कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फिर छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर सरकार पर निशाना साधा। संसद मार्ग थाने में दिन भर ड्रामा किया। राहुल गांधी उस छात्र साहिल लोचब को उसकी मां के साथ लेकर घर से निकले, जो जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के दौरान पैलेट गन के छर्रों से घायल हुआ था।
राहुल की मांग थी कि इस मामले में FIR दर्ज की जाय। सात घंटे के ड्रामे के बाद संसद मार्ग थाने में अज्ञात व्यक्तिय़ों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की। राहुल ने पुलिस से कहा कि साहिल लोचब की आंख की रोशनी जाने वाली है, दिल के पास कुछ छर्रे अभी भी फंसे हैं। FIR दर्ज होने के बाद राहुल ने इसकी कॉपी को जीत की ट्रॉफी की तरह लहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह ने पुलिस अफसरों को FIR करने से रोका था।
मुझे हैरानी है कि पुलिस को एक पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज कराने में क्या समस्या थी? इसमें इतनी देर लगाने की क्या जरूरत थी? राहुल गांधी को एक अच्छा खासा मुद्दा देने की क्या ज़रूरत थी?
जंतर मंतर पर pellet gun का इस्तेमाल तो हुआ था। जिसे छर्रे लगे वो राहुल गांधी के साथ कई बार दिखाई दिया है। Pellet gun किसने चलाई? क्यों चलाई? किसने आदेश दिया? ये सब जांच में पता चलेगा लेकिन अब तक तो जांच हो जानी चाहिए थी। ये कोई इतना बड़ा सीक्रेट नहीं है जिसका पता न लगाया जा सके। FIR दर्ज कराने में देरी ने राहुल गांधी को मौका दिया और FIR दर्ज होने के बाद उन्हें इसको अपनी भारी जीत बताने का अवसर दिया। ठीक उसी तरह जैसे सोनिया गांधी ने बीजेपी को वंदे मातरम् का मुद्दा थाली में परोस कर दे दिया।
हम जापानियों से अनुशासन और धैर्य सीखें
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान से आये छात्रों से मुलाकात की। उनके साथ सेल्फी ली, हंसी मजाक किया, ठहाके लगाए और तोहफे भी दिए। इस कार्यक्रम में जापान के यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी भी मौजूद थे। उनके साथ जापान से 13 छात्र आय़े हुए थे। योगी ने जापानी भाषा में इन बच्चों का स्वागत किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के छात्रों ने जापानी छात्रों को कौशल्या दशरथ के नंदन गीत गा कर सुनाया।
योगी ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक परंपराएं एक जैसी हैं। भारत के बच्चों को समय की पाबंदी, टीमवर्क और अनुशासन जापान से सीखना चाहिए। जापान के लोगों से वाकई बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है। जापान के लोगों का सबसे बड़ा गुण है, अनुशासन। लाइन में खड़े होकर प्रतीक्षा की आदत, सार्वजनिक स्थानों पर ऊंची आवाज़ से बातें न करना, चाहें सड़क पर हों या ट्रेन, सफाई का हर जगह ध्यान रखना। इन बातों की हमारे देश में बहुत कमी है। जापान के लोगों को हर समय भूकंप का सामना करना पड़ता है । इसने उन्हें सिखाया है, संकट में धैर्य कैसे रखा जाता है। ये भी हमारे देश में लोगों को सीखने की आवश्यकता है। जापान के लोगों का गुण है, समय की पाबंदी। यानी समय पर पहुंचन और जिम्मेदारी का एहसास। अगर ये गुण हमारे देश के लोगों में आ जाए तो हम दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर सकते हैं।
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