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Rajat Sharma's Blog | दुनिया की नज़रें इस वक्त मोदी, शी जिनपिंग, पुतिन पर

शी जिनपिंग के साथ चीनी अधिकारियों और उद्योगपतियों का एक बड़ा दल भारत आया है। मोदी ने कल रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बातचीत की थी। मोदी ने पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति को साफ बता दिया है कि आपसी व्यापार बढाने का फ़ायदा तभी होगा जब शान्ति होगी।

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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली पहुंचे। आज शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनकी महत्वपूर्ण वार्ता होगी। दोनों देश आपसी व्यापार और निवेश के मामले में कदम आगे बढ़ाना चाहते हैं। शी जिनपिंग के साथ चीनी अधिकारियों और उद्योगपतियों का एक बड़ा दल भारत आया है। मोदी ने कल रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बातचीत की थी। मोदी ने पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति को साफ बता दिया है कि आपसी व्यापार बढाने का फ़ायदा तभी होगा जब शान्ति होगी, इसलिए पुतिन और पेज़ेश्कियान दोनों को यूक्रेन और मध्यपूर्व जंग खत्म करने के बारे गंभीरता से सोचना चाहिए।

पुतिन और पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर जंग को बढावा देने का आरोप लगाया। मोदी ने कहा कि कारोबार के रास्ते सुरक्षित हों, जहाजों की आवाजाही में कोई रूकावट न हो, इसका सभी देश ख़्याल रखें, तभी सबकी तरक़्क़ी होगी। पेज़ेश्कियान ने ईरान की मजबूरियां गिनाईं, कहा ईरान को निशाना बनाया जा रहा है। पेज़ेश्कियान ने इशारों इशारों में कहा कि अगर डॉलर का वर्चस्व ख़त्म हो जाए तो अमेरिका की दादागिरी ख़त्म हो जाएगी। इसलिए BRICS देशों को अपनी-अपनी मुद्राओं में व्यापार करना चाहिए। मोदी और पुतिन की मुलाकात पुराने रिश्तों के लिहाज़ से अहम है। रक्षा, ऊर्जा, और space जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर दुनिया में शांति नहीं होगी तो ये कारोबार, ये व्यापारिक रिश्ते किस काम के ?

आज पूरी दुनिया में अनिश्चितता है, जो टकराव चल रहा है, उसमें अमेरिका के साथ रूस भी बराबर के partner है। पुतिन ने यूक्रेन से युद्ध शुरू किया था, ट्रंप ने ईरान पर बम बरसाए। दोनों नेता शायद ये नहीं जानते थे कि युद्ध शुरू करना आसान था, पर इसे ख़त्म करना इतना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से एक बार फिर dialogue और diplomacy की बात की। साफ़-साफ़ कहा कि अगर रूस और यूक्रेन चाहे तो भारत शांति प्रयासों में मदद करने को तैयार है।

भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। युद्ध चाहे रूस और यूक्रेन का हो, या अमेरिका और ईरान का, भारत को बहुत आर्थिक नुक़सान हुआ है। ये भारत की अर्थव्यवस्था की मज़बूती है कि इस भंवर में भी मोदी ने नैया को डूबने से बचा लिया।मोदी ने कल जो सुझाव दिए, वो अर्थव्यवस्था और व्यापार को मज़बूत करने के इरादे से दिए, लेकिन रूस, चीन और ईरान का एजेंडा थोड़ा अलग है। ये तीनों अमेरिका के सताए हुए हैं। वे चाहते हैं कि BRICS अमेरिका के ख़िलाफ़ एक ताक़त बने, डॉलर का वर्चस्व कम करने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था बने। लेकिन अमेरिका का साथ देने वाले सऊदी अरब और UAE इससे सहमत नहीं होंगे।भारत भी नहीं चाहेगा कि BRICS को एक anti-West forum के रूप में देखा जाए। इसीलिए मोदी का फोकस विश्व व्यापार की समस्याओं को सुलझाने पर था। BRICS सम्मेलन में इसी बात की कोशिश होगी कि कैसे सभी सदस्य देश कैसे एक दूसरे को आगे बढ़ने में मदद कर सकें।  

क्या AI इंसानों के काबू से बाहर हो जाएगा?

मध्य पूर्व में चल रही जंग को लेकर कल एक खुलासा हुआ। AI research firm Anthropic की एक report में दावा किया गया  कि हूती विद्रोही  AI की मदद से missiles और rocket बनाने की कोशिश कर रहे थे। यमन में मौजूद Weapons Engineering Cell ने Claude Code के इस्तेमाल से तीन missile प्रोग्राम्स पर काम किया। इनमें एक guided rocket, 2000 किलोमीटर से ज्यादा की range वाली ballistic missile और 'R-2000' नाम का एक missile set शामिल है। ये खुलासा पूरी दुनिया को tension में डालने वाला है।

Anthropic की रिपोर्ट में बताया गया है कि AI जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे AI के गलत इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ गई है। आने वाले वक्त में AI इंसानों के अस्तित्व के लिए भी सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकता है। Anthropic के alignment और safety researcher इवान हुबिंगर का दावा है कि अगले 10 साल में AI इंसानी सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, चेतावनी की मुख्य वजह  'AI alignment problem' है जिसका मतलब ये है कि researchers अभी तक ऐसा कोई foolproof तरीका नहीं खोज पाए हैं, जो इस बात की 100% गारंटी दे सके कि AI सिस्टम हमेशा मानवीय मूल्यों, नैतिकता, और  सुरक्षा निर्देशों का पालन करेंगे। Anthropic की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक intelligent हो रहे हैं, वे human control से बाहर होकर खुद फैसले लेने लगेंगे और मानव जाति के अस्तित्व के खिलाफ जा सकते हैं। 

ये बात सही है कि AI के लिए इस समय के security systems नाकाफ़ी हैं। Cyber security experts को डर है कि अगर AI इंसान के क़ाबू से बाहर हो गया तो क्या होगा? क्या बेक़ाबू AI मानवों  के लिए ख़तरा बन जाएगा? ये बिल्कुल वैसा ही विचार है जैसा हम science fiction फिल्मों में देखते हैं, जहां एक scientist robot बनाता है और फिर वो robot हज़ारों robots बनाकर अपनी एक फ़ौज खड़ी कर लेता है।

लेकिन अब बात किसी सिनेमा की, किसी screenplay की नहीं है। अगर AI बिना मानव के आदेश  के अपने आप फ़ैसले लेने लगे तो ये वाक़ई खतरनाक हो सकता है। अभी हमें इक्का-दुक्का मामले देखने को मिले हैं। कहीं AI ने नक़ली पहचान बना ली कहीं ख़ुद ही data delete कर दिया, कहीं किसी दूसरे AI system पर वार किया, तो क्या होगा? AI experts को लगता है कि अगर अभी क़दम नहीं उठाए गए तो 10 साल में ये वाक़ई नियंत्रण से बाहर जा सकता है।

पंजाब में नशे का क़हर कब खत्म होगा?

पंजाब में चुनाव से पहले ड्रग्स बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। बीजेपी पूरे राज्य में 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा'निकालेगी। 18 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन इस कैंपेन की शुरुआत पठानकोट से करेंगे। 30 सितंबर को अमित शाह की मौजूदगी में जालंधर में इसका समापन होगा।

नशे से अगर कोई राज्य सबसे ज़्यादा त्रस्त है तो वो पंजाब है। पिछले साल पूरे देश में जितनी Heroin ज़ब्त की गई, उसका 44.5 प्रतिशत पंजाब में पकड़ा गया। अब पंजाब में synthetic drugs तेज़ी से बढ़ने लगी है। इनकी growth 400% से ज़्यादा है। NDPS कानून के सबसे ज़्यादा cases पंजाब में होते हैं। Drugs के चक्कर में सबसे ज़्यादा गिरफ्तारियां पंजाब में होती हैं। 

नशे के कारण परिवार के परिवार, गांव के गांव बर्बाद हो गए। पंजाब ने नशे के कारण नौजवानों को तड़प-तड़प कर मरते देखा है, बच्चों को स्कूल छोड़कर भागते देखा है, नौजवानों की नौकरियां छूटते देखा है और नशे के चक्कर में ज़मीन जायदाद बिकते देखा है। हर सरकार कहती है कि वो नशे के ख़िलाफ़ युद्ध स्तर पर लड़ेगी लेकिन अबतक कोई ख़ास असर दिखाई नहीं दिया। 

अब चुनाव का मौक़ा है। सारी पार्टियां नशे के ज़हर से लोगों को निजात दिलाने की कसम खाएंगी लेकिन ये ख़तरा अब विकराल रूप ले चुका है। होना तो ये चाहिए कि इस बार चुनाव से पहले सारी पार्टियां जनता को ये बताएं कि वो नशे के सौदागरों से लड़ने के लिए क्या कदम उठाएंगी। Drugs माफ़िया से लड़ने के मामले में अमित शाह का रिकॉर्ड अच्छा है। देशभर में record मात्रा में drugs बरामद की गई हैं। विदेशों से drug माफ़िया को पकड़ कर भारत लाया गया है। अब इसी तरह का एक्शन पंजाब में भी होना चाहिए। 

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 11 सितंबर, 2026 का पूरा एपिसोड

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