वैश्विक पर्यटन में सिविक सेंस और पब्लिक एटिकेट पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। वियतनाम के एक प्रमुख एयरपोर्ट पर जापानी और कोरियाई पर्यटकों को फर्श पर बैठे देख दक्षिण कोरिया में रहने वाले एक भारतीय यात्री का रिएक्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उसने बताया कि उसने दक्षिण कोरिया जाने वाली अपनी फ्लाइट में चढ़ने से पहले यह वीडियो बनाया था और दावा किया कि कोरियाई, जापानी और वियतनामी यात्री, कई भारतीयों की तरह ही बैठे हुए थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग खाना भी खा रहे थे।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को @subtle_crazykorea नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें एक व्यक्ति ने वियतनाम के हवाई अड्डे का एक दृश्य रिकॉर्ड किया है, जिसमें कई यात्री ज़मीन पर बैठे नजर आ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यही दृश्य भारतीयों के साथ होता, तो ऑनलाइन तुरंत बहस छिड़ जाती। उन्होंने कहा, 'मैंने कई वीडियो देखे हैं जिनमें भारतीय ज़मीन पर बैठे हैं और इस पर विवाद हो रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे वीडियो ने भारतीयों के सिविक सेंस पर बहस छेड़ दी है, और अधिकांश भारतीय ऐसे व्यवहार की निंदा कर रहे हैं। फिर उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि यह हवाई अड्डा है, अगर किसी को बैठने की जगह नहीं मिल रही है तो वे जमीन पर बैठ रहे हैं और अगर कोई भूखा है तो उसे खाना मिल रहा है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन पर बैठने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति में सिविक सेंस की कमी है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, 'एक कोरियाई अंकल हैं। वे जमीन पर बैठकर अपना काम कर रहे हैं। कसम से, अगर उनकी जगह कोई भारतीय होता तो हंगामा मच जाता।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो वायरल हो गया है और सोशल मीडिया यूजर्स से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। कुछ लोग इस बात से सहमत हैं कि दुनिया भर में लोग हवाई अड्डों के फर्श पर बैठते हैं, जबकि अन्य असहमत हैं और उनका कहना है कि यह तुलना बड़े मुद्दे को नजरअंदाज करती है।
एक यूजर ने लिखा, 'कुछ तो लोग कहेंगे, मेरी हांगकांग यात्रा के दौरान हर कोई रात में हवाई अड्डे पर बैठा था और आराम कर रहा था क्योंकि फ्लाइट का शेड्यूल सुबह का था आप पूरी रात फर्श पर बैठे नहीं रह सकते, इससे मानक कम नहीं होता है यह पसंद का मामला है वो करें तो क्या बात है, डाउन टू अर्थ हैं और हम करें तो सिविक सेंस नहीं, अब क्या कहें, अपनी अपनी सोच है।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'बहुत अच्छा कहा...असल में भारतीय ही अपने खुद के दुश्मन हैं।'
तीसरे ने लिखा कि, 'क्या आप इस आधार पर भारतीयों की नागरिक भावना का बचाव कर रहे हैं?'
किसी और ने कहा, 'भाई कूड़ा फेंकना तो नहीं कर रहे, बैठकर पराठा खाना वगैरह तो नहीं खोल रहे कि साथ के लोगों को परेशानी हो। भारतीयों पर इसलिए हमला नहीं होता कि वे कुछ अलग करते हैं, बल्कि इसलिए होता है क्योंकि वे यह नहीं सोचते कि उनके कार्यों से दूसरों पर असर पड़ रहा है, यही तो सजगता है - दूसरों का ख्याल रखना।'
एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'यह बैठने या खाने के तरीके के बारे में नहीं है, यह शोर मचाने और जगह को गंदा करने के बारे में है। यही सजगता है। लोग वहां कम से कम शोर करते हुए बैठे हैं। क्या आप वीडियो बनाते समय शोर सुन सकते हैं? यही नागरिक सजगता है।'
एक ने लिखा कि, 'जहां तक मुझे पता है, सिविक सेंस का मतलब फर्श पर बैठना नहीं है; हमें सार्वजनिक स्थानों पर फर्श पर खाना खाने, जहां नाचना नहीं चाहिए वहां नाचने, पूल के नियमों का पालन न करने, तेज संगीत बजाने, सार्वजनिक स्थानों पर बोलने, कचरा फेंकने, शराब पीने और हंगामा करने के लिए निशाना बनाया जाता है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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