Cockroach Janta Party की call पर दिल्ली और मुंबई में बुलाया गया 'तिरंगा मार्च' पूरी तरह flop हो गया। दिल्ली का कनॉट प्लेस हो या मुंबई का आज़ाद मैदान हर जगह गिने-चुने लोग ही नज़र आए। दिल्ली में जो लोग मार्च करते दिखे, उनमें से ज़्यादातर लोग या तो left parties के student wing से थे या फिर आम आदमी पार्टी के समर्थक थे। दिल्ली में मेट्रो खुली रही, इंटरनेट बंद नहीं किया गया, दुकानें भी खुली। सिर्फ कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क बंद रखा गया था।
CJP का 'तिरंगा मार्च' flop क्यों हुआ? दरअसल, अब पुलिस को ये समझ आ गया है कि Cockroach Janta Party का अपना कोई जनाधार नहीं है। इसका प्रभाव सोशल मीडिया तक सीमित है। दूसरी बात ये कि NEET पेपर लीक पर छात्र आंदोलन की तरह ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट का कोई emotional connect नहीं है।
CJP दो संगठनों पर समर्थन के लिए निर्भर थी, आम आदमी पार्टी और left parties के student wing। कल इन पार्टियों की कोशिश को भी पुलिस ने नाकाम कर दिया। हालांकि, इसके लिए पुलिस को काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ी।
दरअसल, ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सब पार्टियों ने मिलकर जो माहौल बनाया था, उसकी हवा दो लोगों ने निकाल दी। नेहा बोरा ने बांग्लादेश की तरह तख़्ता पलटने की बात करके और प्रशांत भूषण ने ये कहकर कि मक़सद SIR नहीं, सरकार को पलटना है। कांग्रेस ने अच्छा किया इस विचार का समर्थन नहीं किया। इस तरह की मुहिम को पब्लिक का समर्थन कैसे मिल सकता है? लोग इतना तो समझते हैं कि देश सर्वोपरि है।
दिल्ली के ट्रेडर्स प्रोटेस्ट के खिलाफ क्यों?
दिल्ली के ट्रेडर्स एसोशिएशन्स ने प्रोटेस्ट करने वालों का विरोध किया और पुलिस को सपोर्ट किया। पिछले 15 दिन में कल पहली बार प्रोटेस्ट के दौरान कनॉट प्लेस में दुकानें खुली थीं, रेस्त्रां खुले थे, आम जनता के आने जाने पर पाबंदी नहीं थी। कल पहली बार कनाट प्लेस में लोग नारे लगाते दिखाई दिए 'दिल्ली पुलिस आगे बढ़ो..हम तुम्हारे साथ हैं'। इनमें ज़्यादातर वो लोग हैं, जिनकी कनाट प्लेस में दुकानें और रेस्त्रां हैं। इनका कहना है कि 20-25 लोग भी इकट्ठा होकर शोर मचाते हैं, दुकानें बंद करनी पड़ती हैं, तो करोड़ों का नुक़सान होता है।
नई दिल्ली Traders Association ने कहा कि पूरे नई दिल्ली इलाके में प्रोटेस्ट की वजह से 100 करोड़ रुपये रोज़ का नुक़सान हो रहा है। इसीलिए इन दुकानदारों ने पुलिस को support किया। protest होना चाहिए पर अराजकता से बच कर। सरकार की आलोचना होनी चाहिए पर गालियों को अलग रख कर। अगर प्रदर्शन करने वालों के अधिकार हैं तो आम नागरिक के भी अधिकार है। आम जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
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