Rajat Sharma's Blog | खौफ़ के मारे घुसपैठिये लौट रहे हैं बांग्लादेश
बंगाल में सरकार बदली और बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद अपना सामान समेट कर बॉर्डर पर पहुंच गए। बड़ी बात ये है कि शुभेन्दु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया है कि बॉर्डर पर पहुंचे घुसपैठियों को जेल न भेजे, होल्डिंग सेंटर्स में न पहुंचाएं।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों की धरपकड़ के बाद उत्तरी 24 परगना के हाकिमपुर बॉर्डर चेकपोस्ट पर बांग्लादेश लौटने के लिए लोगों की कतारें लग गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की सरकार ने मालदा और मुर्शिदाबाद में होल्डिंग सेंटर्स बनाए हैं, जहां बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट करने के लिए रखा जा रहा है। जो बांग्लादेशी कई साल पहले अवैध तरीके से बंगाल में घुसे, हमारे देश में बस गए, अब वो जल्द से जल्द वापस भागने की फिराक में हैं।
बंगाल में सरकार बदली और बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद अपना सामान समेट कर बॉर्डर पर पहुंच गए। बड़ी बात ये है कि शुभेन्दु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया है कि बॉर्डर पर पहुंचे घुसपैठियों को जेल न भेजे, होल्डिंग सेंटर्स में न पहुंचाएं। उन्हें BSF के हवाले कर दिया जाय, BSF उन्हें बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स को सौंपेगी। राज्य सरकार कानूनी पचड़े में पड़कर घुसपैठियों को लंबे वक्त तक माछ-भात खिलाने के मूड में नहीं हैं। बंगाल में जो घुसपैठिए खुद-ब-खुद अपने मुल्क लौट रहे हैं। उन्हें सेफ पैसेज दिया जाएगा लेकिन जो घुसपैठिए छिपे हुए हैं, उन्हें खोज-खोज कर होल्डिंग सेंटर्स में भेजा जाएगा।
ये सब कुछ बंगाल में राजनीतिक बदलाव का असर है। बीजेपी की सरकार बनने का इतना खौफ है कि जो घुसपैठिए सालों पहले हमारे देश में अवैध रूप से घुसे थे, वे खुद-ब-खुद वापस भागने की जुगाड़ में हैं। इंडिया टीवी संवाददाता ने हाकिमपुर बॉर्डर पर इन लोगों से बात की, उन्हें हिन्दी नहीं आती, वो बांग्ला बोलते हैं। कुछ घुसपैठियों ने टूटी-फूटी हिन्दी सीख ली है। इन सब ने जो कहा उसमें एक बात एक जैसी थी। सबके सब ममता बनर्जी की सरकार जाने से दुखी हैं। ज्यादातर घुसपैठियों ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के ज़माने में उन्हें दिक्कत नहीं थी, उन्हें रहने की जगह भी मिल जाती थी, काम धंधा भी मिल जाता था लेकिन बीजेपी ने बीस दिन में ही जीना मुश्किल कर दिया है, इसलिए अब वतन लौटने में ही भलाई है।
जो लोग पूछते थे कि बंगाल में घुसपैठिए कहां हैं, उन्हें सरहद पर लगी लाइनें देखनी चाहिए। जो कहते थे चुनाव आयोग ने SIR में अपने नागरिकों के वोट काटे, उन्हें बॉर्डर पर सामान लेकर खड़े लोगों की बात सुननी चाहिए। इनके पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड है, लेकिन सब फर्जी हैं। ये बांग्लादेशी नागरिक हैं। जब तक ममता बनर्जी की सरकार थी इन घुसपैठियों को लेकर किसी को परवाह नहीं थी, अब पकड़े जाने और डिटेन्शन सेंटर में जाने का डर है। इसलिए वो वापस अपने वतन जाना चाहते हैं। सरहद पर खड़े ये लोग उन सारे सवालों का जिंदा जवाब हैं, जो ममता बनर्जी ने घुसपैठियों के बारे में पूछे थे।
कौन कर रहे हैं डेमोग्राफी में बदलाव?
गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ की वजह से देश की डेमोग्राफी में हो रहे बदलाव के अध्ययन के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ के कारण देश में अप्राकृतिक ढंग से डेमोग्राफी में बदलाव हुए हैं, जो एक बड़ी समस्या है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल लालकिले से इस तरह की उच्च स्तरीय समिति बनाने का वादा किया था, जिसे पूरा किया गया है। रिटायर्ड IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र, रिटायर्ड IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री शमिका रवि समिति के सदस्य होंगे। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव इस समिति के पदेन सचिव होंगे। इस समिति में भारत के जनगणना आयुक्त को भी शामिल किया गया है। बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार से पिछले कई दशकों से भारत में घुसपैठ होती रही है।
कांग्रेस के ज़माने में 2013 में केंद्र सरकार ने माना था कि देश में करीब ढाई करोड़ अवैध बांग्लादेशी हैं। ये सब देश के कोने कोने में जाकर बस गए हैं। कई जगहों पर उनके कारण डेमोग्राफी में बदलाव हुए हैं, जो देश के लिए खतरा है। इसलिए ये काम बड़े व्यवस्थित तरीके से करना होगा। अमित शाह ने नक्सलवाद को जड़ से उखाड़कर फेंक दिया, इसलिए ये विश्वास करना चाहिए कि वो भारत में छिपे घुसपैठियों को चुन-चुनकर खोजेंगे और उन्हें वापस उनके देश भेजेंगे। अमित शाह तपती धूप में 20 दिन पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर बिताएंगे। वह राजस्थान, गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जाएंगे।
इन 20 दिनों में जो जानकारी हासिल होगी, उसके आधार पर एक बड़ा एक्शन प्लान बनाया जाएगा।
बकरीद पर शांति बनाए रखें
मुंबई में बकरीद से पहले मीरा भायंदर के रेज़िडेन्शियल सोसायटीज़ में कुर्बानी को लेकर तनाव पैदा हो गया। कुछ लोगों ने सोसायटी में 40 से ज्यादा बकरे जमा कर लिए जबकि प्रशासन ने कुर्बानी की जगहें तय की हैं और खुले में कुर्बानी पर रोक लगाई है। हिन्दू परिवारों ने बकरों को लाने का विरोध किया लेकिन मुस्लिम परिवार नहीं माने। बजरंग दल के लोग पहुंचे, मुस्लिम पक्ष और RWA से बात की, लेकिन बात नहीं बनी तो दोनों पक्षों में झड़प हो गई। कुछ लोगों को चोटें आईं। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाया। आखिरकार पुलिस ने तीन ट्रक मंगवाए और बकरों को उस जगह पर शिफ्ट किया जहां नगरपालिका ने कुर्बानी के लिए तय की है।
अच्छी बात ये है कि बड़े बड़े मौलाना लोगों से इस तरह के विवादों से बचने की अपील कर रहे हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदर मौलाना अरशद मदनी ने मुसलमानों से कहा कि वे प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करें, कुर्बानी के वक्त सरकारी आदेशों का पालन करें, खुले में कुर्बानी न दें, कुर्बानी के बाद जानवर की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर न करें, अगर कुर्बानी के दौरान कोई विवाद होता है तो खुद कानून हाथ में लेने की बजाए प्रशासन की मदद लें। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कुर्बानी के जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों और नालों में न डालें।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा है कि हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए कई मुस्लिम संगठनों ने उनसे वादा किया है कि वे इस बार बकरीद पर वो गाय की कुर्बानी नहीं देंगे। हिमंता ने कहा कि इस तरह की समझदारी से समाज में भाईचारा बढ़ेगा। जो समझदारी असम के मुस्लिम भाइयों ने दिखाई, उसी तरह दूसरे राज्यों के लोगों को भी सोचना चाहिए, मौलानाओं की बात सुननी चाहिए।
मुबंई में जिस तरह तनाव हुआ, वह अच्छी बात नहीं हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल में राज्य सरकारों ने बकरीद के लिए गाइडलाइन्स जारी की है। सबको नियमों का पालन करना चाहिए। सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना सिर्फ मुस्लिम भाइयों की जिम्मेदारी नहीं हैं। हिन्दू संगठनों को भी संयम रखना पड़ेगा। अगर कोई बकरीद के मौके पर जान बूझ कर माहौल खराब करे, रंग में भंग डाले तो उनके खिलाफ बिना मजहब देखे एक्शन होना चाहिए। (रजत शर्मा)
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