खुशी-खुशी राजी हो गए। अगले 3 दिनों तक उन्होंने क्रॉफर्ड के मकई के खेतों में काम किया। मकई तोड़ना, खरपतवार निकालना और अन्य कृषि कार्य। यह काम आसान नहीं था, लिंकन को सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन, किताब पाने की खुशी में उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। 3 दिनों की मेहनत के बाद किताब उनकी हो गई। उन्होंने इसे बार-बार पढ़ा और वॉशिंगटन की कहानी से इतने प्रभावित हुए कि यह उनके जीवन का हिस्सा बन गई।
क्या कहते थे लिंकन?
यह किस्सा सिर्फ एक किताब की कहानी नहीं है, बल्कि लिंकन की आत्म-शिक्षा की भावना को दर्शाती है। वॉशिंगटन की जीवनी ने लिंकन को सिखाया कि कैसे एक साधारण व्यक्ति कड़ी मेहनत और ईमानदारी से महान बन सकता है। वॉशिंगटन ने अमेरिका की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और लिंकन ने बाद में गुलामी के खिलाफ। लिंकन कहते थे कि इस किताब ने उन्हें नेतृत्व और देशभक्ति का पाठ पढ़ाया। उनकी जीवनीकारों के अनुसार, इस घटना ने लिंकन की दृढ़ता को मजबूत किया। वो हमेशा कहते थे कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई कीमत बड़ी नहीं होती। लिंकन की आगे की जीवन यात्रा भी इसी भावना से भरी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति बने लिंकन
इंडियाना से इलिनॉय जाकर वकील बने राजनीति में आए और फिर 1860 में राष्ट्रपति बने। गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने एमांसिपेशन प्रोक्लेमेशन जारी किया, जिसने लाखों गुलामों को आजादी दी। उनकी सफलता की जड़ें उनके बचपन जुड़ी हैं। जैसे कि खेतों में काम करके किताब प्राप्त करना। यह दर्शाता है कि लिंकन के लिए शिक्षा एक विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत थी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, चाहे किताबें उधार लेनी पड़ी हों, मीलों पैदल चलना पड़ा हो। लिंकन का यह किस्सा रोचक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है।
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