kaal Sarp Dosh: हिंदू धर्म में काल सर्प दोष को बहुत प्रभावशाली और संवेदनशील दोष माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी की कुंडली में सभी सात बड़े ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, बृहस्पति, शनि और मंगल) छाया ग्रहों जैसे राहु और केतु के बीच आते हैं तो काल सर्प दोष का योग बनता है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है उन्हें जीवन में बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जिसकी कुंडली में काल सर्प दोष होता है उन्हें बीमारियों का खतरा काफी रहता है। तो आइए जानते हैं कि कालसर्प दोष के लक्षण, समय और उपाय के बारे में।
कुंडली में काल सर्प दोष रहता है तो इसका पता कैसे चलता है?
सांपो का सपने में देखना
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सांपों का सपना आना: अगर किसी भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है उसे सपने में सांप आते हैं। सपने में सांप का शरीर पर चढ़ते हुए देखना काल सर्प दोष का संकेत होता है।
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उड़ते हुए सांप का देखना: किसी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है तो उसे सपने में उड़ते हुए सांप नजर आते हैं।
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सांपों का जोड़ा देखना: अगर आपको सपने में सांपों का जोड़ा दिखता है तो यह काल सर्प दोष का संकेत होता है। सांपों का जोड़ा एक साथ हाथ या पैर में लिपटा हुआ दिखाई दे या डसता हुआ दिखाई दे तो यह भी काल सर्प दोष का प्रतीक है
अन्य संकेत
- जिन भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है उनके जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं। उन्हें धन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं। इसके साथ ही परिवार में झगड़े-क्लेश होते रहते हैं।
- जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष होता है उन्हें मेहनत के बाद भी मन मुताबिक फलों की प्राप्ति नहीं होती है।
- कुंडली में काल सर्प दोष रहने पर व्यक्ति को घबराहट, एंग्जायटी उदासी और हमेशा अज्ञात भय बने रहता है।
- संतान प्राप्ति में बाधा आना या विवाह होने में बेवजह की देरी होना भी काल सर्प दोष के लक्षण है।
काल सर्प दोष कितने समय तक रहता है?
माना जाता है कि काल सर्प दोष व्यक्ति को 42 वर्ष तक परेशान करता है। यह अवधि जातक की कुंडली में राहु की स्थिति पर निर्भर करती है। हालांकि सही उपायों से इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
काल सर्प दोष के दुष्प्रभावो को कम करने के उपाय
- भगवान शिव की पूजा करें। प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें।
- सोमवार के दिन महादेव की नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें।
- प्रतिदिन 1100 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। मंत्र है- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- राहु और केतु के बीज मंत्रों का सवा-सवा लाख बार जाप करें। राहु का बीज मंत्र है- 'ॐ रां राहवे नमः', केतु का बीज मंत्र है- 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः'।
- किसी भी नागपंचमी या सोमवार के दिन चांदी के छोटे से नाग-नागिन के जोड़े का पूजन कर उन्हें बहते जल या नदी में प्रवाहित कर दें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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