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Rajat Sharma's Blog | ‘वंदे मातरम्’: अमित शाह ने कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया

कांग्रेस बदली नहीं है, पर तुष्टीकरण की इस बात को कबूल नहीं करना चाहती। अमित शाह ने यही बात कह कर जले पर नमक छिड़क दिया, कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया। इसीलिए कांग्रेस इतनी बेचैन और इतनी परेशान है।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

जो ‘वंदे मातरम्’ स्वतन्त्रता संग्राम का नारा था, जो ‘वंदे मातरम्’ आजादी के दीवानों का तराना था, उस पूरे राष्ट्रगीत को कांग्रेस ने गाने से इंकार कर दिया। कांग्रेस के इस रुख को गृह मंत्री अमित शाह ने देश को तोड़ने की साजिश, कांग्रेस की देशविरोधी मानसिकता का सबूत बताया। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस तुष्टीकरण के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है और देश के लोगों को कांग्रेस का असली चेहरा पहचान लेना चाहिए। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में बाकायदा प्रस्ताव पारित करके कहा गया कि भले ही संसद ने कानून बना दिया हो, भले ही राष्ट्रगीत का अपमान कानूनन जुर्म हो, लेकिन कांग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत नहीं गाया जाएगा। कांग्रेस के कार्यकर्ता वंदे मातरम् के सिर्फ दो पैरा ही गाएंगे।

मुस्लिम लीग का स्टैंड तो आजादी के पहले से साफ था। लेकिन वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पार्टी इतनी confused क्यों है, ये समझने की जरूरत है। संसद के पिछले सत्र के आखिरी दिन पूरी कांग्रेस ने खड़े होकर पूरा वंदे मातरम् गाया। रेवंत रेड्डी और सुखबीर सुक्खू दोनों कांग्रेस मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने संसद में बने कानून का पालन किया और पूरा वंदे मातरम् गाया लेकिन सोनिया गांधी ने जब कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम् गाने पर नाराज़गी जताई, तो यहीं से विवाद शुरू हुआ। अब कांग्रेस कह रही है कि 1937 में पार्टी ने फैसला किया था कि वंदे मातरम् के दो पैरा गाए जाएंगे। कांग्रेस आज भी 89 साल पहले की बात मानती है लेकिन 2026 में संसद में पूरा वंदे मातरम् गाने का जो कानून बना, उसे नहीं मानती। इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

समस्या वोट बैंक की है, वंदे मातरम् के बाद के तीन पैरे में भारत माता का वर्णन मां दुर्गा और मां लक्ष्मी के रूप में किया गया है। 1937 में मुस्लिम लीग ने उसका विरोध किया था। कांग्रेस ने तब मान लिया था। अब फिर से कांग्रेस को लगता है कि पूरा वंदे मातरम् गाया तो मुसलमान नाराज हो जाएंगे। कांग्रेस बदली नहीं है, पर तुष्टीकरण की इस बात को कबूल नहीं करना चाहती। अमित शाह ने यही बात कह कर जले पर नमक छिड़क दिया, कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया। इसीलिए कांग्रेस इतनी बेचैन और इतनी परेशान है।

चंपत राय की ज़िद ही उनकी समस्या है

अयोध्या के रामलला मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर SIT की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय फिर सक्रिय हो गए हैं। चंपत राय ने 9 पन्नों की एक चिट्ठी जारी की। इसमें चंपत राय ने चढ़ावा चोरी से जुड़ी तो कोई बात नहीं की लेकिन मंदिर की व्यवस्था से लेकर मंदिर निर्माण तक हर अहम बात बताई। चंपत राय ने ट्रस्ट के तीन बैंक खातों की कोई चेकबुक इश्यू नहीं कराई। पारदर्शिता के लिए इन खातों से सारे भुगतान ऑनलाइन किए जाते हैं। इंटरनल ऑडिट भी अलग-अलग कंपनियों से कराई जाती है।

मंदिर में दर्शन, सेवा, आरती, प्रसाद सब फ्री है, भक्तों से पूजा की कोई दक्षिणा नहीं ली जाती। चंपत राय ने इशारों इशारों में ये कहने की कोशिश की कि जब वो ट्रस्ट के महासचिव थे उस वक्त सारे नियमों का पालन हुआ। इस चिट्ठी में चंपत राय ने सबसे ज्यादा नृपेंद्र मिश्रा का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि मंदिर निर्माण से जुड़े सारे फैसले नृपेंद्र मिश्रा लेते हैं, इसमें ट्रस्ट का दखल नहीं है। चंपत राय अचानक सक्रिय नहीं हुए। असल में वो खाली नहीं बैठे थे। पिछले दो हफ्ते से अयोध्या के मठों और मंदिरों में जा कर साधु संतों से मिल रहे थे।। उनके साथ अनिल मिश्रा भी सक्रिय थे।

चंपत राय को SIT रिपोर्ट का बेताबी से इंतजार था, क्योंकि उन्हें पता था कि SIT की जांच दान पात्र की राशि चोरी करने वालों को लेकर है, प्रबंधन में लापरवाही को लेकर नहीं। तो उन्हें क्लीन चिट मिलनी ही थी। कल जो चिट्ठी उन्होंने जारी की, उसमें चंपत राय ने बताया है कि वो हिसाब किताब के कितने पक्के हैं, उनके सारे accounts ठीक हैं, audited हैं, सारे टैक्स का भुगतान है। लेकिन चंपत राय ने चढ़ावे में हुई चोरी का कहीं जिक्र नहीं किया क्योंकि वह न सिर्फ अपने आप को बेगुनाह मानते हैं बल्कि वो लोगों से ये कह रहे हैं कि उनके लोगों को बेकार में फंसाया गया। चंपत राय की यही ज़िद उनकी समस्या है। इसी कारण वह पहले परेशान हुए और अब फिर उसी रास्ते पर जा रहे हैं।

दिल्ली मास्टर प्लान क्यों कामयाब नहीं हो सकता

सरकार ने दिल्ली का मास्टर प्लान 2047 देश के सामने रखा। शहरी आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि 2047 तक दिल्ली की आबादी तीन करोड़ बीस लाख होगी, बीस साल में 80 लाख लोग बढ़ जाएंगे, इसलिए अब दिल्ली में बहुमंज़िली इमारतें बनेंगी, 40 लाख नए फ्लैट बनाए जाएंगे। एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों और लुटयन्स जोन को छोड़कर दूसरे इलाकों में भवनों की ऊंचाई की सीमा बढ़ाई जाएगी। 50 साल पुरानी इमारतों को गिरा कर नई बहुमंजिली इमारतें बनेंगी। जिन इलाकों में झुग्गियां हैं, वहां बहुमंजिली इमारतों में फ्लैट बनेंगे। ये फ्लैट झुग्गी वालों को दिए जाएंगे।

दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या ये है कि जो शहर 70 से 80 लाख लोगों के लिए  बना था, वहां इस समय ढाई करोड़ लोग रहते हैं और master plan प्लान कहता है कि ये आंकड़ा 2047 तक तीन करोड़ पार कर जाएगा। ऐसे में कितने भी फ्लैट्स बना लिए जाएं, मेट्रो को कितना भी बढ़ा दिया जाए, कितनी भी बसें चला ली जाएं, सब कम पड़ेंगे। दिल्ली में पानी बिजली जैसी बहुत सारी चीजें फ्री हैं। यहां लोगों को छोटा-मोटा रोजगार आसानी से मिल जाता है, इसीलिए देश के हर कोने से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में आकर बसते हैं।

इसीलिए शहर की हर सुविधा पर दबाव है। इन दबावों  को कम करने के लिए दिल्ली के आसपास गुड़गांव और नोएडा जैसे जो शहर बनाए गए थे, वो भी अब भीड़भाड़ वाले शहर हो गये हैं। जब तक इस समस्या का हल नहीं निकाला जाएगा, तब तक कोई मास्टर प्लान कितनी भी अच्छी नीयत से बनाया गया हो, कामयाब नहीं हो सकता।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 20 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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