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'फुटपाथ पर बाल काटने वाले नाई की गलती नहीं', हाईकोर्ट ने ट्रक ड्राइवर को ठहराया जिम्मेदार, सुनाया चौंकाने वाला फैसला

तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक की चपेट में आए नाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने नाई के मुआवजे में बड़ी बढ़ोतरी करते हुए कहा कि फुटपाथ पर बैठे नाई पर 'लापरवाही में साझेदार' का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PEXELS प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क हादसे के एक मामले में फुटपाथ पर बाल काटने वाले नाई को लापरवाह ठहराने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि फुटपाथ पवित्र और सुरक्षित स्थान है और ये वाहनों के लिए नहीं बना हैं इसलिए तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक की चपेट में आए एवं सड़क किनारे बाल काटने का काम करने वाले नाई को 'लापरवाही में साझेदारी' के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने नाई के मुआवजे में कितनी बढ़ोतरी की?

जस्टिस अनीश दयाल ने 19 अगस्त को दिए फैसले में दिल्ली के आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र में फुटपाथ पर अपनी दुकान चलाने वाले नाई को मिलने वाले मुआवज़े की राशि बढ़ा दी। हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के 2022 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें ''लापरवाही में साझेदार'' होने की वजह से मुआवजे की रकम 30% कम कर दी गई थी। कोर्ट ने साथ ही बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह अपीलकर्ता नाई को 1.71 लाख रुपये और उस पर सालाना 6% की दर से ब्याज का भुगतान करे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, अपीलकर्ता फुटपाथ पर ही कुर्सी लगाकर बाल काटने का काम करता था और सितंबर 2019 में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस मामले में जस्टिस अनीश दयाल ने टिप्पणी की कि भले ही फुटपाथ पर कुर्सी लगाकर नाई का काम करने के कारण अपीलकर्ता को अनधिकृत माना जा सकता है, लेकिन यह नागरिक जिम्मेदारी या नगर निकाय की कार्रवाई का मामला होगा, न कि किसी तरह की लापरवाही में साझेदारी का।

कोर्ट ने कहा, मोटर वाहन चालकों को पैदल चलने वालों के लिए बनी जगहों का 'सम्मान' करना चाहिए और कोई व्यक्ति फुटपाथ या पैदल चलने वालों की जगह पर क्यों है, इस आधार पर उस पर 'लापरवाही में साझेदार' का आरोप नहीं लगाया जा सकता। 

सिंगल बेंच ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि लापरवाही में साझेदार तब साबित किया जा सकता है कि घायल या मृतक ने खुद दुर्घटना होने में योगदान दिया था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में, दुर्घटना मुख्य रूप से इसलिए हुई क्योंकि वाहन को फुटपाथ पर चलाया गया या वह फुटपाथ से टकराया और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए बनी जगहें पवित्र और सुरक्षित होती हैं। ये ऐसी जगहें नहीं हैं जहां वाहन चलाए जाएं या उनसे टकराएं।

वहीं, आपको बता दें कि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में दिख रहा है कि कैसे एक बुजुर्ग महिला फुटपाथ पर स्कूटी चलाने वाले के आगे चट्टान की तरह खड़ी हो गई और उसे सबक सिखाया।

(इनपुट- PTI)

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