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पाकिस्तान ने चीन से लॉन्च किया अपना नया सैटेलाइट, क्या भारत को लेनी चाहिए टेंशन?

 Published : Feb 12, 2026 05:40 pm IST,  Updated : Feb 12, 2026 05:40 pm IST

पाकिस्तान ने चीन से EO-2 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च किया है जो विकास योजना, पर्यावरण निगरानी, आपदा प्रबंधन और संसाधन मैपिंग में मदद करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक यह उपग्रह मुख्य रूप से नागरिक उपयोग के लिए है और इससे भारत को किसी तरह का सुरक्षा खतरा नहीं है।

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पाकिस्तान ने चीन से अपना एक नया सैटेलाइट लॉन्च किया है। Image Source : CGTN

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने गुरुवार को चीन के यांगजियांग सीशोर लॉन्च सेंटर से अपना दूसरा स्वदेशी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EO-2 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। देश की स्पेस एजेंसी SUPARCO द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सैटेलाइट मुल्क को कई तरीकों से फायदा पहुंचाएगा। बताया जा रहा है कि SUPARCO द्वारा विकसित यह सैटेलाइट देश की अर्थ ऑब्जर्वेशन और हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग क्षमताओं को काफी बढ़ाएगा। SUPARCO के अधिकारियों के अनुसार, EO-2 महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराएगा जो राष्ट्रीय विकास योजना, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और शहरी विस्तार में मदद करेगा।

क्या काम करेगा पाकिस्तान का ये नया सैटेलाइट?

SUPARCO ने कहा कि इसके अलावा, यह सैटेलाइट बेहतर शासन, आपदा प्रबंधन, जलवायु विश्लेषण और रणनीतिक निर्णय लेने में सहायक होगा, क्योंकि यह सटीक और समय पर सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करेगा। EO-2 के शामिल होने से पाकिस्तान का सैटेलाइट बेड़ा बढ़ गया है, जिससे अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा की निरंतरता, कवरेज और सटीकता में सुधार होगा। बता दें कि पाकिस्तान ने पिछले साल ही अपना पहला स्वदेशी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO-1) सैटेलाइट चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया था।

क्या भारत को EO-2 से चिंतित होने की जरूरत है?

एक्सपर्ट्स ने कहा है कि भारत को इस सैटेलाइट से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। EO-2 मुख्य रूप से नागरिक उपयोगों जैसे विकास योजना, पर्यावरण मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन और संसाधन मैपिंग के लिए है। यह हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग देता है, लेकिन पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम अभी सीमित है और SUPARCO की क्षमताएं भारत की ISRO से काफी पीछे हैं। भारत के पास पहले से ही Cartosat सीरीज समेत कई उन्नत EO सैटेलाइट्स हैं, जो उच्च रिजॉल्यूशन यानी कि 25-50 सेमी तक और निरंतर कवरेज देते हैं। इस तरह देखा जाए तो पाकिस्तान का यह उपग्रह भारत की सुरक्षा के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है।

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