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मुंबई वॉटर मेट्रो सेवा कब होगी शुरू? सरकार ने बता दिया, कौन से रूट पर चलेगी?

 Published : Feb 16, 2026 09:59 pm IST,  Updated : Feb 16, 2026 10:12 pm IST

मुंबई वॉटर मेट्रो की परियोजना की लागत करीब 1200 करोड़ रुपये है। वॉटर मेट्रो के शुरू होने से नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक करीब 40 मिनट में पहुंचना संभव हो सकेगा।

वॉटर मेट्रो (फाइल फोटो)- India TV Hindi
वॉटर मेट्रो (फाइल फोटो) Image Source : ANI

मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना को दिसंबर से चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। महाराष्ट्र के बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। राणे ने बताया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) के लिए तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) 28 फरवरी तक प्रस्तुत कर दी जाएगी। इसके बाद रूट्स की व्यवहार्यता पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा की जाएगी और पहले चरण में दो चयनित मार्गों पर काम शुरू होगा।

6 से 8 रूट, इलेक्ट्रिक नावों का नेटवर्क

करीब 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत एमएमआर में छह से आठ रूट चिह्नित किए गए हैं। इन रूट्स को बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक नावों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे पर्यावरण अनुकूल और तेज जल परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सके। राणे ने कहा कि शुरुआत मुंबई शहर से की जाएगी और बाद में इसे पूरे एमएमआर क्षेत्र तक विस्तारित किया जाएगा।

प्रमुख रूट और 40 मिनट में एयरपोर्ट

शहर के भीतर प्रस्तावित सेवाएं मुख्य रूप से नरीमन पॉइंट–वर्ली–बांद्रा–जुहू–वर्सोवा कॉरिडोर पर केंद्रित होंगी। पहले चरण में दो रूट चालू किए जाएंगे। दक्षिण मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास रेडियो क्लब जेट्टी के तैयार होने के बाद वॉटर मेट्रो के जरिए नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगभग 40 मिनट का समय लगेगा, जिससे यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

कोच्चि मॉडल पर आधारित योजना

यह परियोजना कोच्चि वॉटर मेट्रो मॉडल से प्रेरित है। राज्य सरकार 6 मार्च को पेश होने वाले बजट में इसकी औपचारिक घोषणा कर सकती है। मुंबई वॉटर मेट्रो के संचालन से न केवल सड़क यातायात का दबाव घटेगा, बल्कि शहर को एक आधुनिक, टिकाऊ और स्मार्ट परिवहन विकल्प भी मिलेगा।

वॉटर मेट्रो क्या है?

एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल जल परिवहन प्रणाली है, जिसमें बैटरी-संचालित या इलेक्ट्रिक फेरी/नौकाओं के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों को जलमार्ग से जोड़ा जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य सड़क यातायात की भीड़भाड़ को कम करना, तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा विकल्प प्रदान करना है। यह प्रणाली शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और समय की बचत के लिए एक प्रभावी समाधान साबित हो रही है। भारत में इसका सबसे सफल उदाहरण कोच्चि वॉटर मेट्रो है, जो केरल में चल रहा है और शहरी जल परिवहन का एक आदर्श मॉडल माना जाता है। 

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