Friday, February 13, 2026
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Explainer: बांग्लादेश में जमात की शर्मनाक हार और तारिक रहमान की प्रचंड जीत, भारत के लिए क्यों है राहत की खबर

Written By: Kajal Kumari @lallkajal Published : Feb 13, 2026 10:38 am IST, Updated : Feb 13, 2026 11:15 am IST

पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए चुनाव का फाइनल रिजल्ट अब सामने है जिसमें जमात ए इस्लामी को करारी हार मिली है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को बड़ी जीत मिली है। बीएनपी के तारिक रहमान अब बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। जानें बीएनपी की जीत भारत के लिए क्यों राहत भरी खबर है?

बांग्लादेश में बीएनपी की जीत- India TV Hindi
Image Source : PTI बांग्लादेश में बीएनपी की जीत

बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं जिसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत हुई है और जमात ए इस्लामी की करारी हार हुई है। बीएनपी की बड़ी जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी है और उनकी जीत पर गर्मजोशी दिखाई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया (X) पर साझा किए अपने संदेश में इस जीत का श्रेय तारिक रहमान को दिया है। बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि बांग्लादेश की जनता उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास बनाए रखेगी। इससे पहले भारत ने गुरुवार को कहा था कि वह बांग्लादेश में चुनावों के नतीजों और जनादेश का इंतजार करेगा और उसके बाद ही किसी मुद्दे पर विचार करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, "हम बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनावों के पक्षधर हैं।" 

बांग्लादेश के इस बार के चुनाव में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) और उसकी पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी (Jamat e islami के बीच सीधा मुकाबला था। बता दें कि देश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने पिछले साल शेख हसीना की अवामी लीग को भंग कर दिया था और अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया था। सबसे खास बात ये है कि इस बार शेख हसीना देश से बाहर थीं और उनकी धुर प्रतिद्वंद्वी रहीं खालिदा जिया का निधन हो चुका है। ऐसे में यह चुनाव कई मायनों में अहम रहा है।

जमात की हार

Image Source : PTI
जमात की हार

तारिक रहमान की जीत पर भारत की नजर

खालिदा जिया के निधन के बाद प्रवासन से लौटे उनके बेटे तारिक रहमान ने बड़ी दर्ज की है। बांग्लादेश के लोगों ने बीएनपी को प्रचंड बहुमत दिया है और जीत के बाद उसके नेता तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री बनेंगे। तारिक रहमान के पीएम बनने के बाद भारत की पैनी नजर बीएनपी की गतिविधियों और उनकी नीतियों पर टिकी रहेगी, क्योंकि यह जीत न सिर्फ बांग्लादेश की राजनीति के लिए बल्कि भारत के साथ उसके बिगड़े रिश्ते को सुधारने के लिए भी बहुत मायने रखता है। इस वक्त अपदस्थ अवामी लीग की शेख हसीना भारत में शरण लेने को मजबूर हैं और बांग्लादेश में भारत विरोधी नैरेटिव को खूब हवा दी गई है, कई हिंदुओं की हत्या कर दी गई है।

भारत के लिए क्यों है राहत की खबर 

भारत की चिंता जमात-ए-इस्लामी को लेकर थी, जिसे भारत में अक्सर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के प्रभाव में माना जाता है। अब भारत को सबसे बड़ी राहत इस बात को लेकर है कि इस चुनाव में जमात ए इस्लामी को करारी हार मिली है। भले ही ऐतिहासिक रूप से बीएनपी के साथ भारत के रिश्ते सहज नहीं रहे हैं, फिर भी मौजूदा परिदृश्य में भारत उसे लोकतांत्रिक विकल्प के तौर पर देख रहा है। भारत अब आशान्वित है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी सरकार बनाएगी और रिश्तों को नया आयाम मिलेगा। 

बीएनपी की जीत भारत के लिए राहत भरी खबर इसलिए भी है क्योंकि इस जीत को फिलहाल भारत न तो संकट मानेगा, न ही भारत के लिए अभी कोई जश्न का मौका ही होगा। इस तरह से कहें तो बीएनपी की जीत भारत के लिए एक लिटमस टेस्ट की तरह होगा। क्योंकि दोनों देशों के लिए सुरक्षा सहयोग, विदेश नीति का संतुलन और आर्थिक साझेदारी आगे का रास्ता तय करेंगे। ऐसे में देखना होगा कि बांग्लादेश की नई सरकार के साथ भारत के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं। अगर रहमान की बीएनपी दोस्ती का हाथ बढ़ाएगी और भरोसा दे पाएगी, तो भारत सहयोग बढ़ाएगा और प्रैक्टिकल होकर अपने नए विकल्पों के साथ आगे बढ़ेगा।

तारिक अनवर की जीत

Image Source : PTI
तारिक अनवर की जीत

भारत ने पड़ोसी देशों के जनादेश का किया है सम्मान

भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी मुल्कों के जनादेश का सम्मान किया है और अगर उसके मापदंडों पर सबकुछ खरा उतरा तो वह बांग्लादेश की नई सरकार के साथ काम करने का संदेश देगा। फिलहाल पड़ोसी बांग्लादेश में गृहयुद्ध और अंतर्कलह की वजह से देश नाजुक मोड़ पर खड़ा है। वहां कट्टरपंथी ताकतें सक्रिय हैं और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत के खिलाफ माहौल गलत तरह का चल रहा है। जमात ए इस्लामी इस चुनाव में सत्ता हासिल करने की पूरी तैयारी में थी और उसने 11 दलों को साथ लेकर  गठबंधन बनाया था और उसे पूरी आशा थी कि वो चुनाव जीत जाएगा लेकिन उसकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। 

युनूस और पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती ने बढ़ा दी थी चिंता

पाकिस्तान बांग्लादेश को दोस्ती का हवाला देते हुए सबसे अधिक भारत-विरोधी विकल्प का समर्थन करता रहा है। इससे पहले बांग्लादेश में शेख हसीना ने पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद युनूस के नेतृत्व में देश की नीति में अचानक बदलाव आया और पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ती गई। जिस भारत की मदद से बांग्लादेश आजाद हुआ था, उसी से दूरी बढ़ाते हुए उसने युनूस के नेतृत्व में पाकिस्तान के साथ रिश्तों को मजबूत बना लिया। अगर जमात सत्ता में आती, तो पाकिस्तान से दोस्ती के और गहराने की आशंका थी। ऐसे में अब भारत यह देखेगा कि बीएनपी सत्ता में आकर चीन और पाकिस्तान के साथ किस स्तर तक निकटता बढ़ाती है। अगर जमात की छाया से बाहर निकलकर बीएनपी संतुलन बनाए रखती है तो भारत के लिए सहजता बढ़ेगी।

जमात ए इस्लामी बांग्लादेश

Image Source : PTI
जमात ए इस्लामी बांग्लादेश

भारत ने बीएनपी को दिया था ग्रीन सिग्नल

भारत ने अपनी तरफ से पहले से ही बीएनपी को ग्रीन सिग्नल दिया है, चाहे वो खालिदा जिया के बीमार होने पर चिंता जाहिर करना हो या उनके निधन पर भारत के विदेश मंत्री का खुद बांग्लादेश जाना हो। भारत के पीएम मोदी ने भी गंभीर रूप से बीमार खालिदा जिया के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर की थी और भारत के समर्थन की पेशकश की थी। इसके जवाब में बीएनपी ने भी ईमानदारी से आभार जताया था। यह राजनीतिक गर्मजोशी का एक दुर्लभ उदाहरण था।

खास बात ये भी है कि इस बार बांग्लादेश में बीएनपी ने अपना चुनाव जमात के पिच पर नहीं, खुद के बूते लड़ा है और बीएनपी की इस जीत से बांग्लादेश के हिंदुओं को कुछ हद तक राहत मिली होगी। क्योंकि हाल ही में इकबाल मंच के नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में जिस तरह हिंसा फैली और इसके बाद जब एक और हिंदू युवक की लिंचिंग कर उसकी हत्या की गई, तो बीएनपी ने इन सबकी घोर आलोचना की थी। बांग्लादेश के हिंदुओं के दिल में छोटी ही सही लेकिन अब एक उम्मीद जरूर होगी कि बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की नई सरकार में उनकी स्थिति में सुधार होगा, उन्हें भी दूसरे बांग्लादेशी नागरिकों की तरह ही मानवाधिकार मिलेगा।

 

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