Rajat Sharma's Blog: SC में EC ने कहा, SIR का फैसला सभी चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिया
चुनाव आयोग के हलफनामे में कहा गया है कि आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए, कोई फैसला एकतरफा नहीं लिया गया। आयोग ने ये भी कहा कि किसी भी वोटर का नाम ERO की सहमति के बाद ही जोड़ा या हटाया जा सकता है और फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

चुनाव आयोग ने कल सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर साफ कहा है कि जून 24, 2025 को देश भर में वोटर लिस्ट का SIR करवाने का फैसला तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिया था और उनमें इसे लेकर कोई आपसी मतभेद नहीं था। आयोग ने ये हलफनामा कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कई विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं के जवाब में दिया है।
हलफनामे में साफ कहा गया है कि विपक्ष द्वारा दायर ये सारी याचिकाएं एक अखबार में छपी रिपोर्ट पर आधारित है। इस खबर में ये कहा गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच कामकाज को लेकर मतभेद है। चुनाव आयोग का ये हलफनामा ऐसे वक्त पर आया है जब कांग्रेस के नेताओं की कोशिश है कि इस वक्त सारा फोकस चुनाव आयोग और वोट चोरी पर रहे। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल 1 नंबवर को दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट चोरी के खिलाफ रैली करने वाले हैं।
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में गोवा को लेकर एक उदाहरण दिया है जो वाकई आंख खोलने वाली है। आरोप लगाया गया था कि गोवा में 97 वोटरों के नाम हटा दिये गये। आयोग ने कहा कि BLO ने घर-घर जाकर जांच की और पता लगा कि इन 97 में से 88 वोटर पहले ही अपने नाम जुड़वाने के लिए फार्म-6 भर चुके हैं, और बाकी नौ में से 6 लोग देश से बाहर हैं और 3 लोगों के पास पुर्तगाल का पासपोर्ट है।
चुनाव आयोग के हलफनामे में कहा गया है कि आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए, कोई फैसला एकतरफा नहीं लिया गया। आयोग ने ये भी कहा कि किसी भी वोटर का नाम ERO की सहमति के बाद ही जोड़ा या हटाया जा सकता है और फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
चुनाव आयोग का जबाव अब सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं। कोर्ट में तथ्यों के आधार पर सुनवाई होगी। चूंकि मामला पेचीदा है, इसलिए इसमें फैसला आने में वक्त लगेगा और जब तक फैसला नहीं आएगा तब तक कांग्रेस और अन्य विरोधी दल ज्ञानेश कुमार पर हमला करते रहेंगे।
मेरा निवेदन: पशुओं पर क्रूरता वाले ड्राफ्ट लैब टेस्ट रुल्स का विरोध करें
भारत सरकार जानवरों पर होने वाले प्रयोगों के नियमों में बदलाव करने जा रही है, इसका ड्राफ्ट जारी किया गया है और 5 नवम्बर तक जनता से राय मांगी गई है। इस ड्राफ्ट में कई बातें हैरान करने वाली हैं। अब तक हमारे देश में जानवरों पर कॉस्मेटिक टेस्टिंग बैन है, लेकिन नए नियमों के मुताबिक इसकी इजाजत मिल सकती है।
अब तक जानवरों पर लैब ट्रायल्स के लिए कड़े नियम हैं, सरकार से परमीशन लेनी पड़ती है, लेकिन अब एक्सपेरिमेंट्स के लिए सिर्फ उन्हीं मामलों में सरकारी परमीशन की जरूरत होगी, जिनमें ट्रायल के दौरान एनीमल को असहनीय दर्द होता हो या जानवरों की जिंदगी खतरे में हो।
पशुप्रेमियों ने इसका विरोध किया है। PETA India ने सरकार से ये प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर ये कानून लागू हुआ तो पशुओं पर क्रूरता बढ़ेगी, जंगली जानवर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे, नए नियमों में खामियों का फायदा बड़ी कंपनियां उठाएंगी।
Peta India की इस मुहिम का समर्थन करते हुए मेनका गांधी ने कहा कि जब दुनिया के बड़े देश अपने यहां पशुओं की लैब टेस्टिंग पर बैन लगा चुके हैं, तब भारत में इस तरह की छूट देना कहां तक उचित है।
एक बात तो साफ़ है कि animal testing के नियमों में बदलाव पशुओं पर क्रूरता को बढ़ावा देगा, बेज़ुबान जानवरों को experiments के लिए और ज़्यादा आसानी से उपलब्ध करा देगा। जब Ethics Panel को जानवरों पर किए जाने वाले experiments के approval की authority मिल जाएगी तो कोई रोकने वाला नहीं होगा। जानवरों को भी दर्द होता है, उन्हें भी डर लगता है। सिर्फ़ वो अपनी तकलीफ़ कह नहीं पाते। Procedures के लिए खरगोश, चूहे, बंदर और dogs को labs में जिस तरह छोटे पिंजरों में बंद करके रखा जाता है, उन्हें बार बार सुइयां चुभोई जाती हैं, ये सरासर ज़ुल्म है। इन मासूमों से उनकी consent नहीं ली जा सकती इसलिए उन पर जुल्म होता है।
होना तो ये चाहिए कि testing में पशुओं का इस्तेमाल कम से कम हो, जानवरों की पीड़ा कम हो, जहां तक संभव हो animal testing के स्थान पर non animal testing अपनायी जाय, लेकिन नए नियमों से इसका उल्टा होगा।
एक डर ये भी है कि जिन देशों में animal testing मुश्किल है, महंगी है, वो भारत की labs को animal testing के लिए इस्तेमाल करेंगे। ये बहुत ही ख़तरनाक है। इसलिए हम सबको इन नए नियमों के ख़िलाफ़ अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। पांच नवंबर की जो deadline है, उससे पहले विरोध ज़ाहिर करने के लिए एक QR code है, इसे स्कैन करके आप सभी अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं।
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