कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने निजी संस्थानों और आईटी कंपनियों को चेतावनी दी कि अगर वे भर्ती के दौरान कन्नड़ भाषी लोगों के साथ भेदभाव करती पाई गईं, तो सरकार उसे बहुत गंभीरता से लेगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सीएम डीके शिवकुमार का यह बयान तब आया है, जब सोशल मीडिया पर डॉक्टर प्रिशा सरगम नाम की एक युवती का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने आरोप लगाया कि टेक्नोलॉजी कंपनियों के हायरिंग मैनेजर कन्नडिगा लोगों के प्रति भेदभाव कर रहे हैं।
डॉक्टर प्रिशा सरगम ने X पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा है-
नमस्कार इस वीडियो को किसी भी कीमत पर स्किप न करें, पिछले कुछ समय से ऐसे वीडियो पोस्ट किए जा रहे थे जिसमें ये कहा गया था कि अगर रिज्यूमे में आप अपनी मातृभाषा कन्नडा लिख रहे हैं तो आपको इंटरव्यू में रिजेक्ट किया जा रहा है। ये बात 100 फीसदी नहीं बल्कि 200 फीसदी सच है। यही हो रहा है 100 लोगों की कम्पनी में सिर्फ 3-4 ही कन्नडिगा (कन्नड़ भाषी लोग) हैं, जो कैम्पस ड्राइव ये लोग कंडक्ट करते हैं इन्होंने बेंगलुरु और कर्नाटक के कॉलेजों में जाना ही बंद कर दिया है। दूसरे दूसरे राज्यों से लोगों को नियुक्त कर रहे हैं वो कोई टैलेंटेड लोग नहीं हैं सिर्फ जस्ट पास हैं, उन्हें इंग्लिश भी ढंग से नहीं आती है, लेकिन वो लोग कम सैलेरी में आते हैं यही एक कारण है, जो एक यहां आता है वो धीरे-धीरे पूरे खानदान को यहां ले आता है, उसका पूरा समाज यहां आ जाता है, हम कन्नडिगा के साथ सीरियसली यही हो रहा है, कन्नडिगा बोलते ही हमें रिजेक्ट किया जा रहा है, ये जानकारी लेबर डिपार्टमेंट के पास भी है लेकिन उनके हाथ में भी कुछ नहीं है, यही सच है।
प्रिशा सरगम के वीडियो के बाद छिड़ी बहस
वीडियो में प्रिशा आगे कह रही हैं, ''मेरा सिर्फ एक सवाल आदरणीय सीएम डीके सर से है, आप बिदादी टाउनशिप बनाने की बात कर रहे हैं, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा ऐसा कह रहे हैं। लेकिन ऐसे हालात में ये नहीं होगा। मैं आपसे अपील करती हूं कि आप इसका कोई समाधान निकालें और मैं बाकी लोगों से भी अपील करती हूं कि इसके बारे में बात करें।''
इस वीडियो को जब अलग-अलग कन्नडा संगठनों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट करना शुरू कर दिया तो सीएम डीके शिवकुमार ने भी X पर एक पोस्ट के जरिये इसका जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि "यह सुनकर दुख होता है कि बेंगलुरु की IT कंपनियों में कन्नडा भाषी लोगों को रोजगार के अवसरों में अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें नौकरी के मौकों से वंचित किया जा रहा है। सरकार ने मूल कन्नडा भाषी लोगों को दरकिनार किए जाने के इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है।''
'बेंगलुरु भारत की IT कैपिटल'
आगे उन्होंने लिखा है, ''कर्नाटक में, कन्नडा भाषी लोगों का ही सर्वोपरि स्थान है। सरकार किसी भी कारण से कन्नडा भाषी लोगों के अधिकारों, सम्मान और अवसरों की अनदेखी नहीं होने देगी। दुनिया बेंगलुरु को भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी के रूप में देखती है, और हमें अपने कन्नडा भाषी लोगों की प्रतिभा, कौशल और क्षमताओं पर बहुत गर्व है। यदि यह पाया जाता है कि कोई निजी संस्थान जानबूझकर कन्नडा भाषी लोगों को दरकिनार कर रहा है, तो सरकार उचित कार्रवाई करेगी। कन्नडा भाषी लोगों के हितों की आवाज के रूप में, सरकार उनके मुद्दों का समाधान करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।''
इंफोसिस के पूर्व CFO ने क्या कहा?
वहीं, इंफोसिस के पूर्व CFO और शिक्षाविद मोहन दास पाई ने सुझाव दिया कि "CM कन्नडा भाषियों के हितों की रक्षा के साथ साथ, युवाओं को, खासकर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में, बेहतर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराएं। वहां GER (सकल नामांकन अनुपात) कम है और सॉफ्ट स्किल्स की भी कमी है। उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दें। सरकारी कॉलेजों में 60-70% से अधिक फैकल्टी के 'गेस्ट फैकल्टी' होने की बात सामने आई है। कृपया वहां स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति करें और हमारे विश्वविद्यालयों में शोध (रिसर्च) के लिए फंड दें। AI के इस दौर में, अधिक कुशल लोग तैयार करने का यही सही तरीका है।"
यह भी पढ़ें-
चर्चित पूर्व कस्टम अधिकारी हत्या मामले में 3 की गिरफ्तारी, बेंगलुरु भागने की फिराक में थे, घटना की थी पूरी प्लानिंग
अमेरिकी ट्रैवलर को भा गया बेंगलुरु और कोलकाता एयरपोर्ट, दिल्ली को लेकर कही ऐसी बात; सोच में डाल देगा Video
Latest India News