iPhone 18 Pro के बारे में नई डिटेल सामने आई है। एप्पल की यह अपकमिंग आईफोन सीरीज C2 मॉडम और सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ आएगी।
पाकिस्तान ने चीन से EO-2 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च किया है जो विकास योजना, पर्यावरण निगरानी, आपदा प्रबंधन और संसाधन मैपिंग में मदद करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक यह उपग्रह मुख्य रूप से नागरिक उपयोग के लिए है और इससे भारत को किसी तरह का सुरक्षा खतरा नहीं है।
ईरान में जारी तनाव के बीच दो परमाणु ठिकानों पर हलचल देखने को मिली है। दोनों परमाणु ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आई हैं।
जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजन एलन मस्क की स्टारलिंक के साथ कॉम्पीटीशन में उतरकर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को रोचक बना देगी।
ISRO द्वारा सोमवार को लॉन्च किए गए मिशन में तकनीकी गड़बड़ी की बात सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, लॉन्चिंग के बाद थर्ड फेज के आखिरी में आई तकनीकी खामी के बाद यान तय रास्ते से भटक गया।
नए साल में भारत के ISRO ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई। इसरो ने PSLV C-62 मिशन के तहत भारत के सैटेलाइट EOS-N1 को अंतरिक्ष में लॉन्च किया है। ये लॉन्चिंग सुबह करीब 10 बजकर 17 मिनट पर श्री हरिकोटा से की गई। हालांकि, इस मिशन में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई।
ISRO नए साल 2026 के लिए अपना पहला लॉन्च सोमवार को करने जा रहा है। इस लॉन्च में गुजरात के अहमदाबाद के छात्रों द्वारा बनाया गया SanskarSat-1 सैटेलाइट भी शामिल होगा। आइए जानते हैं इस सैटेलाइट के बारे में विस्तार से।
जम्मू-कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास सर्च ऑपरेशन किया जा रहा है। कनाचक में सैटेलाइट फोन कम्युनिकेशन ट्रेस हुआ है। सैटेलाइट फोन के जरिए आतंकियों की संदिग्ध बातचीत ट्रेस हुई है।
ISRO ने साल 2026 के लिए अपने पहले लॉन्च की घोषणा कर दी है। इसरो ने बताया है कि वह आगामी 12 जनवरी की तारीख को अंतरिक्ष के लिए सैटेलाइट लॉन्च करेगा।
चांद से अक्सर छोटे-छोटे एस्टेरॉयड टकराते रहते हैं। हालांकि, इससे बड़ा खतरा नहीं होता है, लेकिन 60 मीटर का एस्टेरॉयड चांद से टकराया तो सैटेलाइट और स्पेस स्टेशन को थोड़ी समस्या हो सकती है।
इसरो ने इस कम्यूनिकेशन सैटेलाइट को निर्धारित लॉन्चिंग टाइम से करीब डेढ़ मिनट की देरी से लॉन्च किया। अगर 90 सेकेंड की देरी नहीं होती तो इस मिशन में बड़ी बाधा आ सकती थी।
इसरो के मुताबिक 6100 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट एलवीएम-3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी के लो-ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी पेलोड होगा।
इसरो ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह कम्यूनिकेशन सैटेलाइट एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी सैटेलाइट है।
पृथ्वी के कोर के पास देखे गए इस रहस्यमयी बदलावों ने वैज्ञानिकों के भी होश उड़ा दिए हैं। उपग्रह से ली गई तस्वीरों में पृथ्वी के कोर में इस हैरान कर देने वाले परिवर्तन की जानकारी मिली।
ISRO की रॉकेट लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा और बालासोर से इसलिए होती है क्योंकि ये स्थान भूमध्य रेखा के पास, समुद्र किनारे और पूर्व दिशा में हैं, जिससे लॉन्चिंग सुरक्षित और प्रभावी होती है। श्रीहरिकोटा बड़े मिशनों, जबकि बालासोर छोटे रॉकेट्स की लॉन्चिंग के लिए सही है।
ISRO चीफ ने इस रॉकेट की तुलना भारत के पहले रॉकेट से की, जिसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने बनाया था। उन्होंने कहा, वह रॉकेट 17 टन का था, जो 35 किलो भार को अंतरिक्ष में ले जा सकता था। आज हम 75 टन भार ले जाने वाला रॉकेट बना रहे हैं, जिसकी ऊंचाई 40 मंजिला इमारत जितनी होगी।
ISRO जल्द ही एक और सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है, जो सैटेलाइट कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी से लैस होगा। इसरो के चीफ वी. नारायणन ने इसकी जानकारी दी है। इसमें अमेरिकी ब्लूबर्ड सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जिसके जरिए सैटेसलाइट कनेक्टिविटी की जा सकती है।
सैटेलाइट तस्वीरों में तबाही का मंजर साफ दिख रहा है। युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब तक 600 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सेना के चिनूक और MI-17 हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन किया जा रहा है।
NASA और ISRO के सहयोग से बना निसार सैटेलाइट आज लॉन्च होगा। यह दुनिया का पहला डबल रडार वाला पृथ्वी अवलोकन मिशन है, जो भूकंप, बाढ़, फसल और जलवायु परिवर्तन की निगरानी कर वैश्विक आपदा प्रबंधन में क्रांति ला सकता है।
Starlink, Amazon जैसी विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर देने के लिए देसी कंपनी ने भारत में सैटेलाइड ब्रॉडबैंड सर्विस लॉन्च करने की तैयारी की है। कंपनी को IN-SPACe से अप्रूवल मिल गया है।
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