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Rajat Sharma's Blog | कांग्रेस चुनाव क्यों हारी? वोट चोरी या काम चोरी?

कांग्रेस के लिए ज्ञानेश कुमार तो राजनीति का एक मोहरा हैं। कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना है। इसीलिए 'वोट चोरी' के कारण कांग्रेस चुनाव हारी, ये आरोप जनता के गले नहीं उतरता। ये राजनीतिक दलों के लिए बहाना हो सकता है, अपनी हार को छुपाने का पर्दा तो हो सकता है, पर पब्लिक इस पर भरोसा करेगी, ये मुश्किल लगता है।

Rajat sharma, INDIA TV- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

संसद मार्ग पर कल दिन भर के ड्रामा के बाद प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विरोधी दलों के सांसदों के लिए आज दिल्ली में लंच दिया। Chief Election Commissioner के बारे में आगे की रणनीति पर बातचीत की। कल अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी और अन्य विपक्षी सांसदों ने मार्च निकाला, पुलिस उन्हें बसों में ले गई और बाद में छोड़ दिया। लेकिन राहुल, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के कई नेता आकाशवाणी भवन परिसर में घुस गये और बरगद के पेड़ के नीचे 8 घंटे तक धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि तीनों चुनाव आयुक्तों से 240 विपक्षी सांसद मिलना चाहते हैं। चुनाव आयोग से कहा गया कि पार्लियामेंट एनेक्सी में ये मुलाकात हो। तीनों चुनाव आयुक्तों ने परिपाटी और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए इंकार कर दिया, कहा कि वे एक शिष्टमंडल से ज्ञापन लेने को तैयार हैं।

राहुल और प्रियंका गांधी का धरना जारी रहा। आकाशवाणी भवन में दिनभर डेरा डाले रहे, रात भर हंगामे का इंतज़ाम था, गद्दे, तकिए, चादर सब का बंदोबस्त हो गया था, खाना-पीना भी चल रहा था और ज़िद ये थी कि जब तक तीनों चुनाव आयुक्तों से मुलाक़ात नहीं होती तब तक धरना जारी रहेगा। कांग्रेस के नेता इसे 'धप्पा पॉलिटिक्स' बता रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने तब धावा बोला, राहुल और प्रियंका समेत कांग्रेस के नेताओं को हिरासत में लिया और किंग्सवे कैंप थाने ले गई। इस तरह रात को ड्रामा खत्म हुआ।  पुलिस ने 15 मिनट के अंदर धरना खत्म कर दिया।

जिन ज्ञानेश कुमार को राहुल गांधी BJP का एजेंट और लोकतंत्र का हत्यारा बता रहे हैं, उनसे मिलने को राहुल इतने बेताब क्यों थे ? और अगर मिलना ही था तो appointment क्यों नहीं मांगी? इसलिए ज्ञानेश कुमार से मिलने की बात तो बहाना था, राहुल को हंगामा खड़ा करना था, ये impression create करना था कि वो बार-बार चुनाव इसलिए हारे क्योंकि ज्ञानेश कुमार ने BJP की मदद की। लेकिन ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उससे पहले कांग्रेस तीन लोकसभा चुनाव हार चुकी थी, अनेक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हो चुकी थी।

वैसे भी ज्ञानेश कुमार अगले लोकसभा चुनाव से पहले retire हो जाएंगे, इसलिए कांग्रेस के लिए ज्ञानेश कुमार तो राजनीति का एक मोहरा हैं। कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना है। इसीलिए 'वोट चोरी' के कारण कांग्रेस चुनाव हारी, ये आरोप जनता के गले नहीं उतरता। ये राजनीतिक दलों के लिए बहाना हो सकता है, अपनी हार को छुपाने का पर्दा तो हो सकता है, पर पब्लिक इस पर भरोसा करेगी, ये मुश्किल लगता है।

ज्ञानेश विरोधी दलों का विश्वास क्यों नहीं जीत पाए?

ये सही है कि चुनाव आयोग के काम करने के तरीक़े में कई ख़ामियां हैं। विरोधी दलों के नेता वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। इसे लेकर तीन चार सवाल पूछे जा रहे हैं। पहला आरोप ये है कि ज्ञानेश कुमार ने आयोग के दूसरे सदस्यों की बात नहीं सुनी, मनमाने तरीके से SIR को लेकर फैसले किए। दूसरा आरोप फॉर्म-6 को लेकर है। आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने नौजवानों का वोट कटाने के लिए फॉर्म-6 में बदलाव किया जो गैरकानूनी है। तीसरा आरोप ये है कि तेरह करोड़ वोटर्स के नाम बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए काटे गए।

इन सारे सवालों के जवाब बीजेपी की तरफ से संबित पात्र ने सिलसिलेवार तरीके से दिए। संबित पात्र ने कहा कि ज्ञानेश कुमार जब CEC बने, उससे पहले ही कांग्रेस हार रही थी। जिन सवालों के जवाब कल BJP ने दिए, उनके उत्तर दरअसल मुख्य चुनाव आयुक्त को देने चाहिए थे और बहुत पहले दे देने चाहिए थे। चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि न केवल निष्पक्ष चुनाव कराए, बल्कि ये दिखाए कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हुए, SIR कराना ग़लत नहीं है, जो लोग दुनिया से चले गए या कहीं shift हो गए, उनके वोट  काटना भी ग़लत नहीं है। ये एक natural democratic process है जिसकी मांग विरोधी दल भी समय समय पर करते रहे हैं।  लेकिन ये काम करते समय सारे राजनीतिक दलों को इस process के बारे में विश्वास में लेना,  उन्हें convince करना एक स्वस्थ परंपरा है। इसका निर्वाह होना चाहिए। लेकिन ज्ञानेश कुमार इसमें चूक गए। सिर्फ़ love letter जारी करना काफ़ी नहीं होता। लोकतंत्र में प्यार झलकना भी ज़रूरी होता है। वोटर्स लिस्ट का प्याला भरा हो, दुरुस्त हो, इतना काफ़ी नहीं है। विश्वास छलकना भी ज़रूरी होता है।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 06 अक्टूबर, 2026 का पूरा एपिसोड

 

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