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क्या 14.2 किलो वाले सिलेंडर में 10 किलो गैस ही मिलेगी? पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा- अफवाहों पर ध्यान न दें

 Published : Mar 23, 2026 08:05 am IST,  Updated : Mar 23, 2026 07:05 pm IST

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को आशंका है कि अचानक इस तरह की कटौती से उपभोक्ताओं में भ्रम फैल सकता है और विरोध या राजनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है। बावजूद इसके, अधिकारियों का मानना है कि अगले कुछ हफ्तों में सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे ऐसे फैसले लेना मजबूरी बन सकता है।

एलपीजी की उपलब्धता दबाव में है। खाड़ी देशों से नई खेप नहीं पहुंच रही है।- India TV Hindi
एलपीजी की उपलब्धता दबाव में है। खाड़ी देशों से नई खेप नहीं पहुंच रही है। Image Source : PIXABAY

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर में 14.2 किलो गैस ही मिलती रहेगी। बताते चलें कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर में 10 किलो गैस देने पर विचार कर रही है। सुजाता शर्मा ने कहा, "ये पूरी तरह से अटकलबाजी है और किसी भी अटकल पर कोई टिप्पणी या स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता। अफवाहों पर ध्यान न दें।" 

मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया जा रहा था कि देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने और देश में एलपीजी भंडार तेजी से घटने के बीच ये कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियां 14.2 किलो के सिलेंडर में सिर्फ 10 किलो गैस भरकर सप्लाई करने की प्लानिंग में जुटी थीं। ताकि, सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके। 

सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाने का दावा

रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कंपनियों के आकलन के मुताबिक जहां 14.2 किलो का सिलेंडर एक औसत परिवार में 35-40 दिन चलता है, वहीं 10 किलो गैस भी करीब एक महीने तक जरूरत पूरी कर सकती है। इससे उपलब्ध गैस को ज्यादा घरों में बांटा जा सकेगा। अगर इस योजना पर अमल किया जाता है, तो सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाए जाएंगे, जिनमें कम मात्रा की स्पष्ट जानकारी होगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को कीमत में भी आनुपातिक राहत दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी बदलाव और नियामकीय मंजूरियां लेना जरूरी होगा। हालांकि, सरकार ने आज खुद आकर इन सभी रिपोर्ट्स को अफवाह बताया है।

एलपीजी की 90% सप्लाई खाड़ी देशों से

बता दें, भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है, जिसमें से ईरान युद्ध से पहले लगभग 90% सप्लाई खाड़ी देशों से आती थी। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य शिपिंग के लिए बंद रहता है, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। फिलहाल, भारत के छह एलपीजी टैंकर पर्शियन गल्फ में फंसे हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने का इंतजार कर रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है।

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