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क्या है गुरु चांडाल योग? जानिए गुरु और राहु के घातक योग के 3 सबसे बुरे प्रभाव और उपाय

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 16, 2026 10:07 pm IST,  Updated : Jul 16, 2026 10:59 pm IST

गुरु और राहु की युति को ज्योतिष में गुरु चांडाल योग कहा जाता है। इसे अशुभ योगों में गिना जाता है। जरूरी नहीं कि हर कुंडली में इसका प्रभाव एक जैसा हो। जानिए किन उपायों के माध्यम से इसका असर कम किया जा सकता है।

चांडाल योग के 3 सबसे बुरे प्रभाव- India TV Hindi
चांडाल योग के 3 सबसे बुरे प्रभाव Image Source : PINTEREST

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के कुछ योग शुभ तो कुछ अशुभ परिणाम देने वाले माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है गुरु चांडाल योग। यह घातक योग तब बनता है जब कुंडली में गुरु और राहु एक साथ स्थित हों। यह योग व्यक्ति के जीवन के कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं गुरु चांडाल योग क्या है, इसके प्रमुख दुष्प्रभाव और इससे जुड़े पारंपरिक उपाय।

क्या होता है गुरु चांडाल योग?

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में देव गुरु बृहस्पति और राहु एक ही भाव में मौजूद होते हैं, तब गुरु चांडाल योग बनता है। मान्यता है कि अगर यह अशुभ योग लग्न, पंचम या नवम भाव में बने, तो इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। हालांकि इसका असर व्यक्ति की पूरी कुंडली और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

ये 3 दुष्प्रभाव माने जाते हैं प्रमुख

  1. निर्णय और व्यवहार पर असर: इस योग के कारण व्यक्ति गलत संगति में पड़ सकता है या सही-गलत का निर्णय लेने में कठिनाई महसूस कर सकता है। कई बार इससे सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ता है।
  2. स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां: गुरु चांडाल योग का प्रभाव पाचन तंत्र, लिवर और पेट से जुड़ी समस्याओं से भी जोड़ा जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को ऐसी परेशानियां हों, क्योंकि स्वास्थ्य कई अन्य कारणों पर भी निर्भर करता है।
  3. पारिवारिक जीवन में चुनौतियां: मान्यता है कि यह योग रिश्तों में मतभेद, वैवाहिक जीवन में तनाव या पारिवारिक असंतुलन का कारण बन सकता है। विशेष रूप से महिलाओं की कुंडली में बनने पर इसके प्रभाव को विवाह संबंधी मामलों से जोड़कर देखा जाता है।

कब कम हो सकता है प्रभाव?

अगर कुंडली में बृहस्पति उच्च राशि में हो, वक्री या अस्त स्थिति में हो, या गुरु-राहु के साथ कोई अन्य शुभ ग्रह मौजूद हो, तो गुरु चांडाल योग का दुष्प्रभाव कम हो सकता है। वहीं, अगर बृहस्पति केंद्र का स्वामी होकर त्रिकोण में राहु के साथ स्थित हो, तब भी इसके प्रभाव में कमी आने की बात कही गई है।

गुरु चांडाल योग के पारंपरिक उपाय

  • बड़ों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें।
  • नियमित रूप से मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें।
  • भगवान शिव की पूजा करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का नियमित जाप करें।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करना भी शुभ माना जाता है।
  • मां दुर्गा की उपासना करें और दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय का पाठ करें।
  • पीपल का पौधा लगाएं और उसकी नियमित सेवा करें।
  • पीले वस्त्र, फल या अन्य पीली वस्तुओं का दान करें।
  • जरूरतमंद छात्रों को किताबें या पढ़ाई से जुड़ी सामग्री दान करें।
  • मांसाहार और नशीले पदार्थों के सेवन से बचें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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