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Rajat Sharma's Blog | कांग्रेस को पाकिस्तान की इतनी चिंता क्यों है?

सरकार पहलगाम नरसंहार से जुड़े असली सवालों के जबाव देने से बच रही है। लेकिन कांग्रेस के ही तमाम नेता राहुल गांधी और जयराम रमेश की इस लाइन से इत्तेफाक नहीं रखते। कांग्रेस के नेताओं को इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि पाकिस्तान उनके बयानों का कैसे इस्तेमाल करेगा।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

हैरानी की बात है कि कांग्रेस के नेता 33 देशों को सांसदों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने से खुश नहीं हैं। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विदेशों में ऐसे प्रतिनिधिमंडल भेजकर कोई फायदा नहीं होने वाला है, ये मोदी सरकार की PR एक्सरसाइज है, सरकार पहलगाम नरसंहार से जुड़े असली सवालों के जबाव देने से बच रही है। लेकिन कांग्रेस के ही तमाम नेता राहुल गांधी और जयराम रमेश की इस लाइन से इत्तेफाक नहीं रखते। शशि थरूर, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी और सलमान खुर्शीद, ये सारे कांग्रेस के अनुभवी नेता हैं। प्रतिनिधमंडलों के साथ गये हैं। कांग्रेस के नेताओं को इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि पाकिस्तान उनके बयानों का कैसे इस्तेमाल करेगा। एक और बयान बहादुर सामने आए। महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने 15-15 हजार रुपये के चीन मे बने ड्रोन भेजे और इन ड्रोन्स को मार गिराने के लिए हमने 15 -15 लाख रुपये की बेशकीमती मिसाइलें दागीं। विजय वडेट्टीवार ने कहा कि भारत पाकिस्तान और चीन की साजिश में फंस गया, अब सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने ऑपरेशन सिंदूर को एक “छिटपुट लड़ाई” करार दिया।

इन सारे बयानों को सुनने के बाद मेरा ये मानना है कि अच्छा होता मल्लिकार्जुन खरगे पाकिस्तान से पूछते कि तुम्हारे 100 आतंकवादी मारे गए, पर ये छिटपुट लड़ाई थी, ज्यादा चोट तो नहीं लगी? वो पाकिस्तान से पूछते कि आतंकवादियों के जनाजे में फौजी अफसर मातम मनाने गए थे, उनके ज्यादा आंसू तो खर्च नहीं हुए? कांग्रेस के महाराष्ट्र के नेता आसिम मुनीर से पूछते कि तुमने 800 ड्रोन भेजे, एक भी निशाने पर नहीं लगा, क्या इसमें ज्यादा खर्चा तो नहीं हो गया? एक बार ये भी पूछ लेते कि तुम्हारे 11 एयरबेस को इंडियन एयरफोर्स ने तबाह कर दिया, तुम्हारे कितने प्लेन गिरे, कितने का नुकसान हुआ? अच्छा तो ये होता कि ये नेता शहबाज शरीफ से पूछते कि जिन जनरल ने पाकिस्तान का इतना भारी नुकसान किया, करोड़ों रुपये की मिसाइल बर्बाद कर दीं, उसे तुमने फील्ड मार्शल किसके प्रेशर में आकर बनाया? क्या इसके लिए ट्रंप का फोन आया?

पाकिस्तान से एक बार पूछते कि तुम्हारे DGMO ने फोन करके युद्ध क्यों रुकवाया? सीजफायर क्यों करवाया? क्या तुम्हारे एटम  बम भारत की missiles के range में तो नहीं आ गए थे? लेकिन कांग्रेस के नेता तो उल्टा हमारी सेना पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पूछ रहे हैं कि तुम्हारे कितने प्लेन गिरे? हमारी फौज से पूछ रहे हैं कि तुमने पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने में लाखों की मिसाइलें क्यों चलाई? अब कोई पूछे  कि क्या युद्ध के मैदान में फौज बही खाता लेकर जाती है? पैसे गिन-गिन कर हथियार चलाती है? अगर पाकिस्तान को हराने के लिए, आतंकवाद को खत्म करने के लिए करोड़ों भी खर्च करने पड़े तो इस देश में किसी को तकलीफ नहीं होगी।

क्या जनरल मुनीर पाकिस्तान को बचा पाएंगे?

पाकिस्तान में जनरल आसिम मुनीर के फील्ड मार्शल बनने के बाद शहबाज शरीफ की सरकार के अस्तित्व को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। क्या शहबाज शरीफ की सरकार के दिन गिनती के हैं? क्या फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मार्शल लॉ लगा देंगे? शहबाज शरीफ को कुर्सी से हटा देंगे? पाकिस्तान में इस तरह की आवाजें हर तरफ सुनाई दे रही हैं। लोग पाकिस्तान के इतिहास की याद दिलाते हैं, जो इसी तरह के सत्ता परिवर्तन की तरफ इशारा करती है।

ज्यादातर लोग मानते हैं कि जनरल मुनीर ने अपना प्रमोशन खुद कर लिया। कैबिनेट और प्रधानमंत्री उनके हाथ की कटपुतली हैं। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि जनरल मुनीर पर्दे के पीछे से सरकार चलाते रहेंगे, फौजी शासन लगाने से बचेंगे क्योंकि फौजी सरकार को इमरान खान की पार्टी से चुनौती मिल सकती है। पाकिस्तान में हमेशा से फौज ही सरकार चलाती है। जो एक बार फील्ड मार्शल बन गया, उसे हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। इस ओहदे पर पहुंचने से पाकिस्तान में आसिम मुनीर की ताकत बढ़ गई है।

पाकिस्तान में फील्ड मार्शल पर किसी अदालत में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यानी आसिम मुनीर अब कुछ भी करें, उन पर मुकदमा नहीं चलेगा। वह पाकिस्तान के कानून से ऊपर हो गए हैं। पाकिस्तान के 78 साल के इतिहास में फील्ड मार्शल बनने वाले आसिम मुनीर दूसरे शख्स हैं। इससे पहले 1959 में सरकार का तख़्तापलट करके सत्ता हथियाने वाले अयूब ख़ान ने खुद को फील्ड मार्शल की रैंक दे दी थी।

आर्मी चीफ के तौर पर आसिम मुनीर का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म होने वाला है लेकिन ये तय है कि मुनीर को एक्सटेंशन मिलेगा और वो 2027 तक पाकिस्तानी फौज के चीफ बने रहेंगे। जेल में कैद इमरान खान की बहन अलीमा ख़ान ने कहा कि शहबाज़ शरीफ़ को चाहिए था कि वो आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल की बजाय पाकिस्तान का बादशाह घोषित कर देते।

जनरल आसिम मुनीर ने जो हासिल किया वो दुनिया में आज तक किसी आर्मी अफसर को नहीं मिला। भारत ने पाकिस्तान में घुसकर 9 आतंकी अड्डे तबाह कर दिए, मुनीर को इसके लिए मेडल मिला। पाकिस्तान के 11 एयरबेस भारतीय वायु सेना ने बर्बाद कर दिए, इसके लिए मुनीर को प्रमोशन मिला। पाकिस्तान का सारा एयर डिफेंस सिस्टम नेस्तनाबूद हो गया, इसके लिए मुनीर को एक्सटेंशन मिला। पाकिस्तान के 800 ड्रोन हवा में मार गिराए गए, इसे मुनीर का जीत घोषित कर दी गई। मुनीर की फौज के सैकड़ों सैनिक  मारे गए, इसके लिए उन्हें प्रमोशन मिला। जनरल मुनीर ने DGMO से फोन करवाकर सीजफायर की गुहार लगाई, पाकिस्तान को तबाही से बचा लिया, इनाम में उन्हें फील्ड मार्शल बनाया गया।

इतनी सारी विफलताओं के बाद हर फ्रंट पर फेल होने के बाद, इतना बड़ा प्रमोशन सिर्फ पाकिस्तान में ही मिल सकता है। क्योंकि यहां जनरल खुद अपने आप को प्रमोट करते हैं। अब सिर्फ इंतजार इस बात का है कि फील्ड मार्शल बनने के बाद जनरल मुनीर अपने आप को किस पद पर प्रमोट करेंगे? वो शहबाज शरीफ को हटाकर सत्ता कब हाथ में लेंगे? क्योंकि शहबाज शरीफ तो अब आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के ओहदे से नहीं हटा सकते, लेकिन आसिम मुनीर जब चाहें शहबाज शरीफ को वजीरे आज़म की कुर्सी से पटक सकते हैं। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 21 मई, 2025 का पूरा एपिसोड

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