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Rajat Sharma's Blog: पुलिस ने CJP को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए इतनी सख़्ती क्यों की?

इंटेलीजेंस एजेंसियों की सूचना है कि प्रोटेस्ट करने वालों का प्लान सेंट्रल दिल्ली को seize करने का है, पुलिस को provoke करने का है, Internet के ज़रिए माहौल बनाने का है। इसी से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों पर रोकने का प्लान है।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

सबके मन में सवाल है कि पुलिस ने Cockroach Janta Party के प्रोटेस्ट को रोकने के लिए इतनी सख़्ती क्यों की? क्या पुलिस को कोई डर है? असल में पुलिस इस बार पहले जैसी ग़लती नहीं करना चाहती। पिछली बार उसने CJP को एक दिन के लिए परमिशन दी थी, पर 17 दिन तक धरना प्रदर्शन चलता रहा। दूसरी बात, तब मुद्दा छात्रों से जुड़ा था, Emotional था। इस बार मामला राजनीतिक है। इसमें आम पब्लिक का emotion नहीं है। ज़्यादा दिलचस्पी राजनीतिक पार्टियों की है, पर सबके पास कार्यकर्ता हैं। इसमें YouTubers की बड़ी भूमिका है।

इंटेलीजेंस एजेंसियों की सूचना है कि प्रोटेस्ट करने वालों का प्लान सेंट्रल दिल्ली को seize करने का है, पुलिस को provoke करने का है, Internet के ज़रिए माहौल बनाने का है। इसी से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों पर रोकने का प्लान है। पुलिस ने कुछ छुपाया नहीं है। कहां-कहां रोक है, कहां-कहां पाबंदी है, ये सब पब्लिक को खुलकर बताया है। 

पिछली बार बड़ी संख्या में ऐसे लोग जंतर-मंतर पहुंच गए थे जिनका criminal record था। ऐसे लोगों को भी दूर रखने की तैयारी है क्योंकि इसी तरह के लोगों ने पुलिस पर हमला किया था, पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की थी और सार्वजनिक संपत्ति  को नुक़सान पहुंचाया था। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा नुक़सान उन लोगों का है, जिनका न protest से लेना-देना है, न राजनीति से। ट्रेन रुकें, मेट्रो बंद हों, सड़क पर barricades लगें, सबसे ज़्यादा परेशानी आम आदमी को होती है जो अपने काम के लिए बाहर जाता है।

भारत के हित में कौन? एलन मस्क या मुकेश अम्बानी?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने SpaceX के CEO और Starlink के मालिक एलन मस्क को welcome कहकर अच्छा नहीं किया। आजकल हर देश अपने उद्योगपति का support करता है, अपने देश के businessman को promote करता है। अगर उन्हें मोदी पसंद नहीं तो राजनीतिक विरोध कर सकते हैं और कर ही रहे हैं, लेकिन मोदी के चक्कर में देश को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। 

जहां तक मुकेश अंबानी का सवाल है, मुझे 1980 का वो दशक याद है जब Indian Express की headline थी 'Indira Gandhi as commerce'। Indian Express ने उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ अभियान चलाया था और उसमें धीरूभाई अंबानी को बहाना बनाया था। कहा गया था कि उस समय की सरकार ने अंबानी के लिए tailor-made policies बनाई। बाद में कुछ भी साबित नहीं हुआ।

सिर्फ़ एक-दो आंकड़ों से अंदाज़ा हो जाएगा कि मुकेश अंबानी का रोल क्या है। पिछले पांच साल में Reliance Industries ने taxes, duties और levies के माध्यम से सरकार को 9.78 लाख करोड़ रुपये (100 अरब dollars) दिए हैं, देश में अलग-अलग projects में 6.48 लाख करोड़ रुपये invest किए हैं। मुकेश अंबानी की कंपनियों ने क़रीब 4 लाख लोगों को नौकरियां दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने मुकेश अंबानी को अमेरिका में refinery लगाने के लिए red carpet बिछाकर invite किया और हम अपने businessman को crony capitalist कह रहे हैं।

एक बार सोचना चाहिए कि इसमें किसका नुक़सान है? जनता का? jobs का? विकास का? देश का? ये भी सोचना चाहिए कि क्या मुकेश अंबानी के मुक़ाबले एलन मस्क  को support करना ठीक होगा?

ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इतने उतावले क्यों?

कभी कभी ये सोचकर हैरानी होती है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Nobel Peace Prize के लिए इतने बेताब क्यों हैं ? उन्हें बार बार ये जताने की क्या ज़रूरत कि उन्होंने कितनी जंग रुकवाई? उन्होंने ये क्यों कहा अगर उन्हें Nobel Peace Prize नहीं मिला तो इस award की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे?

ट्रंप क्या पाकिस्तान पर इसीलिए इतने मेहरबान हो गए कि शहबाज़ शरीफ़ ने कई बार उन्हें Nobel Peace Prize के लिए nominate किया। मुझे तो लगता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति होना अपने आप में इतनी बड़ी बात है, उसके सामने Nobel Peace Prize क्या है? लेकिन तो भी राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार अपने आप को इस शांति पुरस्कार का हकदार बताते हैं, ये बात किसी के गले नहीं उतरती।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 09 अक्टूबर 2026 का पूरा एपिसोड

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