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Rajat Sharma's Blog | क्या बंगाल को योगी मॉडल चाहिए?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद भी अपराधियों को किसी का डर नहीं है। शुभेंदु अधिकारी की बात सही है कि बंगाल में भी गुंडागर्दी को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ का मॉडल लागू करना होगा।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

बंगाल में जिसकी आशंका थी, वही हो गया। नई सरकार के गठन से पहले कोलकाता में हाई प्रोफाइल मर्डर हुआ। शुभेन्दु अधिकारी के PA चन्द्रनाथ रथ को गोलियों से भून दिया गया। जिस तरह से इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि ये हत्या पूरी योजना के साथ, रेकी करके, राजनीतिक संदेश देने के लिए किया गया।

शुभेन्दु अधिकारी ने भी कहा है कि साजिश तो उन्हें मारने की थी लेकिन हत्यारे उन तक नहीं पहुंच पाए, इसलिए उनके पीए को निशाना बनाया गया। शुभेन्दु ने कहा, ये हत्याकांड भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार का बदला हो सकता है। चन्द्रनाथ रथ की मां ने कहा, वह चाहती हैं उनके बेटे के हत्यारों को कानून सजा दे। वह खुद मां हैं, इसलिए हत्यारों के लिए फांसी की मांग नहीं करेंगी, लेकिन उनकी गोद उजाड़ने वालों को जिंदगी भर जेल में रखा जाना चाहिए।

भाजपा विधायक अर्जुन सिंह ने सीधे सीधे अभिषेक बनर्जी का नाम लिया। अर्जुन सिंह ने कहा, चुनावी हार से अभिषेक बनर्जी बौखला गए हैं, ये हत्या उसी का नतीजा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। ममता की पार्टी ने कहा कि चुनाव के बाद हिंसा रोकने में चुनाव आयोग नाकाम रहा है, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और दफ़्तरों पर हमले हो रहे हैं, उनके तीन कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है, ये बीजेपी और चुनाव आयोग की नाकामी का नतीजा है।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा, सिर्फ दो दिन इंतजार कीजिए। शपथग्रहण के बाद गुडों और माफिया का बुरा वक्त शुरू होगा। 9 मई के बाद बंगाल में अपराधियों का इलाज वैसे ही होगा जैसे यूपी में बीजेपी की सरकार ने किया है। शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या इस बात का ज्वलन्त  सबूत है कि बंगाल में हत्यारों की हिम्मत किस कदर बढ़ गई है।

चुनाव में TMC की हार के बाद भी अपराधियों को किसी का डर नहीं है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याओं का एक खूनी इतिहास रहा है।

पांच साल पहले  2021 में विधानसभा चुनाव में TMC की जीत के बाद  31 लोगों की हत्या हुई थी, हिंसा की 88 घटनाएं हुईं थीं। पिछले 6 साल में देश भर में चुनावों के दौरान जितनी हिंसा हुई, उनमें 35 प्रतिशत घटनाएं बंगाल में हुईं। इसलिए चुनाव से पहले अर्धसैनिक बलों की 700 कंपनियों को तैनात करना पड़ा। चुनाव के दौरान किसी की जान नहीं गई, गोली चलाने और बम फेंकने की घटनाएं नहीं हुई लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद जो हुआ वह दुखदायक है।

शुभेंदु अधिकारी की बात सही है कि बंगाल में भी गुंडागर्दी को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ का मॉडल लागू करना होगा। अपराधियों के दिलोदिमाग में पुलिस का डर कायम करना होगा। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 07 मई, 2026 का पूरा एपिसोड

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