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राम मंदिर में CEO: राम मंदिर की प्रतिष्ठा लौटाओ

ऑपरेशन सिंदूर के पराक्रमी रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने का फैसला समझदारी का है। राम मंदिर सियासी विवादों में घिर गया था। एक decorated Air Marshal के नाम पर राजनीति करने की हिम्मत किसी की नहीं होगी।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

अयोध्या में रामलला के मंदिर का कामकाज चलाने के लिए नई टीम का ऐलान हुआ। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले Chief Executive Officer नियुक्त हुए। आज उन्होने मंदिर जाकर अपना कार्यभार संभाल लिया। जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने लगभग 43 साल भारतीय वायु सेना में रहकर राष्ट्र की सेवा की, अब वह प्रभु श्रीराम की सेवा में अपना जीवन लगाएंगे। ट्रस्ट में एक और बड़ा बदलाव ये हुआ कि अब तक कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि अब चंपत राय की जगह नए महासचिव होंगे। दिल्ली के व्यापारी और विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय महेश भागचंदका नए कोषाध्यक्ष होंगे।

ऑपरेशन सिंदूर के पराक्रमी रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने का फैसला समझदारी का है। राम मंदिर सियासी विवादों में घिर गया था। एक decorated Air Marshal के नाम पर राजनीति करने की हिम्मत किसी की नहीं होगी। अखिलेश यादव उनपर कमेंट करने से बचे। वैसे भी जितेंद्र मिश्रा का चयन पूरी प्रक्रिया के साथ, पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ। वायु सेना के रिटाय़र्ड एयर मार्शल की कमान ट्रस्ट के प्रति लोगों में विश्वास पैदा करेगी। गोविंद देव गिरि को महामंत्री बनाए जाने का फैसला भी अच्छा है, निरंतरता बनी रहेगी।

कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका को भी मैं जानता हूं। वो एक सफल व्यापारी हैं। पैसे का हिसाब-किताब कैसे रखना, अच्छी तरह जानते हैं। किसी को गड़बड़ी नहीं करने देंगे। इस नई टीम की निष्ठा, क्षमता और कुशलता पर तो कोई सवाल नहीं उठाया जा सकेगा लेकिन इस टीम के सामने चुनौती बड़ी है। राम मंदिर की प्रतिष्ठा पर जो चोट लगी है, उसे फिर से स्थापित करना इनकी जिम्मेदारी है।

उत्तराखंड के मदरसे अब विज्ञान, कंप्यूटर भी पढ़ाएंगे

उत्तराखंड में मदरसों का आधुनिकीकरण शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई नीति के तहत सिलेबस तैयार करने और उसे पढ़ाने वाले 26 मदरसों को सर्टिफिकेट दिए। अब राज्। में कुल 33 मदरसे मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुसलमानों के बच्चों को भी पढ़ने का, आगे बढ़ने का हक है, बच्चे  मजहबी किताबों के साथ साथ गणित, विज्ञान और कंप्यूटर की शिक्षा हासिल करें, ये वक्त की ज़रूरत है। सरकार ने इसी नीयत के साथ नई पॉलिसी बनाई है।

मदरसों का रजिस्ट्रेशन 30 सितंबर तक होगा। जब मदरसा बोर्ड काम कर रहा था, उस वक्त तक कुल 452 रजिस्टर्ड मदरसे थे। बहुत से मदरसा संचालक अभी भी नए सिस्टम का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मदरसों का काम मज़हबी तालीम देना है।

बारह साल पहले “आप की अदालत” शो में नरेंद्र मोदी ने कहा था,  ‘मैं चाहता हूं, मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में कुरान हो,  दूसरे में कम्प्यूटर’। उत्तराखंड में मदरसों का आधुनिकीकरण इसी दिशा में कदम है। बच्चे मदरसों में दीनी तालीम पाएं,  साथ-साथ विज्ञान और कंप्यूटर की तालीम भी मिले, इससे उनका भला होगा। वे भी आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बन सकेंगे। जिन लोगों का मदरसों में निहित स्वार्थ है, वे इन्हें सिर्फ मजहबी तालीम तक सीमित रखना चाहते हैं। इसमें उनका तो फायदा है लेकिन पढ़ने वाले बच्चों के लिए भविष्य में आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो जाते हैं। इसीलिए मदरसों में मजहब के साथ साथ आधुनिक शिक्षा ज़रूरी है।

लद्दाख: L-G वी.के. सक्सेना का कमाल 

लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने छोटी सी तरकीब लगाकर बड़ा कमाल कर दिया। सिर्फ दस हजार रुपये खर्च करके लद्दाख की पथरीली और बंजर जमीन को खेती के लायक बना दिया। दरअसल लद्दाख में ग्लेशियर पिघलने से भारी मात्रा में पानी मिलता है, लेकिन सही इंतजाम न होने के कारण लेह के स्टोक गांव के नाले से करीब 9 करोड़ लीटर पानी रोज़ाना सिंधु नदी में जा कर बर्बाद हो जाता था।

लद्दाख के कई गांवों के खेत पानी की कमी से सूखे और बंजर पड़े रहते थे। वी.के. सक्सेना ने इस बर्बादी को रोका और इस पानी को खेतों तक पहुंचाने की योजना बनाई। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग से छोटी-छोटी नालियां बनाकर पानी को चैनलाइज करने को कहा। इसके बाद जेसीबी की मदद से सिर्फ दो दिनों में नाले के पास लगभग 200 मीटर लंबे छोटे-छोटे चैनल बना दिए।

जो नौ करोड़ लीटर पानी पहले बर्बाद हो जाता था, उसमें से करीब 8 करोड़ लीटर पानी को 'इगू-पेह नहर' में मोड़ दिया गया, इसकी वजह से इस से जुड़े 12 गांवों को रोज़ाना पर्याप्त पानी मिलने लगा। अब ग्लेशियर से आने वाला पूरा पानी इस्तेमाल हो रहा है जिससे लद्दाख के 12 गांवों की 1,500 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन को सिंचाई का पानी मिलेगा।

ये तारीफ की बात है कि ये काम सिर्फ दो दिन में केवल 10 हजार रुपये के खर्चे से हो गया। ये और भी कमाल की बात है कि लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना का ये प्रयास काबिले तारीफ है। जो ज़मीन पानी की कमी के कारण सूखी, बंजर पड़ी थी, वहां अनाज और सब्जियां उगाई जाएंगी। बिना केमिकल का इस्तेमाल किए natural तरीके से खेती होगी और ये ताज़ी सब्ज़ियां लद्दाख क्षेत्र में देश की रक्षा में लगे जवानों के काम आएंगी।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 02 सितंबर, 2026 का पूरा एपिसोड

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