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Budh Pradosh Vrat 2025: आज है साल का आखिरी प्रदोष व्रत, इस मुहूर्त में करें भगवान शिव की पूजा, हर कष्ट से मिल जाएगी मुक्ति

Pradosh Vrat December 2025: साल का आखिरी प्रदोष व्रत 17 दिसंबर को है। ये बुध प्रदोष व्रत होगा। जानिए इस दिन प्रदोष काल मुहूर्त क्या रहेगा।

Written By : Acharya Indu Prakash Edited By : Laveena Sharma Published : Dec 16, 2025 09:02 am IST, Updated : Dec 17, 2025 06:51 am IST
pradosh vrat- India TV Hindi
Image Source : PIXABAY दिसंबर में प्रदोष व्रत कब है 2025

Pradosh Vrat December 2025: 17 दिसंबर 2025 को साल का आखिरी प्रदोष व्रत किया जायेगा। ये व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानि संध्या के समय में की जाती है। 17 को बुधवार का दिन है और बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को बुध प्रदोष (Budh Pradosh Vrat) कहते हैं। पुराणों में बताया गया है कि त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है- उसकी समस्त समस्याओं का हल हो जाता है। चलिए आपको बताते हैं बुध प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2025 (Pradosh Vrat Shubh Muhurat 17 December 2025)

  • प्रदोष पूजा मुहूर्त - 05:27 पी एम से 08:11 पी एम
  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - 16 दिसंबर 2025 को 11:57 पी एम बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त - 18 दिसंबर 2025 को 02:32 ए एम बजे

बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि (Budh Pradosh Vrat Puja Vidhi)

  1. इस दिन व्रती को नित्यकर्मों से निवृत होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और पूरे दिन उपवास करना चाहिए।
  2. पूरे दिन उपवास के बाद शाम के प्रथम प्रहर में फिर से स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए और ईशान कोण में प्रदोष व्रत की पूजा के लिये स्थान का चुनाव करना चाहिए।
  3. पूजा स्थल को गंगाजल या साफ जल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर मंडप तैयार करना चाहिए।
  4. इस मंडप में पांच रंगों से कमल के फूल की आकृति बनानी चाहिए। अगर ये संभव न हो तो बाजार में कागज पर अलग-अलग रंगों से बनी कमल के फूल की आकृति भी ले सकते हैं।
  5. साथ में भगवान शिव की एक मूर्ति या तस्वीर भी रखिए।
  6. इस तरह मंडप तैयार करने के बाद पूजा की सारी सामग्री अपने पास रखकर कुश के आसन पर बैठकर, उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके शिव जी की पूजा करें।
  7. पूजा के एक-एक उपचार के बाद- “ऊं नमः शिवाय” का जप करें। जैसे-जैसे पुष्प अर्पित करें और “ऊं नमः शिवाय” कहें, फल अर्पित करें और “ऊँ नमः शिवाय” जपें। 
  8. इसके बाद बुध प्रदोष व्रत की कथा सुनें।
  9. अंत में शिव जी की आरती करके भोग लगाएं।
  10. फिर सभी में प्रसाद वितरित कर दें।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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