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हड़ताल में शामिल हुए तो कट जाएगी सैलरी, राज्य सरकार का आदेश जारी, सिर्फ 4 वजहों पर मिलेगी छुट्टी

 Reported By: T Raghavan Edited By: Shakti Singh
 Published : Feb 12, 2026 08:40 am IST,  Updated : Feb 12, 2026 09:06 am IST

सरकार ने साफ कर दिया है कि हड़ताल वाले दिन सिर्फ चार कारणों से छुट्टी दी जाएगी। इसके अलावा किसी अन्य कारण से छुट्टी लेने पर सैलरी कटेगी। हालांकि, ये नियम सिर्फ उसी दिन लागू होंगे, जब कोई हड़ताल होगी।

Protest- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PTI

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस और संयुक्त किसान मोर्चा जैसे संगठनों ने पूरे देश में बंद का ऐलान किया है। व्यापार संघों ने चार श्रम संहिताओं, बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025 और पशु एवं पशु एवं पशु कृषि अधिनियम 2025 को वापस लेने की मांग के समर्थन में यह हड़ताल बुलाई है। ऐसे में केरल सरकार ने कहा है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी ऐसी किसी हड़ताल में शामिल होता है तो उसकी सैलरी कट जाएगी।

केरल सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारी कर्मचारी देशव्यापी बंद में हिस्सा लेते हैं तो उनकी सैलरी कट जाएगी। अलग-अलग ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल के बाद, केरल की एलडीएफ सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों के लिए नो वर्क नो पे का ऐलान किया है। सरकार ने बुधवार देर रात एक ऑर्डर जारी किया, जिसमें कहा गया कि बिना इजाजत के गैरहाजिरी में सैलरी रोकी जाएगी।

हड़ताल वाले दिन कड़ी शर्तों पर मिलेगी छुट्टी

12 फरवरी को कुछ राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों और टीचरों की हड़ताल के बीच, सरकारी सर्कुलर में कहा गया है कि कर्मचारियों को छुट्टी सिर्फ कड़ी शर्तों पर ही दी जाएगी। ऑर्डर के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों और टीचरों को हड़ताल वाले दिन किसी भी तरह की छुट्टी नहीं दी जाएगी।

सिर्फ चार वजहों से मिलेगी छुट्टी

  • व्यक्ति या किसी करीबी रिश्तेदार की बीमारी (करीबी रिश्तेदार में सरकारी कर्मचारी के पति/पत्नी, बच्चे, पिता और माता शामिल हैं)
  • कर्मचारी की परीक्षा के लिए
  • कर्मचारी की मैटरनिटी के लिए
  • इसी तरह के दूसरे जरूरी कारण

इन मांगों के लिए हो रही हड़ताल

अखिल भारतीय आम हड़ताल अलग-अलग मांगों को लेकर हो रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने किसानों से श्रमिक संगठन कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ने का आह्वान किया। एसकेएम ने एक बयान में कहा कि हड़ताल में चार श्रम संहिताओं, बिजली विधेयक-2025, बीज विधेयक-2025 और वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 की वापसी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, योजना श्रमिकों सहित श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी का कार्यान्वयन और अन्य मांगें शामिल हैं। बयान में कहा गया कि कृषि श्रमिक संघों और एनआरईजीए संघर्ष मोर्चा (एनएसएम) का मंच भी देश भर में होने वाले विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करेगा और उनमें भाग लेगा। बयान में कहा गया, ''एसकेएम जनता से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किसानों, श्रमिकों और आम लोगों पर किए जा रहे सभी नए हमलों का विरोध करने का आह्वान करता है।'' एसकेएम ने कहा, '' एसकेएम सभी किसानों से सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाने के अलावा मुक्त व्यापार समझौतों की प्रतियां जलाने की अपील करता है। यह औद्योगिक श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाने और सरकार की सभी जनविरोधी, कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ एक प्रदर्शन है।''

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