Saturday, February 14, 2026
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Explainer: पाकिस्तान और चीन के चंगुल में फंस ढाका बनेगा 'ढाक के तीन पात'...या भारत से संबंध सुधार तारिक बदलेंगे बांग्लादेश के हालात

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Feb 14, 2026 01:32 pm IST, Updated : Feb 14, 2026 01:32 pm IST

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 20 साल बाद सत्ता में दमदार वापसी की है। हालांकि यह वापसी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग की विकल्पहीनता में हुई है। अब देखना होगा कि बीएनपी के मुखिया और बांग्लादेश के नये पीएम बनने जा रहे तारिक रहमान भारत-पाक और चीन से कैसे रिश्ते रखते हैं।

तारिक रहमान, बीएनपी चेयरमैन।- India TV Hindi
Image Source : AP तारिक रहमान, बीएनपी चेयरमैन।

Explainer: बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की बंपर जीत हुई है। बीएनपी ने 299 में करीब 212 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है। बीएनपी ने करीब 20 साल बाद बांग्लादेश की सत्ता में वापसी की है। बीएनपी के चेयरमैन और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अब बांग्लादेश के नये प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। मगर अगस्त 2024 में छात्रों के आंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपदस्थ किए जाने के बाद से ही बांग्लादेश में कट्टर इस्लामवादी सोच और पाकिस्तान से प्रेम में इजाफा हुआ है।

इसके साथ ही हिंदुओं की हत्याएं, उन पर अत्याजार, आगजनी उनके धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते इतिहास में सबसे अधिक तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। मगर भारत को पूरी तरह नजरअंदाज करना बांग्लादेश के लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में सवाल ये है कि क्या तारिक रहमान अब भी पाकिस्तान और चीन के चंगुल में फंसकर बांग्लादेश को कट्टरवादी सोच की तरफ आगे ले जाएंगे या फिर शांति और स्थिरता के लिए भारत के साथ संबंध सुधारेंगे?...इस मुद्दे पर विदेश मामलों के जानकार क्या कहते हैं, आइये आपको अवगत कराते हैं। 

अभी कहां है बांग्लादेश?

बांग्लादेश फिलहाल पाकिस्तान और चीन की गिरफ्त में फंसा हुआ है। बांग्लादेश में हुए हालिया चुनावों और राजनीतिक बदलाव के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ढाका पाकिस्तान और चीन के प्रभाव में फंसकर 'ढाक के तीन पात' बन जाएगा। या फिर तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी सरकार भारत के साथ संबंध सुधारकर देश में शांति और स्थिरता का माहौल कायम करेगी और स्थिति बदलेगी। 12 फरवरी के आम चुनाव में बीएनपी ने दो तिहाई बहुमत हासिल किया है। वहीं आवामी लीग की अनुपस्थिति का फायदा जमात-ए-इस्लामी गठबंधन ने उठाया है और अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 70 से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया है। बांग्लादेश में भारत के खिलाफ जहर उगलने वाली जमात का मजबूत होना नई दिल्ली के लिए बेहद चिंताजनक है। वहीं यह पाकिस्तान के लिए काफी मुफीद है। 

क्या है बीएनपी और तारिक रहमान की सोच?

बीएनपी की विदेश नीति का मूल मंत्र है "Bangladesh Before All" और "Friend Yes, Master No"-बांग्लादेश सबसे पहले...सभी देशों से दोस्ती, लेकिन किसी की गुलामी नहीं। तारिक रहमान ने रैलियों में कहा था, "न दिल्ली, न पिंडी-बांग्लादेश सबसे पहले। उनकी यह नीति हसीना काल की भारत-केंद्रित विदेश नीति से अलग है, जहां ढाका को भारत का करीबी मित्र माना जाता था। हसीना सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने चीन के साथ गहरे संबंध बनाए हैं। अब बीएनपी भी चीन को महत्व देगी, क्योंकि वह बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, निवेशक और हथियार आपूर्तिकर्ता है। चुनाव के बाद चीन ने तुरंत बधाई दी और "नए अध्याय" लिखने की बात कही। बीएनपी पिछले कार्यकाल (2001-2006) में भी चीन से करीबी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन बंगाल की खाड़ी में खासकर बुनियादी ढांचे और व्यापार के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करेगा।

कैसे बिगड़े भारत से संबंध और पाक से बढ़ी नजदीकी

भारत-बांग्लादेश के संबंध तब खराब हुए जब शेख हसीना सरकार का अगस्त 2024 में छात्रों के आंदोलन के बाद पतन हो गया। शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने चीन से करीबी रखने के साथ पाकिस्तान से भाई-भाई वाला संबंध बढ़ाना शुरू किया। अब बीएनपी सत्ता में होगी, जो ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान से अच्छे संबंध रखती है। 1971 के युद्ध के बावजूद बीएनपी के समय में पाकिस्तान से संबंध सुधरे। अंतरिम सरकार में पाकिस्तान के साथ उड़ानें फिर शुरू हुईं, व्यापार बढ़ा और त्रिपक्षीय बैठकें (चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान) हुईं। ऐसे में माना जा रहा है कि बीएनपी सरकार पाकिस्तान के साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग बढ़ा सकती है, लेकिन यह भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे पूर्वोत्तर भारत में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत के साथ कैसे संबंध रखना चाहेंगे तारिक रहमान?

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के असिस्टेंट प्रोफेसर और विदेशी मामलों के जानकार डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव कहते हैं कि बीएनपी अब संतुलित नीति अपनाएगी। वह चीन, पाकिस्तान से लाभ लेगी, लेकिन भारत को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत से भौगोलिक रूप से तीन तरफ से घिरा है। ऐसे में भारत को नजरंदाज करने में उसे भौतिक रूप से कठिनाई आएगी। इसलिए उसे भारत के साथ संबंध सुधारना ही होगा। यह उसकी मजबूरी भी होगी। तारिक रहमान को भारत जैसे बड़े लोकतंत्र से संबंध सुधारने में ही भलाई है। क्योंकि बांग्लादेश में आवामी लीग को बैन करने से लगता है कि वह अभी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। यानी वहां पूरी तरह लोकतंत्र की वापसी नहीं हुई है। प्रो. अभिषेक कहते हैं कि बांग्लादेश की डेमोक्रेसी अभी भी बीएनपी और जमात के हाथों में जकड़ी हुई है।

जनता के पास बीएनपी ही थी विकल्प

प्रो. अभिषेक ने कहा कि आवामी लीग के बैन होने से बांग्लादेश में जनता के पास बीएनपी ही विकल्प थी, क्योंकि यूनुस के कार्यकाल में लोगों के अधिकार खत्म थे। वहीं जमात कट्टरवादी और महिला विरोधी है। ऐसे में लोगों ने एक स्थाई सरकार के लिए बीएनपी को चुना। अब तारिक रहमान पीएम बनने जा रहे हैं। वह नये नेता नहीं है। उन्हें पता है कि भारत के साथ दुश्मनी करके वह बांग्लादेश का भला नहीं कर पाएंगे। मगर उनकी प्राथमिकता शेख हसीना की पुरानी लीगेसी को खत्म करेंगे यानी वह भारत के ऊपर से डिपेंडेंसी कम करेंगे। 

भारत के लिए क्या है सबसे बड़ी चिंता?

प्रो. अभिषेक कहते हैं कि भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बांग्लादेश में रेडिकल्स यानी जमाती भी अच्छी संख्या में चुनाव जीते हैं, जो पाकिस्तान, आईएसआई, लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के समर्थक कहे जाते हैं। ऐसे में भारत से लगा बांग्लादेश का पूर्वी बॉर्डर और नॉर्थ-ईस्ट रीजन में चिंताएं बढ़ेंगी। जमात की पाकिस्तान से नजदीकी चिंताजनक है। ऐसे में भारत को सुरक्षा और शांति के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। नॉर्थ-ईस्ट और पश्चिम बंगाल में भारत को पाक-जमात मिलकर डिस्टर्ब कर सकते हैं।

भारत भी कर रहा बांग्लादेश से संबंध सुधारने का प्रयास

भारत के लिए बांग्लादेश में हुआ यह बदलाव जटिल है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत की मजबूत सहयोगी थीं, लेकिन उनके निर्वासन (भारत में शरण) और अल्पसंख्यक हिंदुओं पर ढाका में हिंसा बढ़ने के बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए।  पीएम मोदी ने तुरंत तारिक रहमान को जीत की बधाई दी और "शांति, प्रगति" पर सहयोग की बात कही। हालांकि तीस्ता जल बंटवारा जैसे मुद्दे परेशानी पैदा कर सकते हैं। बीएनपी "न्यायपूर्ण हिस्सा" कहकर अपनी मांगों को बल दे रही है। वह चीन समर्थित मास्टर प्लान पर विचार कर सकती है, जो भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास खतरा है। हिंदू अल्पसंख्यक सुरक्षा भारत के लिए मुख्य मुद्दा है। वहीं बीएनपी शेख हसीना का प्रत्यर्पण मांग रही है, जो भारत के लिए मुश्किल हालात पैदा करने वाले हैं। मगर भारत बांग्लादेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। भरोसेमंद पड़ोसी से लेकर व्यापार, सुरक्षा, प्रवासन के क्षेत्र में बीएनपी को भारत का सहयोग जरूरी है। 

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