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Rajat Sharma's Blog | ममता भतीजे अभिषेक को हटाने से क्यों डरती हैं?

ममता की खून पसीने से बनाई TMC बिखरने लगी पर अभिषेक बनर्जी का अहंकार कम नहीं हुआ। बस एक सवाल लोगों को परेशान कर रहा है, बुआ का भतीजे से इतना मोह क्यों है? क्या रहस्य है कि ममता पार्टी को तबाह होते देख सकती हैं पर अभिषेक को नहीं छोड़ सकती?

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

बंगाल में जो हो रहा है, उसने ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है। ममता के सबसे करीबी लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने चेतवानी दी कि ममता अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनमें से किसी एक को चुनें। अगर पार्टी में भतीजा रहेगा, तो वह पार्टी छोड़ देंगे। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सबसे सीनियर नेता 80 साल के सौगत रॉय ने कहा, वो दुखी हैं, ममता से मिलना तो दूर, अब बात होना भी मुश्किल है, ऐसे में पार्टी कैसे चलेगी? तृणमूल नेताओं पर फिर अंडों की बारिश हुई, TMC नेता के स्कूल से करोड़ों रूपए कैश मिला, जहांगीर खान की पुलिस ने सड़कों पर परेड कराई।

बंगाल से जो तस्वीरें आईं वो ममता के लिए किसी सदमे से कम नहीं हैं। ये तो साफ है कि तृणमूल कांग्रेस पर लोगों को डराने धमकाने, जबरन वसूली, तोलाबाजी टैक्स, कट मनी और भ्रष्टाचार के जो आरोप लगते थे, वो बेबुनियाद नहीं थे। अब सबके सबूत सामने आ रहे हैं और तृणमूल के जो नेता पकड़े जा रहे हैं, उनके खिलाफ जनता का गुस्सा निकल रहा है लेकिन सवाल ये है कि ये हालात बने कैसे? ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस तरह की हरकतों की छूट क्यों दी?

ये सवाल तृणमूल कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं से पूछा जा रहा है, तो जवाब एक ही मिलता है- इन सब की जड़ अभिषेक बनर्जी हैं। पार्टी में सिर्फ भतीजे की चलती थी। अभिषेक बनर्जी किसी को कुछ नहीं समझते थे। कल्याण बनर्जी की आवाज़ ममता को सोने नहीं देगी। 30 दिन से जो कल्याण बनर्जी चिल्ला-चिल्ला कर ममता का बचाव कर रहे थे, आज उनकी बात सुनकर लगा, इतना सब हो गया, 80 में से 64 विधायक, लोकसभा में 19 सांसद साथ छोड़ गए, हर कोई अभिषेक को इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है। किसी ने ममता बनर्जी पर आरोप नहीं लगाया।

सबके सब एक ही बात कहते हैं, अभिषेक ने लूट मचाई, गुंडों की फौज पाली, चुनाव में टिकट बेचे, पर डर के मारे कोई बोलता नहीं था। पार्टी के भीतर बोलते तो निकाल दिए जाते। बाहर बोलते तो केस हो जाता। अब डर खत्म हो गया। दरवाजा खुल गया। ममता की खून पसीने से बनाई TMC बिखरने लगी पर अभिषेक बनर्जी का अहंकार कम नहीं हुआ। बस एक सवाल लोगों को परेशान कर रहा है, बुआ का भतीजे से इतना मोह क्यों है? क्या रहस्य है कि ममता पार्टी को तबाह होते देख सकती हैं पर अभिषेक को नहीं छोड़ सकती?

राजस्थान: क्यों कांग्रेस सचिन को कमान सौंपेगी?

राजस्थान में राजेश पायलट की पुण्यतिथि के मौके पर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जुबानी जंग फिर शुरू हो गई। गहलोत बार बार ये याद दिला रहे हैं कि 2020 में सचिन पायलट ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की थी, पार्टी आला कमान के खिलाफ बगावत की थी और उन्होंने उस वक्त कांग्रेस का झंडा मजबूती से संभाला था। वैसे तो गहलोत ने सचिन पायलट को अपने बेटे जैसा बताया, कहा कि वो चाहते हैं, सचिन आगे बढ़ें लेकिन साथ में ये जोड़ा कि उन्हें राजनीति में अभी बहुत कुछ सीखना है।

सचिन पायलट ने जवाब दिया, कहा, गहलोत जी बड़े हैं, बुजुर्ग हैं, उन्हें अपना बेटा बताते हैं, ये अच्छी बात है लेकिन सिर्फ बेटा कहने से क्या होगा? गहलोत जी व्यक्तिगत दुश्मनी भूलाएं, बड़प्पन दिखाएं, तभी कांग्रेस का भला होगा। सचिन पायलट ने संयमित भाषा रखते हुए गहलोत पर तीखा कटाक्ष किया तो गहलोत फिर सामने आए। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वो सचिन पायलट को नीचा नहीं दिखाना चाहते थे, बस सच बताना चाहते थे, उनका मकसद पूरा हो गया, अब बात खत्म।

अशोक गहलोत और सचिन पायलट का झगड़ा पुराना है। चार साल पहले, सितम्बर 2022 में आला कमान ने गहलोत को हटाकर पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया था, अशोक गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर दिल्ली लाया जाना था, लेकिन ऐन मौके पर विधायक मीटिंग में नहीं पहुंचे, प्लान फेल हो गया। गहलोत अब ये कह रहे हैं कि बगावत उन्होंने नहीं कराई थी, विधायक सचिन के खिलाफ थे। पर ये सब जानते हैं कि जो विधायक मीटिंग में नहीं आए थे, वो गहलोत के समर्थक थे।

अब ये बात फिर से उठी है क्योंकि कांग्रेस राजस्थान की कमान सचिन पायलट के हाथ में देना चाहती है। ज़ाहिर है ये फैसला गहलोत को बिल्कुल पसंद नहीं आएगा। इसलिए वो याद दिला रहे हैं कि कांग्रेस के लोकल नेता सचिन को पसंद नहीं करते। लेकिन ये भी सच है कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सचिन ने बेहतरीन काम किया था। सचिन राजेश पायलट के बेटे हैं, जिनकी 11 जून, 2000 को सड़क हादसे में मौत हुई थी। राजेश पायलट बहुत हिम्मत वाले नेता थे। उनकी ये क्वालिटी सचिन पायलट में भी कूट-कूटकर भरी है। वह राजस्थान के लिए अच्छे लीडर साबित होंगे। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 11 जून, 2026 का पूरा एपिसोड

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