पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर में 14.2 किलो गैस ही मिलती रहेगी। बताते चलें कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर में 10 किलो गैस देने पर विचार कर रही है। सुजाता शर्मा ने कहा, "ये पूरी तरह से अटकलबाजी है और किसी भी अटकल पर कोई टिप्पणी या स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता। अफवाहों पर ध्यान न दें।"
Related Stories
मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा था कि देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने और देश में एलपीजी भंडार तेजी से घटने के बीच ये कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियां 14.2 किलो के सिलेंडर में सिर्फ 10 किलो गैस भरकर सप्लाई करने की प्लानिंग में जुटी थीं। ताकि, सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।
सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाने का दावा
रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कंपनियों के आकलन के मुताबिक जहां 14.2 किलो का सिलेंडर एक औसत परिवार में 35-40 दिन चलता है, वहीं 10 किलो गैस भी करीब एक महीने तक जरूरत पूरी कर सकती है। इससे उपलब्ध गैस को ज्यादा घरों में बांटा जा सकेगा। अगर इस योजना पर अमल किया जाता है, तो सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाए जाएंगे, जिनमें कम मात्रा की स्पष्ट जानकारी होगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को कीमत में भी आनुपातिक राहत दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी बदलाव और नियामकीय मंजूरियां लेना जरूरी होगा। हालांकि, सरकार ने आज खुद आकर इन सभी रिपोर्ट्स को अफवाह बताया है।
एलपीजी की 90% सप्लाई खाड़ी देशों से
बता दें, भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है, जिसमें से ईरान युद्ध से पहले लगभग 90% सप्लाई खाड़ी देशों से आती थी। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य शिपिंग के लिए बंद रहता है, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। फिलहाल, भारत के छह एलपीजी टैंकर पर्शियन गल्फ में फंसे हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने का इंतजार कर रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है।