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राजपाल यादव का बिका घर, नहीं मिला किसी का साथ, सच्चे दोस्त ने बताया कैसे अर्श से फर्श तक पहुंचे एक्टर

 Reported By: Dinesh Mourya Written By: Shyamoo Pathak
 Published : Feb 12, 2026 04:32 pm IST,  Updated : Feb 12, 2026 04:32 pm IST

गांव से मुंबई की गलियों में अपने नाम का डंका बजाने वाले राजपाल यादव एक बार फिर अर्श से फर्श पर आ गए हैं। राजपाल ने 21 साल पुराने दोस्त सुनील पाल ने इसका खुलासा किया है कि कैसे राजपाल कर्ज के दलदल में फंसे हैं।

Rajpal Yadav And Sunil Paul- India TV Hindi
राजपाल यादव और सुनील पॉल Image Source : IMAGE SOURCE-2000S KI FILMEIN

राजपाल नौरंग यादव बॉलीवुड फिल्मों की दुनिया का ऐसा नाम है जिसके बिना कॉमेडी की 200 से ज्यादा फिल्में फीकी हैं। हर किरदार में अपनी कलाकारी का रंग भरने वाले राजपाल इन दिनों जेल में हैं और तिहाड़ में ही सोमवार तक रहेंगे। करोड़ों रुपयों का कर्ज न चुका पाने के मामले में राजपाल को जेल की हवा खानी पड़ रही है। लेकिन 214 फिल्मों में काम करने वाले इस कलाकार को ऐसी क्या जरूरत पड़ी कि एक फैसले ने उनकी दुनिया उजाड़ दी? उनके पक्के दोस्त और 21 साल से एक ही इंडस्ट्री में काम कर रहे एक्टर कॉमेडियन सुनील पॉल ने इसके पीछे की कहानी बताई है। साथ ही बताया कि कैसे एक फिल्म बनाने के फैसले ने उनकी जिंदगी की दिशा पलट दी और कर्ज के दलदल में ऐसा धकेला कि आज जेल तक की नौबत आ पड़ी है। इसी दलदल से निकलने के लिए राजपाल यादव को अपना घर तक बेचकर किराए के मकान में रहना पड़ा था। आइये जानते हैं राजपाल यादव के साथ 10 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके उनके 21 साल पुराने दोस्त सुनील पॉल क्या बताते हैं?

क्या बोले सुनील पॉल?

सुनील पॉल ने बताया कि इस पूरे मामले की जड़े एक फिल्म से जुड़ी हैं जिसका नाम है 'अता पता लापता'। ये फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई थी लेकिन इसे खुद राजपाल यादव ने ही बनाया था। फिल्म के डायरेक्टर भी राजपाल थे और उन्होंने खुद ही अपनी पत्नी के साथ मिलकर इसे प्रोड्यूस किया था। सुनील पॉल बताते हैं, 'इस फिल्म के बनने में बजट तय आंकड़ों से बहुत ऊपर चला गया था। करीब 24 करोड़ रुपयों से ज्यादा का खर्चा आया था। उस दौर में राजपाल यादव की भी मार्केट वेल्यू इतनी नहीं थी। साथ ही उन्हें डिस्ट्रीब्यूटर्स ने भी धोखा दिया और कम स्क्रीन्स पर ही फिल्म रिलीज हो पाई। इससे फिल्म को मोटा नुकसान हुआ।'

घर बिका और इंडस्ट्री ने भी छोड़ा साथ

सुनील पॉल ने बताया कि ये वो दौर था जब राजपाल की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। सुनील पॉल बताते हैं, 'जब राजपाल को तगड़ा घाटा लगा और फिल्म फ्लॉप हो गई तो इंडस्ट्री ने भी मुंह मोड़ लिया। लोगों के बीच ये संदेश गया कि अब राजपाल डायरेक्टर बन गए हैं और फिल्मों में काम नहीं करेंगे। इसके बाद लोगों ने उन्हें काम देना बंद कर दिया। हालात यहां तक आ गए थे कि उन्हें अपना घर बेचकर किराए के मकान में शिफ्ट होना पड़ा। इतना ही नहीं काम के अभाव में उन्हें 1-2 लाख रुपयों में गेस्ट बनकर कार्यक्रमों में तक जाना पड़ा था। बॉलीवुड में उनका मार्केट रेट 1 लाख रुपये तक आ गया था। हालांकि ऐसे में दौर में भी अनीस बजमी, प्रियदर्शन और डेविड धवन हमेशा राजपाल यादव के साथ रहे।'

दिलचस्प है फिल्म की कहानी?

दरअसल राजपाल यादव ने जिस दूसरी पार्टी से पैसे लेकर ये फिल्म बनाई  थी और खुद इसके प्रोड्यूसर रहे थे उसी ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसी मामले को लेकर राजपाल यादव को जेल हुई है। हालांकि अभी भी बॉलीवुड समेत तमाम लोगों ने उन्हें सपोर्ट करने की बात कही है। हालांकि अब उनकी जमानत पर अगली सुनवाई सोमवार तक टल गई है। लेकिन खास बात ये है कि जिस फिल्म ने इस पूरे हेरफेर को जन्म दिया है उसकी कहानी भी हेरा-फेरी जैसी ही है। फिल्म की कहानी माधव चतुर्वेदी नाम के एक इंसान की है जो पुलिस में अपने घर में लूट होने की शिकायत दर्ज कराता है। ये सब बीमा का पैसा लेने के लिए षड़यंत्र रचने के लिए किया जाता है और लूट भी खुद ही कर ली जाती है। लेकिन पुलिस मामले की छानबीन में पड़ती है और मामला उलझ जाता है। अब इस फिल्म की कहानी ही इस पूरे विवाद की तरह दिखने लगी है। 

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