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'भारत आज की महाशक्तियों जैसा नहीं बनेगा...', मोहन भागवत ने क्यों कही ऐसी बात?

 Published : Sep 11, 2025 06:26 am IST,  Updated : Sep 11, 2025 10:04 am IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत आज की महाशक्तियों जैसा नहीं बनेगा बल्कि सेवा और वैश्विक कल्याण के भाव के साथ आगे बढ़ेगा। आइए जानते हैं कि मोहन भागवत ने ऐसी बात क्यों कही है?

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग महा रुद्र पूजा में मोहन भागवत और श्री श्री रविशंकर। Image Source : PTI

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को महाराष्ट्र के नागपुर में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'सोमनाथ ज्योतिर्लिंग महा रुद्र पूजा' में भाग लिया और यहां आए लोगों को संबोधित किया। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में एक बड़ी बात कही कि भारत आज की महाशक्तियों जैसा नहीं बनेगा बल्कि यह सेवा और वैश्विक कल्याण के भाव के साथ आगे बढ़ेगा।

भारत का चरित्र सेवाभाव में निहित- भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का जो चरित्र है वह सेवाभाव में निहित है। ये भावना आज की महाशक्तियों की तरह बनने की जगह तटस्थ भाव से दुनिया की सेवा करने में मार्गदर्शक सिद्धांत साबित होगी। मोहन भागवत ने इस बात पर खेद जताया है कि दुनिया में विज्ञान व ज्ञान के क्षेत्रों में प्रगति और मनुष्यों के पास सब कुछ होने के बावजूद, दुनिया में अब भी झगड़े जारी हैं। 

भारत दुनिया को नया रास्ता दिखाएगा- भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत दुनिया को एक नया रास्ता दिखाएगा। दुनिया भारत को गुरु कहेगी और भारत उन्हें मित्र कहेगा। उन्होंने कहा, "हमें पूरे विश्व का कल्याण करना है, क्योंकि विश्व अलग नहीं है। हम स्वयं विश्व का हिस्सा हैं। हम किसी पर कोई उपकार नहीं करेंगे। हम विश्व को एक नया मार्ग दिखाएंगे, विश्व हमें 'गुरु' कहेगा, लेकिन हम विश्व को अपना 'मित्र' कहेंगे। हम आज की महाशक्तियों की तरह महाशक्ति नहीं बनेंगे। हम विश्व में क्या करेंगे? हम व्यवस्थित रूप से, तटस्थता से, पूरे विश्व की सेवा करेंगे।"

देव भक्ति और देशभक्ति अलग नहीं- भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- "देव भक्ति और देशभक्ति थोड़ा अलग-अलग दिखता है, इसलिए दो शब्द प्रयोग में लाते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है हमारे देश में भारत में यह दो अलग नहीं है ,एक ही बात है। जो वास्तविक भक्ति करेगा वह देश की भी भक्ति करेगा। जो प्रमाणिकता से देशभक्ति करेगा उसे भगवान देव भक्ति भी करवा लेंगे। यह तर्क नहीं है, अनुभव है, ऐसा होता है।" 

लोग सब कुछ पाने के बाद भी असंतुष्ट- भागवत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विज्ञान और मानव ज्ञान में काफी विकास हुआ है इसके बावजूद भी झगड़े अब भी जारी हैं और लोग सब कुछ पाने के बाद भी असंतुष्ट है। यह सब देखकर दुनिया लड़खड़ा रही है और उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।  (इनपुट: भाषा)

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